scorecardresearch
Monday, 31 August, 2026
होममत-विमतनेशनल इंट्रेस्ट

नेशनल इंट्रेस्ट

भारत के Gen Z ने एक दरार बना दी है, यह BJP पर है कि उसे भरे या विपक्ष उसे और चौड़ा करे

युवाओं ने कुलीन तबकों की खुद की ओढ़ी उस चुप्पी को तोड़ दिया, जो उन्हें मोदी सरकार की आलोचना में एक भी शब्द खुलकर बोलने से रोकती थी, और कुछ कहना भी हो तो दाएं-बाएं, आगे-पीछे झांकने के बाद दबी आवाज में.

युवाओं के लिए यातना है हमारी शिक्षा व्यवस्था, मोदी सरकार डिसेंट्रलाइजेशन का रास्ता अपनाए

हमारी शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर रटंत विद्या का बोझ डालकर और फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘बाजी मारने’ के लिए धकेलकर तमाम प्रतिभाओं का गला घोंट देती है. ऊपर से पेपर लीक भी कहर ढाता है.

एकदलीय व्यवस्था कायम करने की BJP की कोशिश कांग्रेस में फूंक सकती है नई जान

कहीं नगरपालिका का चुनाव भी हो रहा हो और कांग्रेस का वहां कोई नाम-ओ-निशान भी न हो फिर भी आप BJP को कांग्रेस पर हमला करते पाएंगे. यह सब बताता है कि मोदी कांग्रेस को ही एकमात्र संभावित प्रतिद्वंद्वी मानते हैं.

‘सतलुज’ पंजाब में बहा सकती है आक्रोश, अविश्वास की धारा, मामला फिल्म नहीं बल्कि वोटों का है

दिलजीत दोसांझ अभिनीत ‘सतलुज’ फिल्म किसी पार्टी या नेता पर उंगली नहीं उठाती लेकिन हमें मालूम है कि पंजाब में जनसंख्या का स्वरूप ऐसा है कि यह फिल्म चिनगारी का काम कर सकती है.

राष्ट्रवाद के मुद्दे पर कांग्रेस की कमजोर होती पकड़ भारत को एक-दलीय व्यवस्था की दिशा में धकेल रही है

2014 के बाद की राजनीति में कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रवाद को छोड़ देना सबसे दिलचस्प पहलू है. असल कांग्रेस कभी भी भावुक शांतिवादियों की पार्टी नहीं रही.

सैको की शानदार मुजफ्फरनगर दंगा कॉमिक पर प्रकाशक की रोक भारत की आजादी पर एक कड़वा मजाक है

सैको की ‘रिपोर्टिंग’ अविश्वसनीय रूप से तह तक जाती है लेकिन कुछ मामलों में वे चूक गए हैं. लेकिन इस वजह से हम उस बात को न ओझल करें जिस पर सैको ने ज़ोर दिया है कि किस तरह स्थानीय झगड़े दंगों का रूप ले लेते हैं.

सत्ता से बाहर होते ही कई दल टूट क्यों जाते हैं, और कुछ दल बचे रहते हैं?

विचारधारा या सत्ता की गोंद राजनीतिक दलों को जोड़े रखती है. इनमें से कोई भी अगर उन्हें न जोड़ती हो तो दलबदल उद्योग जैसे पैमाने पर होने लगता है, जैसा इन दिनों हुआ है.

पांच चुनौतियां मोदी का इंतिजार कर रही हैं लेकिन पहले वे नेहरू और अतीत की छाया से मुक्त हों

भारत के लिए उन्होंने जो काम किए उसके सम्मोहन से खुद मोदी और उनके समर्थक अगर मुक्त हो सकें तो उन्हें भविष्य पर नजर डालनी चाहिए कि आगे उनके लिए चुनौतियां क्या-क्या हैं.

‘ब्रांड इंडिया’ के तीन दुश्मन हैं और तीनों हमारे शहरों में हैं

हमारे शहरी शासन का मुख्य अभिशाप यह नहीं है कि झुग्गी बस्ती जैसे गांवों या अवैध कॉलोनियों में ज्यादा वोटर रहते हैं, बल्कि यह है कि राजनीतिक जमात उनका जीवन स्तर सुधारने की जगह उन्हें रिझाने में लगी रहती है.

2026 में इंदिरा गांधी काल जैसा तेल संकट और युवाओं का गुस्सा. मोदी के पास मौका है लेकिन अजेयता नहीं

तेल का झटका, मॉनसून फेल होने का डर, व्यापक बेरोजगारी, और आसन्न महंगाई से उपजे संकट इंदिरा युग में भी थे और आज भी हैं; इंदिरा गांधी ने जो आत्मघाती कदम उठाया था वह आज के लिए भी एक सबक है.

मत-विमत

जंक फूड पर चेतावनी लेबल से क्यों बच रहा FSSAI? इसका विरोध समझ से परे है

एक रेगुलेटर के तौर पर, FSSAI की ज़िम्मेदारी है कि वह आम लोगों के हितों की रक्षा करे और उन्हें नुकसानदायक खाने-पीने की चीज़ों से बचाए, लेकिन असल में उसके काम संतोषजनक नहीं रहे हैं.

वीडियो

राजनीति

देश

लता गुप्ता के सडीसीडब्ल्यू अध्यक्ष बनने के बाद से आयोग को मिली करीब 200 शिकायतें

नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) लता गुप्ता द्वारा दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्ल्यू) अध्यक्ष का पदभार संभालने के बाद आयोग को करीब 200 शिकायतें मिली...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.