Wednesday, 17 August, 2022
होमसमाज-संस्कृति

समाज-संस्कृति

सपनों की फेहरिस्त बहुत लंबी है, अभी तक मेरा मास्टरपीस आया नहीं है: राजपाल यादव

राजपाल यादव ने कहा कि जब से दुनिया बनी तब से हंसी का बोलबाला है क्योंकि हम सबको मुस्कुराहट के लिए लाफ्टर तो चाहिए ही. मैं मानता हूं कि कठिन रूपी जीवन जीने के लिए आर्ट एक लाइफ सपोर्टर है.

किसान जीवन का द्वंद्व और जीवन की संभावनाओं की यात्रा है ‘ढलती सांझ का सूरज’

'ढलती सांझ का सूरज' किताब की सबसे अच्छी बात यह है कि ये एक ऐसी प्रासंगिकता भरी यात्रा है जो संजीदगी और शोध के जरिए लिखी गई है.

‘ED छापे मार सकती है लेकिन मामलों का बचाव नहीं कर सकती’- उर्दू प्रेस की इस हफ्ते की सुर्खियां

दिप्रिंट का राउंड-अप कि उर्दू मीडिया ने पिछले हफ्ते की घटनाओं को कैसे कवर किया और उनमें से कुछ ने क्या संपादकीय रुख इख़्तियार किया.

आजादी के पहले सावरकर को कांग्रेस ने कहा था ‘रिक्रूटवीर’; बताया था अंग्रेजों का पिट्ठू

विभाजन के समय पाकिस्तान की तुलना में यदि सैन्य संतुलन भारत के विरुद्ध होता तो नए मुसलिम राष्ट्र ने भारतीय सीमावर्ती मुसलिम बहुल राज्यों-राजस्थान, गुजरात और यद्यपि बंगाल के मुसलिम बहुल क्षेत्रों को निगलने का प्रयास किया होता, जहां मुसलमानों की संख्या हिंदुओं से अधिक थी.

कितनी बार लुटा भारत का कोहिनूर, कैसे लंदन के संग्रहालय तक पहुंचा

यह फिल्म खत्म होते-होते यह सवाल भी छोड़ जाती है कि हम भारतीयों के लिए कोहिनूर के मायने क्या हैं-सदियों की विरासत, गौरवशाली इतिहास, भारत की पहचान, बेशकीमती रत्न, शापित हीरा या सिर्फ एक चमकता पत्थर?

शमशेरा के पिटने पर संजय दत्त और करण मल्होत्रा का दुख सही है लेकिन इसके लिए दर्शक जिम्मेदार नहीं हैं

शमशेरा पिटी क्यों? इस फिल्म को दर्शकों का वो प्यार क्यों नहीं मिला जिसकी उम्मीद फिल्म बनाने वालों और उससे जुड़े लोगों को थी?

रणवीर सिंह के न्यूड फोटो शूट का विवाद नया नहीं, मिलिंद सोमन-मधु सप्रे भी कर चुके हैं ऐसा ऐड

नई दिल्ली: चालाकी से बनाये गए विज्ञापन हमेशा ब्रांडों का ही प्रचार नहीं करते हैं, बल्कि वे शायद ही कभी लोगों की याददास्त से...

पेचीदा नैरेशन में उलझी बेहद बोर फिल्म है मोहित सूरी की ‘एक विलेन रिटर्न्स’

सूरी की फिल्मों में गाने हर दूसरे सीन के पीछे से आ-आकर बजते रहते हैं, भले ही उनकी जरूरत हो या न हो. उनकी फिल्मों के संवाद पैदल किस्म के होते हैं.

सीतारमण की बीमारी एक ‘बहाना’- उर्दू प्रेस ने कहा सदन में महंगाई और GST पर बहस को रोक रही है सरकार

दिप्रिंट का जायज़ा कि उर्दू मीडिया ने हफ्ते भर की बहुत सी ख़बरों को किस तरह कवर किया, और उनमें से कुछ ने क्या संपादकीय रुख़ इख़्तियार किया.

नेशनल फिल्म अवार्ड मिलने से डॉक्यूमेंट्री का मैसेज और लोगों तक पहुंचेगा: कामाख्या नारायण सिंह

15 मिनट की डॉक्यूमेंट्री 'जस्टिस डिलेड बट डिलीवर्ड' बनाने वाले कमाख्या नारायण सिंह ने कहा कि बेजुबानों को जुबान देने की अभी के वक्त में सबसे ज्यादा जरूरत है.

मत-विमत

दिमागी दबाव बनाने के लिए हवाई क्षेत्र के अतिक्रमण के चीनी खेल का भारत को देना होगा जवाब          

भारत के सामने अपनी सेना को संसाधन पहुंचाने का ही मसला नहीं है, उसके राजनीतिक नेतृत्व को नारेबाजी छोड़कर नतीजे देने वाले सुधारों को लागू करना पड़ेगा. 

वीडियो

राजनीति

देश

उप्र: पुलिस ने नोएडा से तीन साल पहले अगवा की गई किशोरी बरामद की

नोएडा (उप्र),17अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने तीन साल पहले यहां एक कॉलोनी से कथित रूप से अगवा की गई एक...

लास्ट लाफ

एक मुख्यमंत्री की ‘प्राइम-आत्मा’ और ‘पूराने’ जैसे बिहार के नए बॉस से मिलिए

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए पूरे दिन के सबसे अच्छे कार्टून.