कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार के इस कदम से सत्ताधारी पार्टी और RSS जैसे संगठनों के बीच बढ़ता टकराव और तेज़ हो गया है; राज्य में RSS की अच्छी-खासी मौजूदगी है.
उत्तराखंड में कांग्रेस अध्यक्ष की रैली वाली जगह पर शुद्धिकरण की रस्म होने की खबरों के बाद, उन्होंने 'अस्पृश्यता निवारण कानून' के तहत कार्रवाई की मांग की है.
जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह की अध्यक्षता वाला अकाली दल (वारिस पंजाब दे) पिछले जनवरी में अस्तित्व में आया, जो शिरोमणि अकाली दल का एक पंथिक विकल्प पेश करता है.
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी टेंट लगने की खबरों पर मोदी सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है और डोकलाम व लद्दाख जैसे गतिरोधों के दोहराव के प्रति आगाह किया है.
जॉन ब्रिटास के ख़िलाफ़ कथित 'लुंगीवाला' टिप्पणी को लेकर राज्यसभा में हंगामा. CPI(M) सांसद ने कहा, 'यह दूसरों को अलग-थलग दिखाने का एक तरीका है...' चेयरमैन ने कहा, 'हमारी संस्कृति अनोखी है... सांसदों को सलाह है कि वे किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचाएं.'
राहुल गांधी और सैम पित्रोदा ने झारखंड के प्रदर्शन कर रहे छात्रों का समर्थन किया, लेकिन कांग्रेस के चार मंत्री सोरेन सरकार में बने हुए हैं—सत्ता में रहते हुए विपक्ष करने की अपनी सीमाएं हैं.
यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारी पीएम मोदी की भाषा से प्रभावित थे. ज्यादा संभावना है कि वे बीजेपी समर्थक सोशल मीडिया हैंडल्स की ओर से सरकार के आलोचकों के खिलाफ लगातार की जाने वाली गाली-गलौज से प्रभावित थे.