ब्राह्मण, बनियों की पार्टी कही जाने वाली BJP को कैसे मिल गए OBC के वोट
मनमोहन सिंह सरकार और कांग्रेस ने अपनी गलतियों से ओबीसी मतदाताओं को बीजेपी खेमे में धकेल दिया. बीजेपी को ओबीसी के लिए कुछ करने की जरूरत ही नहीं पड़ी
मोदी को हराने का सपना देखने वालों को देना होगा तीन सवालों का जवाब, लेकिन तीसरा सवाल सबसे अहम...
क्या नरेंद्र मोदी को हराया जा सकता है? अगर हां, तो क्या कोई इसकी कोशिश कर रहा है? 2024 में मोदी को हराने की उम्मीद बांधे विपक्षी नेताओं को ऐसे कुछ अहम सवालों के जवाब ढूंढने चाहिए.
पहले जीएम और अब फोर्ड- दुनिया की बड़ी मोटर कंपनियों के लिए भारत कब्रिस्तान क्यों बनता जा रहा है
भारत कम कीमत और कम खर्च में दौड़ने वाली कारों का बाज़ार है. मारुति और ह्युंडइ को छोड़कर दुनिया की बड़ी मोटर कंपनियों के पास ऐसे मॉडल नहीं हैं.
बाजार के हाल और मुद्रास्फीति ने भारतीयों को फिर से सोने का दीवाना बनाया, सरकार इसे रोकने के उपाय...
शादियों और त्योहारों के मौसम में बढ़ने वाली मांग और ऊंची मुद्रास्फीति सोने के आयात को बढ़ावा दे रही है. बचत पर ब्याज दरों में गिरावट और इक्विटी मार्केट की समस्याएं इसमें और वृद्धि ला सकती है.
तालिबान से संभावित खतरे को बाइडन गंभीरता से नहीं ले रहे, ये दूसरे 9/11 को न्योता देना है
भीख का कटोरा लेकर घूमने से पहले हालांकि तालिबान नेतृत्व अपनी एके 47 रायफलें छिपा लेंगे, लेकिन बात-बात पर गोली चलाने पर उतारू कट्टरपंथी समूहों पर, उनका कोई नियंत्रण नहीं होगा.
स्टेट बैंक लूटने तक मनी हाइस्ट प्रोफेसर पाकिस्तान के किराना स्टोर में क्यों कर रहा है काम
स्पॉइलर अलर्ट, लेटेस्ट सीजन में जो हुआ उससे पाकिस्तान में मनी हाइस्ट के प्रशंसक परेशान हैं. कुछ लोग तो इसके लिए इमरान खान सरकार पर आरोप तक लगा रहे हैं.
गुलज़ार- एक ऐसा तिलिस्म जो हमारे समय का फिक्र और फख्र दोनों हैं
गुलज़ार साहब के डायरेक्टोरियल डेब्यू 'मेरे अपने ' के रिलीज की आज 50वीं सालगिरह है. गुलज़ार के असर से अप्रभावित रहना मुमकिन ही नहीं है, यह असर उन्होंने निर्देशक के रूप में भी छोड़ा है.
तालिबान से बातचीत तो ठीक है लेकिन भारत को सबसे बुरी स्थिति के लिए भी तैयार रहना चाहिए
अधिक जटिल चेहरे वाले तालिबान के दोहरे खेल और कबायली गृहयुद्ध तक से निपटने के लिए भारत को अपने ‘प्लान-बी’ को लागू करने की भी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए.
मोहम्मद अली जिन्ना की जिंदगी में आईं सिर्फ तीन औरतें, कौन हैं ये
मोहम्मद अली जिन्ना की 11 सितंबर 1948 को मृत्यु हो गई थी. मैंने इस मौके पर तैयार शोध लेख में दावा किया है कि उनके जीवन में सिर्फ तीन औरतें आती हैं. उनकी पत्नी रत्नाबाई, बेटी और बहन फतिमा. पर उनकी पटी सिर्फ बहन से ही. क्या जिन्ना औरत विरोधी शख्स थे?
पाकिस्तान और चीन एक गैर-भरोसेमंद तालिबानी सरकार की उम्मीद कर रहे हैं, भारत को भी यही करना चाहिए
हक़्क़ानी गुट के भारत विरोधी एजेंडा के कारण पाकिस्तान तालिबानी सरकार में उसकी प्रभावशाली भूमिका चाहता है इसलिए हमें सचेत रहने की जरूरत है.


















