आजकल जो भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए नारे और भाषण लिख रहा है, वह या तो अपने काम से बुरी तरह थक चुका है या फिर उसके पास नए और ओरिजिनल आइडिया खत्म हो गए हैं.
पाकिस्तान के लिए अब समस्या सिर्फ़ यह नहीं है कि उग्रवाद बना हुआ है. बल्कि समस्या यह है कि उग्रवादी उस तरीके के हिसाब से खुद को ढाल रहे हैं, जिससे सरकार उनसे लड़ती है.
ऑपरेशन सिंदूर को भविष्य की जंग की तस्वीर मान लेना एक गंभीर गलती होगी. जानबूझकर सीमित रखे गए किसी अभियान की सफलता से यह पता नहीं चलता कि जंग जीतने के लिए क्या-क्या जरूरी होगा.
मैं पगड़ी पहनने वाला और धर्म का पालन करने वाला सिख हूं. जेल से शरजील इमाम ने जो लंबा इंटरव्यू दिया है, मैं उससे ज़्यादातर बातों पर सहमत नहीं हूं, भले ही वह इंटरव्यू कितना भी गंभीर क्यों न हो.
कानून में यह नहीं बताया गया है कि क्या फेशियल रिकग्निशन मैच को भरोसेमंद जानकारी माना जाएगा. जो अधिकारी इसके आधार पर कार्रवाई करता है, वह एक तरह से अस्पष्ट स्थिति में काम कर रहा होता है.
PM मोदी जितना ज्यादा CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के फैसले को टाल रहे हैं, प्रदर्शनकारियों को उतना ही फायदा हो रहा है. कांग्रेस और राहुल गांधी के साथ भी ऐसा ही है.
पिछली बार जब पाकिस्तान में विपक्ष की अगुवाई वाली प्रांतीय सरकार को बर्खास्त किया गया था, तो बलूच विद्रोह तेजी से फैल गया था. विद्रोह का वह दौर चार साल तक चला था.