scorecardresearch
Sunday, 3 May, 2026
होममत-विमतनेशनल इंट्रेस्ट

नेशनल इंट्रेस्ट

खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है

सरकार कड़वा सच क्यों नहीं बोल सकती, इसे समझना बहुत आसान है. तमाम युद्धों की तरह यह युद्ध भी जब रुक जाएगा तब भी भारत के हित विजेता के साथ भी जुड़े होंगे और हारने वालों के साथ भी.

‘विश्वगुरु’ बनने का हमारा-आपका भ्रम, दुनिया को देखने की समझ बिगाड़ रहा है

एक पक्ष सोचता है कि आज भारत अपनी हैसियत से ज्यादा आगे बढ़कर कदम उठा रहा है, जबकि दूसरा पक्ष सोचता है कि मोदी ने भारत की हैसियत कमजोर कर दी है और भारत अपनी हैसियत से कम कदम उठा रहा है. सच यह है कि दोनों ही गलत हैं.

भारत के पड़ोस में जनांदोलनों के बाद शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन लोकतंत्र की मजबूती की मिसाल है

लोकतंत्र की ‘रेटिंग’ करना एक जोखिम भरा काम है. मैं केवल इस सीधी-सी कसौटी को लागू करता हूं—कहां सबसे शांतिपूर्वक तथा सामान्य ढंग से राजनीतिक सत्ता का निरंतरता के साथ बदलाव होता रहा है.

ट्रंप अगर अपनों को शर्मसार कर रहे हैं, तो मोदी विदेश में संयम और घर में विनम्रता अपनाएं

डॉनल्ड ट्रंप ने मानमर्दन का दौर ला दिया है, उनका तरीका अमेरिका के मित्रों पर खुलकर अशिष्टता के साथ धौंस जमाने वाला रहा है. ट्रंप को मालूम है कि उनमें से कोई भी उनका प्रतिकार नहीं कर सकता.

तालिबान, TTP और बलूच चुनौती: रणनीतिक भूल की कीमत, पाकिस्तान दो तरफ से घिरा

पाकिस्तान का सियासी नेतृत्व कमजोर और कमअक्ल दिखता है. उसकी कूटनीति पूरी तरह भारत-चीन-अमेरिका केंद्रित है और वह अफगानिस्तान को अपना गुलाम मानता रहा है.

क्या कोई देश पूरी तरह संप्रभु है? ट्रंप की डिप्लोमेसी और कोल्ड वॉर से भारत ने क्या सीखा?

भारत का तनावग्रस्त पड़ोस उसके लिए रणनीतिक विकल्पों को कई तरह से सीमित करता है. ऐसे में आपके पास गहरी सांस लेने, आराम से सोचने का मौका नहीं है.

दुनिया का नया खेल: ट्रंप वक्त जुटाने, चीन ताकत बढ़ाने, भारत अपने लिए जगह ढूंढने में जुटा

हर देश अब यह खेल खेलना सीख रहा है. कुछ देश नए सहयोगी ढूंढ रहे हैं या उन देशों की अहमियत समझ रहे हैं, जिनमें पहले उनकी बहुत कम दिलचस्पी थी. इसका सबसे साफ उदाहरण भारत और यूरोप हैं.

डियर नरेंद्रभाई: बांग्लादेश चुनाव से भारत–बांग्लादेश के रिश्तों को ‘रीसेट’ करने का मौका है

अगले वीकेंड तक बांग्लादेश में एक चुनी हुई सरकार बन जाएगी. यह भारत के लिए मौका है कि वह चुनाव वाले पश्चिम बंगाल और असम में ‘घुसपैठिया’ वाली भाषा को नरम करके बिगड़े रिश्तों को फिर से ठीक करे.

स्विस रिपोर्ट: अब ऑपरेशन सिंदूर बहस को खत्म कर देना चाहिए. यह जानना भी अहम है कि लड़ाई कब रोकनी है

किसी भी युद्ध को जीतने तो क्या, शुरू करने की कुंजी यह होती है कि उसका लक्ष्य स्पष्ट हो. यह पूरी तरह से राजनीतिक विषय होता है. यह न तो भावनात्मक मामला होता है, और न ही शुद्ध रूप से सैन्य मामला.

दावोस के सन्नाटे में उभरती नई दुनिया: मिडल पावर्स और ‘ट्रंप पीड़ित’ एलायंस का गुटनिरपेक्षता 2.0

चीन को छोड़ कोई भी देश ट्रंप के साथ बराबरी की हैसियत से बात नहीं कर सकता. इसलिए, जो ‘मिडल पावर’ देश इन बहुपक्षीय संगठनों के मूल आधार थे वे आज बेसहारा महसूस कर रहे हैं.

मत-विमत

OPEC से UAE का बाहर आना महज तेल का मुद्दा नहीं है, ईरान युद्ध के बीच खाड़ी देश नई पनाह तलाश रहे हैं

1950 के दशक में अरब का तेल हासिल करने में ब्रिटेन की नाकामी कोई गलत फ़ैसला नहीं था. साम्राज्य का सूरज डूब रहा था, और एक नई महाशक्ति उभर आई थी. क्या अब एक और अराजकता सिर उठा रही है?

वीडियो

राजनीति

देश

असम चुनाव के नतीजे सोमवार को; मतगणना से भाजपा की ‘हैट्रिक’ या कांग्रेस की वापसी का फैसला होगा

गुवाहाटी, तीन मई (भाषा) असम में चुनावी लड़ाई सोमवार को मतों की गिनती के साथ अपने अंतिम चरण में प्रवेश करेगी, जिससे यह...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.