Monday, 6 December, 2021
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हरियाणा में मिले 1 लाख साल पुराने सभ्यता के अवशेष, भारतीय संगीत के इतिहास पर भी फिर से विचार की जरूरत

वेदों में वर्णित संगीत और वर्तमान संगीत में हुए विकास को अपनाया जा रहा है तो प्रस्तर युगीन मानव के संगीत के लुप्त हो जाने और उसके परिवर्तित एवं विकसित रूप को ग्रहण करने में आपत्ति क्यों?

चित्रों और शिल्प में डूबे सदाशिव साठे जिन्होंने गांधी, शिवाजी से लेकर तिलक की चर्चित मूर्तियां बनाईं

सदाशिव साठे की कला में एक देशज ठाठ दिखाई देता है. उनकी चित्रकला और मूर्तिकला, दोनों विषयों पर समान अधिकार था.

‘माज़ा, बरकते, ज़ोरबी’: इमरोज़ का होना अमृता प्रीतम के जीवन की सबसे बड़ी तसल्ली थी

अमृता प्रीतम की लंबी जिंदगी में कई पड़ाव हैं. इस संसार में नए-नए और अलबेले रंग हैं, मिट्टी की खुशबू है, रिश्तों का सौंधापन है, स्मृतियों का खजाना है, यात्राओं की उत्सुकता और थकान है.

‘हर जोर जुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है’- कैसे राज कपूर के ‘पुश्किन’ बन गए गीतकार शैलेंद्र

शैलेंद्र की लेखनी पूरी तरह कवि धर्मिता के अनुरूप थी. उसमें समकालीन मुद्दों की झलक थी, संघर्षों की आवाज थी, गरीबी का दर्द था, प्यार की तड़प थी और भविष्य के लिए आशा थी.

ऋषिकेश मुखर्जी एक नया सिनेमा लेकर आए, गोल्डन एरा के बाद फिल्मों का एक दौर रचा

ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों में कहानी की खास अहमियत होती थी. चमक-दमक से इतर वो समाज के अंतर्द्वंदों, उसके व्यवहार, दैनिक जीवन को दर्शाते थे और छोटी-छोटी कहानियों को बड़ा फलक देते थे.

शूद्रमुनि की महाभारत: जो बताती है कि पाण्डव बचपन से जानते थे कि कर्ण उनके बड़े भाई हैं

आधुनिक भारतीय भाषा में एक कवि द्वारा सम्पूर्ण महाभारत का प्रथम पुनःकथन है और शायद यह एक मात्र क्षेत्रीय महाभारत है जो व्यास महाभारत से भी लम्बी है.

‘मेरी खूबसूरती का राज़…’ बाथ-टब में लेटे हुए शाहरूख़ का वह विज्ञापन जिसने लक्स को एक ‘बोल्ड एंड ब्यूटीफुल’ ब्रांड बनाया

2005 के इस विज्ञापन ने सौंदर्य उत्पादों के विज्ञापन के लिए महिलाओं के उपयोग वाले खेल को एकदम उलट कर रख दिया था, क्योंकि इसने दर्शकों की निगाहों को महिलाओं के प्रति यौनआकर्षण के बजाय एक पुरुष पर केंद्रित कर दिया था.

एक देश बारह दुनिया, तस्वीर, जो हमारी संवेदनाओं को गहरे तक झकझोरती और समृद्ध भी करती है

एक देश बारह दुनिया, दरअसल बारह दुनियाओं की बात कहती है. इसमें भुखमरी, कुपोषण से लेकर कोठे पर काम करने वाली महिलाओं और खेल तमाशा कर जावन यापन करने वालों तक के जीवन से जोड़कर पाठक को झकझोर कर रख दिया है.

राजस्थान के आदिवासियों की सदियों पुरानी ‘मौताणा’ प्रथा अब उन्हीं के लिए नासूर कैसे बन गई है

मौताणा का मक़सद आरोपी को आर्थिक दंड और पीड़ित को सहायता देना था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से यह प्रथा साजिश और शोषण का ज़रिया बन गई है.

‘आधुनिक डोगरी की जननी’ कवयित्री-संगीतकार पद्मा सचदेव ने 81 साल की उम्र में मुंबई में ली अंतिम सांस

1940 में जम्मू के पुरमंडल में जन्मी पद्मा एक संस्कृत विद्वान जय देव बडू की तीन संतानों में सबसे बड़ी थी. पिता की भारत के विभाजन के दौरान मृत्यु हो गयी थी.

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नागालैंड में हत्याओं के बाद पूर्वोत्तर में AFSPA हटाने की मांग ने फिर पकड़ा जोर

‘मणिपुर वीमेन गन सर्वाइवर्स नेटवर्क’ और ‘ग्लोबल अलायंस ऑफ इंडिजिनस पीपल्स’ की संस्थापक बिनालक्ष्मी नेप्राम ने आफस्पा को 'औपनिवेशिक कानून' बताते हुए कहा कि यह सुरक्षा बलों को 'हत्या करने का लाइसेंस' देता है.

लास्ट लाफ

‘फ्री स्पीच चैंपियन’ ममता का बीता हुआ कल और मोदी मुक्का मारने के बजाए चबाने का मज़ा लेते हैं

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए पूरे दिन के सबसे अच्छे कार्टून