Thursday, 27 January, 2022

ले.जन. एच.एस. पनाग (रिटा.)

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मत-विमत

अब इस गणतंत्र में सिर्फ ‘तंत्र’ बचा है, अगर ‘गण’ अब भी न जगा तो कुछ न बचेगा

गणतंत्र की प्राणवायु यानी विचार अब खर्च हो गए हैं. इक्कीसवीं सदी में गणतंत्र को बचाने के लिए बीसवीं सदी की विरासत का संयोजन और संशोधन करते हुए एक नई विचारधारा को गढ़ना होगा.

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जम्मू, 26 जनवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर के रामबन जिले में बुधवार को भूस्खलन के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद कर दिया गया। सूत्रों ने...

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