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Tuesday, 3 November, 2026
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लद्दाख में नामों को लेकर चीन का विवाद, भारत को देखना चाहिए कि बीजिंग पर और किसकी नजर है

तिब्बती लोगों ने सबसे पहले यह देखा कि चीन आज लद्दाख में जिन हथकंडों का इस्तेमाल कर रहा है—जैसे नाम बदलना, लोगों को बसाना या प्रशासनिक ढांचे में बदलाव करना—वही तरीके उसने दशकों पहले तिब्बत में भी अपनाए थे.

भारतीय सेनाओं को ज्यादा ड्रोन ही नहीं, अनमैंड सिस्टम्स फोर्सेस कमांड भी चाहिए

भारत के पास सक्षम सरकारी प्रतिष्ठान, निजी डिफेंस कंपनियां, और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में काम करने वालों की बड़ी फौज है लेकिन कमी सिर्फ सभी दावेदारों को जोड़ने वाले अधिकार संपन्न संगठन की है.

नेतन्याहू को अरब विरोधी लहर से 53 सीटें लेकिन अब अरब पार्टियां ही बनीं असली किंगमेकर

इज़रायल के चुनाव में हर कोई जीत का दावा कर रहा है, लेकिन कोई नहीं जीता है.

थिएटर कमांड नहीं बल्कि संयुक्त प्लानिंग है भारतीय सैन्य समस्या का समाधान

थिएटर कमांड की भारतीय योजना पर पुनर्विचार करने की जरूरत है, सेना में सुधार के लिए अमेरिका या चीन के मॉडल की नकल कारगर नहीं साबित होगी.

नेतन्याहू हारे नहीं इसलिए जीत गए मगर इजरायल में विभाजन की खाई और चौड़ी हो गई है

नेतन्याहू की जीत इसलिए मानी जाएगी क्योंकि उन्हें हराया नहीं जा सका है. हमास की ‘कृपा’ से उन्होंने इजरायल को पूरी तरह बदल दिया है. अब वहां अरब नागरिकों को अलग करके ही कोई गठबंधन सत्ता में आ सकता है.

इजरायल को अब तय करना होगा कि वह किस तरह का लोकतंत्र बनना चाहता है

नेतान्याहू की सहनशक्ति, सुरक्षा-तंत्र की ओर से आइसेनकोट की चुनौती और अरब पार्टियों का उभार, इज़राइल के भविष्य को लेकर मौजूद अलग-अलग दृष्टिकोणों को उजागर करते हैं.

नेतन्याहू ने इज़रायल का चुनाव नहीं जीता, फिर भी उनके सिक्योरिटी डायलॉग को वोटर्स की मंजूरी

बेंजामिन नेतन्याहू के पास जश्न मनाने की कई वजहें हैं. उन्होंने सत्ता विरोधी लहर का सामना किया, ज्यादातर चुनावी सर्वे को गलत साबित किया और अब उन्हें अपने मतदाताओं से आंशिक मंजूरी भी मिल गई है.

पाकिस्तान कश्मीरियों के लिए आज़ादी चाहता है. फिर PoK को वही आज़ादी क्यों नहीं?

पाकिस्तान 27 अक्टूबर को ब्लैक डे कहता है, लेकिन 22 अक्टूबर के हमले को नज़रअंदाज़ करता है, जिसमें हज़ारों लोगों का नरसंहार हुआ था. इससे पाकिस्तान का दोहरा रवैया सामने आता है.

NATO की सैन्य कमजोरियों से भारत क्या सीख सकता है? यूक्रेनी ड्रोन ने दिखाई लॉजिस्टिक्स की खामियां

जैसे-जैसे भारतीय सेना नए लॉजिस्टिक ऑर्गनाइज़ेशनल इलाके में कदम रख रही है, आज के संघर्ष से बार-बार मिलने वाले सबक को ‘कॉग्निटिव ओवरलोड और लॉजिस्टिक फ्रिक्शन’ के तौर पर समझा जा सकता है.

मालदीव और पाकिस्तान ने बड़े लक्ष्य तय किए हैं, जो कई सवाल खड़े करते हैं

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज़ू का यह दौरा, इस्लामाबाद के उस आग्रह का परिणाम लगता है जिसके तहत वह उन देशों तक अपनी राजनयिक पहुंच बढ़ाना चाहता है, जहां नई दिल्ली को लेकर कुछ हद तक राजनीतिक असहजता देखी जा सकती है.

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नयी दिल्ली, तीन नवंबर (भाषा) प्रौद्योगिकी आधारित डिजिटल सेवाएं देने वाली बीएलएस ई-सर्विसेज का एकीकृत शुद्ध लाभ चालू वित्त वर्ष की दूसरी...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.