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Friday, 24 July, 2026
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समाज-संस्कृति

ZEE5 से हटाई गई, लाउडस्पीकर से ऐलान: पंजाब में गुरुद्वारे कैसे ‘सतलुज’ को दे रहे हैं नई जिंदगी

पंजाब के गांवों में दिलजीत-स्टारर सतलुज की स्क्रीनिंग के लिए एक भी आयोजक नहीं है. कुछ गांवों में, स्पोर्ट्स क्लब ने एलईडी दीवारों और साउंड सिस्टम की व्यवस्था करने के लिए संसाधन जुटाए हैं.

अयोध्या में राम मंदिर पर नई फिल्म की शूटिंग शुरू, अनुपम खेर ने किए रामलला के दर्शन

'श्री राम भूमि' फिल्म राम मंदिर के निर्माण की लंबी यात्रा को दिखाएगी. यह मुद्दा कई दशकों तक भारत की राजनीति, कानून और सांस्कृतिक चर्चा का हिस्सा रहा है.

आर. माधवन: टीवी शो में ठग और फिल्मों के लवर बॉय से लेकर पद्मश्री तक का सफर

आर. माधवन को साल 2000 में निर्देशक मणिरत्नम की फिल्म ‘अलाई पायुथे’ से बड़ा ब्रेक मिला था.

एक गौरैया, कुछ भूली हुई यादें और अपने ही घर में भूत हो जाने का भय

गीतांजलि श्री के उपन्यास सहसा के इस अंश में एक मामूली-सी घटना से जन्मा संदेह धीरे-धीरे मन, स्मृति और अस्तित्व के गहरे प्रश्नों में बदल जाता है.

जब दिल्ली में खस की चिक से मिलती थी ठंडक—रस्किन बॉन्ड की बचपन वाली दिल्ली

मृत्यु का बोध मुझे नहीं था, लेकिन जाने क्यों मुझे डर लगने लगा कि मैं अपने पिता को खो दूँगा. कुछ दिनों में वह पूरी तरह अच्छे हो गए तो मुझे राहत मिली, और मेरा सारा डर काफ़ूर हो गया. ऐसा लगता कि वह कभी बीमार ही नहीं पड़े.

इश्क, आज़ादी और संगम का किनारा—चार दिनों में कैसे जी ली गई पूरी मोहब्बत

“ना तो मैं अपना नाम बदलूंगी ना धर्म, मुझे तुम्हारे साथ वैसे ही रहना है जैसे जोधा अकबर के साथ रहती थी,तुम अल्लाह की इबादत करना,मैं अपने किशन कन्हैया की पूजा करूंगी."

धर्म के नाम पर पैसा बटोरकर बर्बाद करना अपराध है—डॉ. आंबेडकर

कुछ समय पहले बाबा की मृत्यु हो गई है और मैं समझता हूं कि बाबा अपने पीछे अनुयायियों की जमात छोड़ गए हैं, जिनकी संख्या में बाबा की मृत्यु के बाद भी लगातार वृद्धि हो रही है. वह कई लोगों के धर्म गुरु के रूप में जाने जाते हैं.

आशा भोसले बॉलीवुड की कैबरे क्वीन थीं. उन्होंने ठुकराए जाने और ‘बोल्ड’ गानों की आलोचना का सामना किया

एक समय आशा भोसले को गरीबों की गीता दत्त कहा जाता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी, गाती रहीं और इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई.

साइमन कमीशन से लेकर असेंबली बम तक: भगत सिंह की क्रांति और 63 दिन की ऐतिहासिक भूख हड़ताल

1928 में लाला लाजपत राय की मौत के बाद सांडर्स की हत्या, 1929 में असेंबली बम कांड और जेल में क्रांतिकारियों की लंबी भूख हड़ताल ने देशभर में आज़ादी की लड़ाई को नई गति दी.

नक्सलवाद नहीं, असली समस्या आदिवासियों के अधिकारों की है—वीर भारत तलवार

राजनीतिक समस्याओं का हल राजनीतिक स्तर पर ही किया जाना चाहिए. नक्सली हिंसा गलत है तो राज्य की हिंसा और भी गलत है. इनसे किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकता.

मत-विमत

CJP प्रदर्शन अन्ना आंदोलन जैसा नहीं, मोदी सरकार को समझ नहीं आ रहा इससे कैसे निपटें

मोदी सरकार ने छात्रों की शुरुआती मांगों पर तुरंत जवाब नहीं दिया क्योंकि उसके लिए अहंकार ज्यादा अहम था. सोच यही थी—'ऐसे आंदोलन पहले भी देखे हैं, इन बच्चों को भी संभाल लेंगे.'

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राजनीति

देश

रुपया 20 पैसे मजबूत होकर 96.53 प्रति डॉलर पर बंद

मुंबई, 24 जुलाई (भाषा) अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 20 पैसे मजबूत होकर 96.53 पर...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.