आधुनिक भारत की छवि पर गांधी की छाया भले हावी रही हो, यह कभी गांधीवादी देश, ‘सॉफ्ट स्टेट’ नहीं रहा. नेहरू से लेकर पटेल तक इस गणतंत्र के तमाम संस्थापकों ने उनके विचारों को नहीं अपनाया.
ज्ञानेश कुमार अब हमारे 26 CECs में से दूसरे सबसे यादगार व्यक्ति बन गए हैं. ज़ाहिर है, उन्होंने यह 'शोहरत' नहीं चाही थी। लेकिन वे इससे पीछा भी नहीं छुड़ा सकते.
भारत खुद के बनाए जाल में फंस गया है. भले ही BJP को लोगों की असुरक्षा की भावना का फ़ायदा उठाना सुविधाजनक लगे, लेकिन इससे पाकिस्तान और बांग्लादेश को बढ़त मिल जाती है.
भारत, चीन, रूस में तालमेल से ज्यादा अंतर्विरोध दिखता रहा है. दुनिया को देखने का हर एक का अलग-अलग नजरिया है, उनके प्रतिद्वंद्वी भी अलग-अलग हैं. सो, कड़वी हकीकत यह है कि BRICS ऐसे सभी समूहों में सबसे अप्रासंगिक समूह है.
‘ईबीपी’ का आइडिया बहुत अच्छा हो सकता है, लेकिन इसके लिए तीन-चार साल पहले से तैयारी करनी चाहिए थी. अब हम चीनी और दूसरी चीज़ों की बढ़ती कीमतों का सामना कर रहे हैं, जबकि त्योहार सामने हैं. इसके अलावा विदेशी मुद्रा की स्थिति भी खराब है.
इमरान खान का स्वभाव जितना उग्र और आत्म-मुग्ध है उसके कारण मुझे नहीं लगता कि अदियाला जेल के एकांत में वे कोई आत्ममंथन कर रहे होंगे. कड़वी हकीकत यह है कि उन्होंने वही खेल तब खेला जब यह उन्हें मुफीद लगा.
सभी पाकिस्तानी तानाशाह एक समय के बाद उन्मादग्रस्त होने के संकेत देते दिखे हैं, 1950 वाले दशक से यह भारत के लिए एक रणनीतिक हकीकत रही है. मुनीर जिस डर से ग्रस्त हैं उसे ‘एक्रोफोबिया’ यानी ऊंचाई से डर के रूप में परिभाषित किया जा सकता है.
चालीस साल पहले, इसी सप्ताह खालिस्तान कमांडो फोर्स के हत्यारे जनरल वैद्य को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमारे इस रिटायर्ड सेनाध्यक्ष की सुरक्षा की सिर्फ इतनी फिक्र की गई थी कि उनके लिए पुलिस का सिर्फ एक गनमैन तैनात किया गया था.
भागवत दूर से नजर रखे हुए थे और मोदी सरकार के खिलाफ युवाओं के आक्रोश को लेकर चिंतित थे. सबसे पहला काम तो उन्होंने यह किया कि Gen-Z के आंदोलनकारियों को राष्ट्र-विरोधी बताने वाली आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया.
युवाओं ने कुलीन तबकों की खुद की ओढ़ी उस चुप्पी को तोड़ दिया, जो उन्हें मोदी सरकार की आलोचना में एक भी शब्द खुलकर बोलने से रोकती थी, और कुछ कहना भी हो तो दाएं-बाएं, आगे-पीछे झांकने के बाद दबी आवाज में.
नेतन्याहू की जीत इसलिए मानी जाएगी क्योंकि उन्हें हराया नहीं जा सका है. हमास की ‘कृपा’ से उन्होंने इजरायल को पूरी तरह बदल दिया है. अब वहां अरब नागरिकों को अलग करके ही कोई गठबंधन सत्ता में आ सकता है.
बेंगलुरु, 31 अक्टूबर (भाषा) कर्नाटक की राज्यपाल सुधा यादव और मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने उत्तराखंड में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में राज्य के पांच पर्यटकों...