तिब्बती लोगों ने सबसे पहले यह देखा कि चीन आज लद्दाख में जिन हथकंडों का इस्तेमाल कर रहा है—जैसे नाम बदलना, लोगों को बसाना या प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करना—वही तरीके उसने दशकों पहले तिब्बत में भी अपनाए थे.
भारत के पास सक्षम सरकारी प्रतिष्ठान, निजी डिफेंस कंपनियां, और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में काम करने वालों की बड़ी फौज है लेकिन कमी सिर्फ सभी दावेदारों को जोड़ने वाले अधिकार संपन्न संगठन की है.
नेतन्याहू की जीत इसलिए मानी जाएगी क्योंकि उन्हें हराया नहीं जा सका है. हमास की ‘कृपा’ से उन्होंने इजरायल को पूरी तरह बदल दिया है. अब वहां अरब नागरिकों को अलग करके ही कोई गठबंधन सत्ता में आ सकता है.
नेतान्याहू की सहनशक्ति, सुरक्षा-तंत्र की ओर से आइसेनकोट की चुनौती और अरब पार्टियों का उभार, इज़राइल के भविष्य को लेकर मौजूद अलग-अलग दृष्टिकोणों को उजागर करते हैं.
बेंजामिन नेतन्याहू के पास जश्न मनाने की कई वजहें हैं. उन्होंने सत्ता विरोधी लहर का सामना किया, ज्यादातर चुनावी सर्वे को गलत साबित किया और अब उन्हें अपने मतदाताओं से आंशिक मंजूरी भी मिल गई है.
पाकिस्तान 27 अक्टूबर को ब्लैक डे कहता है, लेकिन 22 अक्टूबर के हमले को नज़रअंदाज़ करता है, जिसमें हज़ारों लोगों का नरसंहार हुआ था. इससे पाकिस्तान का दोहरा रवैया सामने आता है.
जैसे-जैसे भारतीय सेना नए लॉजिस्टिक ऑर्गनाइज़ेशनल इलाके में कदम रख रही है, आज के संघर्ष से बार-बार मिलने वाले सबक को ‘कॉग्निटिव ओवरलोड और लॉजिस्टिक फ्रिक्शन’ के तौर पर समझा जा सकता है.
मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू का यह दौरा, इस्लामाबाद के उस आग्रह का परिणाम लगता है जिसके तहत वह उन देशों तक अपनी राजनयिक पहुंच बढ़ाना चाहता है, जहां नई दिल्ली को लेकर कुछ हद तक राजनीतिक असहजता देखी जा सकती है.