नई दिल्ली: CVoter के ताजा स्नैप पोल के अनुसार, कुल उत्तरदाताओं में से आधे से ज्यादा लोग पेपर लीक के मामले को संभालने के मोदी सरकार के तरीके से संतुष्ट नहीं थे. पोलिंग एजेंसी ने रविवार को जारी अपने बयान में यह जानकारी दी. NDA समर्थकों में यह संख्या 40 प्रतिशत थी.
पोलिंग एजेंसी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भी “भारतीयों के बीच सबसे लोकप्रिय युवा नेता” के मामले में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी से 12 प्रतिशत अंकों की बढ़त बनाए हुए हैं. एजेंसी ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस लेने की CJP की मांग पर लोगों की राय साफ तौर पर बंटी हुई है.
सर्वे के नतीजे और अनुमान CVoter के स्नैप पोल CATI (कंप्यूटर असिस्टेड टेलीफोन इंटरव्यूइंग) के आधार पर तैयार किए गए हैं. यह इंटरव्यू 29 और 30 जुलाई के बीच देशभर में 18 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों से लिए गए. CVoter के अनुसार, 1,349 उत्तरदाताओं का नमूना सभी राज्यों और सभी जिलों से लिया गया. पोलिंग एजेंसी ने बताया कि आंकड़ों को जनगणना और चुनाव आयोग (ECI) के अंतिम नतीजों के अनुसार जनसांख्यिकीय प्रोफाइल के आधार पर संतुलित किया गया है.
CVoter के बयान में कहा गया, “हालांकि राहुल गांधी अभी भी मोदी से काफी पीछे हैं, लेकिन सबसे लोकप्रिय युवा नेता के रूप में उनकी लोकप्रियता बढ़ रही है.” बयान में यह भी कहा गया कि “युवाओं में सरकार के खिलाफ नाराजगी एक गंभीर मुद्दा है.” साथ ही, “ज्यादातर भारतीय कथित पुलिस ज्यादती की सही जांच चाहते हैं. वहीं ज्यादातर लोग उन लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी चाहते हैं, जिन्होंने हिंसा की और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया.”
बयान में आगे कहा गया, “कुल मिलाकर, पेपर लीक और CJP के प्रदर्शनों से NDA सरकार को राजनीतिक नुकसान हुआ है. लेकिन यही सबसे बड़ी चुनौती नहीं है. असली चुनौती युवाओं की बढ़ती निराशा है, क्योंकि उनकी बढ़ती उम्मीदें सीमित अवसरों के कारण पूरी नहीं हो पा रही हैं.”
पिछले हफ्ते NEET-UG (2026) पेपर लीक मामले को संभालने के तरीके के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा. सरकार ने पेपर लीक के मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की भी घोषणा की. साथ ही संसद के दोनों सदनों से लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन का प्रस्ताव भी पारित कराया, जिसमें नकल करने या करवाने वालों के लिए और कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है.
NDA के 58 प्रतिशत समर्थक पुलिस ज्यादती की जांच चाहते हैं
CVoter के ताजा स्नैप पोल के अनुसार, 12 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें लगता है कि CJP युवाओं की आवाज बनकर उभरी है. वहीं लगभग 50 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे भविष्य में दूसरे मुद्दों पर भी इस आंदोलन का समर्थन करेंगे.
31.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना था कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता पेपर लीक के खिलाफ और सख्त कानून बनाना होना चाहिए था. इसके बाद 27 प्रतिशत लोगों ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए थी. जबकि 17 प्रतिशत लोगों ने कहा कि विशेषज्ञ समिति का गठन सबसे पहले किया जाना चाहिए था.
क्या लोग पेपर लीक पर संसद में हुई चर्चा से संतुष्ट थे? पोलिंग एजेंसी के अनुसार, 35 प्रतिशत उत्तरदाता संतुष्ट थे, जबकि 39 प्रतिशत संतुष्ट नहीं थे.
हालांकि, देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी FIR वापस लेने की CJP की मांग पर लोगों की राय साफ तौर पर बंटी हुई थी.
CVoter ने कहा, “पहली नजर में 35.5 प्रतिशत उत्तरदाता चाहते हैं कि सभी FIR वापस ले ली जाएं. वहीं एक चौथाई से कम लोग चाहते हैं कि सिर्फ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ दर्ज FIR वापस ली जाए. खास बात यह है कि एक तिहाई से ज्यादा लोगों का कहना है कि कोई फैसला लेने से पहले जांच एजेंसियों को सभी FIR की जांच करनी चाहिए.”
वहीं 62.7 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना था कि प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ज्यादती के आरोपों की जांच होनी चाहिए. पोलिंग एजेंसी ने कहा, “दिलचस्प बात यह है कि NDA का समर्थन करने वाले लगभग 58 प्रतिशत लोग भी उचित जांच चाहते हैं.”
इसी समय, 54.2 प्रतिशत उत्तरदाता चाहते हैं कि पुलिस उन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे जिन्होंने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक सामग्री डाली. INDIA गठबंधन के समर्थकों में भी 45 प्रतिशत लोग इस मामले में पुलिस कार्रवाई का समर्थन करते हैं.
27.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं के लिए पेपर लीक को लेकर छात्रों का गुस्सा वह वजह था, जिससे CJP को समर्थन मिला.
CVoter ने कहा, “करीब 50 प्रतिशत उत्तरदाताओं का कहना है कि वे भविष्य में भी दूसरे मुद्दों पर CJP का समर्थन करेंगे, जबकि 30 प्रतिशत से कम लोग कहते हैं कि वे ऐसा नहीं करेंगे. NDA के लगभग 38 प्रतिशत समर्थकों ने भी कहा कि वे भविष्य में CJP के प्रदर्शनों और आंदोलनों का समर्थन करेंगे.”
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