1950 के दशक में अरब का तेल हासिल करने में ब्रिटेन की नाकामी कोई गलत फ़ैसला नहीं था. साम्राज्य का सूरज डूब रहा था, और एक नई महाशक्ति उभर आई थी. क्या अब एक और अराजकता सिर उठा रही है?
नक्सलवाद के खिलाफ जंग के कई योद्धाओं का कोई जिक्र नहीं किया जाता लेकिन गृह मंत्रालय के ‘समाधान’ कार्यक्रम को इन्हीं योद्धाओं के प्रयासों के कारण कामयाबी मिली.
मोदी सरकार अरविंद केजरीवाल के साथ जो कर रही है, वह गलत है. लेकिन क्या मोदी सरकार कभी अस्तित्व में आती, अगर केजरीवाल और उनके 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन ने UPA को तबाह न किया होता?
पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेताओं के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ पांच बातें काम कर रही हैं. जब आप राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जाते हैं तो ये बातें किसी न किसी रूप में दिख भी जाती हैं.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.
किसी न किसी मोड़ पर, मोदी को यह तय करना ही होगा कि BJP किस बात का प्रतिनिधित्व करती है. क्या यह केवल दिल्ली में शासन-प्रशासन तक ही सीमित है? और क्या राज्यों में इसे धार्मिक ध्रुवीकरण पर निर्भर रहना होगा?