ह्यूमर की वजह से छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों को सोशल मीडिया पर इतनी ज़्यादा पहुंच मिली कि पुलिस की कार्रवाई, चोटों और गिरफ़्तारियों की ख़बरों ने उन लोगों का भी दिल जीत लिया, जो शायद इस मुद्दे में दिलचस्पी नहीं लेते.
अमित शाह का 'वंदे मातरम् बिल' इस गीत को कानून के जरिए राष्ट्रगान के बराबर दर्जा देने की कोशिश करता है. लेकिन यह दर्जा पिछले 76 साल से अधूरे समझौते पर टिका है.
हमारी शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर रटंत विद्या का बोझ डालकर और फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘बाजी मारने’ के लिए धकेलकर तमाम प्रतिभाओं का गला घोंट देती है. ऊपर से पेपर लीक भी कहर ढाता है.
20 जुलाई का 'चलो संसद' मार्च आंसू गैस, लाठीचार्ज और हिरासत के साथ खत्म हुआ. इसके बाद छात्र आंदोलनों से निपटने के दिल्ली पुलिस के पुराने तरीकों पर फिर सवाल उठने लगे.
सवाल है कि कोई सेना आधुनिक युद्ध की मांगों के मद्देनजर किस स्तर की क्षमता में वृद्धि करे? यह केवल इससे नहीं तय होगा कि युद्धभूमि का स्वरूप कैसा है या दुश्मन कौन है.
मोदी सरकार ने छात्रों की शुरुआती मांगों पर तुरंत जवाब नहीं दिया क्योंकि उसके लिए अहंकार ज्यादा अहम था. सोच यही थी—'ऐसे आंदोलन पहले भी देखे हैं, इन बच्चों को भी संभाल लेंगे.'
नगर परिषद के कार्यपालक अधिकारी विमल कुमार की शनिवार को कथित तौर पर उस समय हत्या कर दी गई, जब वह घर जा रहे थे. उनकी पत्नी ने ड्राइवर को संदिग्ध बताया है और बड़ी साजिश का आरोप लगाया है.