Saturday, 26 November, 2022

शंकर अर्निमेष

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मत-विमत

आज के नेता नहीं समझते कि भारत में एक ही विचारधारा नहीं चली, चाहे सावरकर की हो या नेहरू या नेताजी की

वह युग बीत गया है जब पुरानी पीढ़ी के नेता समझते थे कि हमारे देश में कई विचारधाराएं चलती हैं और वे सब सम्मान के काबिल हैं. आप किसी के विचार से सहमत न हों तो इसका मतलब यह नहीं होता कि आप उसे बदनाम करें.

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हैदराबाद, 25 नवंबर (भाषा) तेलंगाना के आईटी और उद्योग मंत्री के. टी. रामाराव ने राज्य में देश का पहला एकीकृत रॉकेट डिजाइन, निर्माण व...

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