भारत, चीन, रूस में तालमेल से ज्यादा अंतर्विरोध दिखता रहा है. दुनिया को देखने का हर एक का अलग-अलग नजरिया है, उनके प्रतिद्वंद्वी भी अलग-अलग हैं. सो, कड़वी हकीकत यह है कि BRICS ऐसे सभी समूहों में सबसे अप्रासंगिक समूह है.
‘ईबीपी’ का आइडिया बहुत अच्छा हो सकता है, लेकिन इसके लिए तीन-चार साल पहले से तैयारी करनी चाहिए थी. अब हम चीनी और दूसरी चीज़ों की बढ़ती कीमतों का सामना कर रहे हैं, जबकि त्योहार सामने हैं. इसके अलावा विदेशी मुद्रा की स्थिति भी खराब है.
इमरान खान का स्वभाव जितना उग्र और आत्म-मुग्ध है उसके कारण मुझे नहीं लगता कि अदियाला जेल के एकांत में वे कोई आत्ममंथन कर रहे होंगे. कड़वी हकीकत यह है कि उन्होंने वही खेल तब खेला जब यह उन्हें मुफीद लगा.
सभी पाकिस्तानी तानाशाह एक समय के बाद उन्मादग्रस्त होने के संकेत देते दिखे हैं, 1950 वाले दशक से यह भारत के लिए एक रणनीतिक हकीकत रही है. मुनीर जिस डर से ग्रस्त हैं उसे ‘एक्रोफोबिया’ यानी ऊंचाई से डर के रूप में परिभाषित किया जा सकता है.
चालीस साल पहले, इसी सप्ताह खालिस्तान कमांडो फोर्स के हत्यारे जनरल वैद्य को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हमारे इस रिटायर्ड सेनाध्यक्ष की सुरक्षा की सिर्फ इतनी फिक्र की गई थी कि उनके लिए पुलिस का सिर्फ एक गनमैन तैनात किया गया था.
भागवत दूर से नजर रखे हुए थे और मोदी सरकार के खिलाफ युवाओं के आक्रोश को लेकर चिंतित थे. सबसे पहला काम तो उन्होंने यह किया कि Gen-Z के आंदोलनकारियों को राष्ट्र-विरोधी बताने वाली आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया.
युवाओं ने कुलीन तबकों की खुद की ओढ़ी उस चुप्पी को तोड़ दिया, जो उन्हें मोदी सरकार की आलोचना में एक भी शब्द खुलकर बोलने से रोकती थी, और कुछ कहना भी हो तो दाएं-बाएं, आगे-पीछे झांकने के बाद दबी आवाज में.
हमारी शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर रटंत विद्या का बोझ डालकर और फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘बाजी मारने’ के लिए धकेलकर तमाम प्रतिभाओं का गला घोंट देती है. ऊपर से पेपर लीक भी कहर ढाता है.
कहीं नगरपालिका का चुनाव भी हो रहा हो और कांग्रेस का वहां कोई नाम-ओ-निशान भी न हो फिर भी आप BJP को कांग्रेस पर हमला करते पाएंगे. यह सब बताता है कि मोदी कांग्रेस को ही एकमात्र संभावित प्रतिद्वंद्वी मानते हैं.
दिलजीत दोसांझ अभिनीत ‘सतलुज’ फिल्म किसी पार्टी या नेता पर उंगली नहीं उठाती लेकिन हमें मालूम है कि पंजाब में जनसंख्या का स्वरूप ऐसा है कि यह फिल्म चिनगारी का काम कर सकती है.
मैं पगड़ी पहनने वाला और धर्म का पालन करने वाला सिख हूं. जेल से शरजील इमाम ने जो लंबा इंटरव्यू दिया है, मैं उससे ज़्यादातर बातों पर सहमत नहीं हूं, भले ही वह इंटरव्यू कितना भी गंभीर क्यों न हो.