Monday, 2 August, 2021
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अर्थजगत

पेट्रोल-डीजल भूल जाइए, जून-जुलाई में तो खाद्य तेलों के दाम में भी लगी है आग

हाई टैक्स लेवी घटाकर दामों में कमी लाने के लिए सरकार के प्रयासों के बावजूद पिछले 6 महीनों में खाद्य तेलों की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है. जून में खाद्य तेलों में मुद्रास्फीति 34.78% पर पहुंच गई थी.

RTI से चला पता- वित्तीय वर्ष 2020-21 में 12 सरकारी बैंकों से 81,921 करोड़ की धोखाधड़ी

ब्यौरे के मुताबिक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी की यह रकम वित्तीय वर्ष 2019-20 के मुकाबले 44.75 प्रतिशत कम है, हालांकि अब सार्वजनिक बैंक 18 से 12 रह गए हैं.
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1991 से ज्यादा चुनौतीपूर्ण है आगे का रास्ता, फिर से प्राथमिकताएं तय करने की जरूरत: मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह 1991 में नरसिम्हा राव की अगुवाई में बनी सरकार में वित्त मंत्री थे और 24 जुलाई, 1991 को अपना पहला बजट पेश किया था. इस बजट को देश में आर्थिक उदारीकरण की बुनियाद माना जाता है.

1991 के सुधारों के दायरे में बैंकिंग और वित्त क्षेत्र नहीं आए इसलिए अर्थव्यवस्था एक टांग पर चलने को...

बैंकिंग पर प्रतिबंधों के कारण नये उद्यमियों के लिए संसाधन तक पहुंच हुई सीमित, पुराने इलीट हावी रहे लेकिन अब तो इस सब से मुक्त होना चाहिए.
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कई बैंकों के शेयरों में उछाल- शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 400 अंक चढ़ा, निफ्टी 15,750 के पार

सेंसेक्स में सबसे अधिक तीन प्रतिशत की तेजी बजाज फाइनेंस में हुई. इसके अलावा टाटा स्टील, एचडीएफसी बैंक, एचयूएल, आईसीआईसीआई बैंक और इंफोसिस भी बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल थे.

भारतीय उद्योग को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए अगर शुल्क बढ़ाएंगे, तो हम 1991 वाली स्थिति में पहुंच जाएंगे: मांटेक

दिप्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में भूतपूर्व योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष ने अर्थव्यवस्था से जुड़े बहुत सारे विषयों पर बात की- जैसे सुधार, संरक्षणवाद, व्यापार, विकास आदि.

वैश्विक स्तर पर Covid की हालत में सुधार, पहली तिमाही में देश से कार, दोपहिया सभी वाहनों का निर्यात...

चालू वित्त वर्ष की पहली अप्रैल-जून की तिमाही में देश से कुल वाहन निर्यात बढ़कर 14,19,430 इकाई पर पहुंच गया. इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह आंकड़ा 4,36,500 इकाई का रहा था.

मोदी सरकार को कुछ कर दरों को बढ़ाने पर विचार करना चाहिए, कोई दूसरा रास्ता नहीं है

भारत सरकार कोविड के भुक्तभोगियों को राहत देने के लिए उस आमदनी और संपत्ति पर टैक्स दरों में वृद्धि न करने पर क्यों अडिग है जिन पर पहले से ही कम टैक्स लगाया जा रहा है?

सुधारों के लिए भारत को संकट का इंतजार था, जो नेहरू-इंदिरा के सोवियत मॉडल के चलते 1991 में आया

भारत में केंद्र द्वारा नियोजित अर्थव्यवस्था की शुरुआत 1950 के दशक में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के अधीन हुई थी लेकिन 1991 में आकर वह अचानक चरमरा गई और देश भारी संकट में फंस गया.

भारत की वृद्धि दर FY2023 में 6.5-7% के बीच रह सकती है: CEA सुब्रमण्यम

सुब्रमण्यम ने कहा कि देश को महामारी के प्रकोप से बचाने के लिए टीकाकरण बहुत जरूरी है. टीकाकरण से कोविड-19 को एक सामान्य संक्रमण में तब्दील करना भी महत्वपूर्ण है.

मत-विमत

वित्तमंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण उम्मीद से बेहतर साबित हो रही हैं

टैक्स, राजस्व, और व्यापक अर्थव्यवस्था की दिशाएं उत्सावर्द्धक हैं लेकिन निजीकरण के मोर्चे पर बहुत कुछ करने की जरूरत है, बैंकिंग क्षेत्र को दुरुस्त करना, संरक्षणवाद से पल्ला झाड़ना, सरकारी संस्थाओं को राजनीति के चंगुल से मुक्त करना बाकी है .

राजनीति

देश

महंगी सब्जियां, दवाओं की कमी – कैसे मिजोरम को नुकसान पहुंचा रही है असम की ‘नाकाबंदी’

असम ने राष्ट्रीय राजमार्ग 306 की नाकाबंदी कर दी है, जो मिजोरम को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है, और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. पिछले साल भी इसी तरह की झड़पों के बाद अक्टूबर 2020 में एक महीने के लिए इस राजमार्ग को बंद कर दिया गया था.

लास्ट लाफ

भारतीयों का आर्थिक ‘भविष्य’ और यूपी चुनाव के लिए कांग्रेस की तैयारी

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चयनित कार्टून पहले अन्य प्रकाशनों में प्रकाशित किए जा चुके हैं. जैसे- प्रिंट मीडिया, ऑनलाइन या फिर सोशल मीडिया पर.