मोदी सरकार ने छात्रों की शुरुआती मांगों पर तुरंत जवाब नहीं दिया क्योंकि उसके लिए अहंकार ज्यादा अहम था. सोच यही थी—'ऐसे आंदोलन पहले भी देखे हैं, इन बच्चों को भी संभाल लेंगे.'
पंजाब की गिरती हालत के लिए सिर्फ उग्रवाद जिम्मेदार नहीं है. हिंसा खत्म होने के करीब 10 साल बाद शुरू हुई गिरावट के पीछे तीन धीरे-धीरे बढ़ी बड़ी नाकामियां हैं.
बात अब सिर्फ NEET पेपर लीक की नहीं रही. बात सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान की भी नहीं है. इतनी बड़ी भीड़ उन छोटी-छोटी नाराज़गियों का नतीजा है, जो लंबे समय से जमा होती जा रही थीं.
दस्तावेज़ के आधार पर नागरिकता तय करने का विचार लोगों को बाहर करने वाला है और उनके अधिकार सीमित करता है. इसका मकसद चुनावी समीकरण BJP के पक्ष में करना भी बताया जा रहा है.
जिन देशों का रेलवे नेटवर्क बहुत बड़ा है, वहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें सबसे ज्यादा काम आ सकती हैं. इसलिए भारत इस तकनीक को परखने के लिए एक बेहतरीन जगह है.
हमारी शिक्षा व्यवस्था बच्चों पर रटंत विद्या का बोझ डालकर और फिर प्रतियोगी परीक्षाओं में ‘बाजी मारने’ के लिए धकेलकर तमाम प्रतिभाओं का गला घोंट देती है. ऊपर से पेपर लीक भी कहर ढाता है.