नरेंद्र मोदी और नितिन नबीन का हंसते हुए फोटो बहुत अच्छा है, लेकिन इससे BJP कार्यकर्ता खुश नहीं हुए. वे सोच रहे होंगे कि अब परिवार के कब्जे वाली कांग्रेस और BJP के बीच आखिर क्या फर्क रह गया है.
मनमोहन सिंह ने 20 साल पहले इसे हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा बताया था. सरकार ने वह लड़ाई तो जीत ली, लेकिन इतिहास बताता है कि वामपंथी उग्रवाद लंबे समय तक दबा नहीं रहता.
अब जब सत्तारूढ़ संघ परिवार के नेता आंदोलन को मोड़ने में विफल रहे, तो पारिस्थितिकी तंत्र के अन्य चेहरे इसे अपना बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि विपक्ष को इससे कोई लाभ न मिल सके.
अगर शेख हसीना को हटाने के लिए जुलाई आंदोलन की ज़रूरत पड़ी थी, तो उनकी वापसी के लिए अवामी लीग के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ एक और आंदोलन की ज़रूरत होगी.
भागवत दूर से नजर रखे हुए थे और मोदी सरकार के खिलाफ युवाओं के आक्रोश को लेकर चिंतित थे. सबसे पहला काम तो उन्होंने यह किया कि Gen-Z के आंदोलनकारियों को राष्ट्र-विरोधी बताने वाली आलोचनाओं को सिरे से खारिज कर दिया.
अगर शेख हसीना की घर वापसी होती है, तो 2024 के छात्र आंदोलन के बाद यह बांग्लादेश की सबसे बड़ी राजनीतिक घटना होगी. इसी आंदोलन ने उनकी सरकार गिरा दी थी और उन्हें देश छोड़ना पड़ा था.
एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफ़े की घोषणा से एयर इंडिया के कई कर्मचारी भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, और इस समय एयरलाइन को इसकी सबसे कम ज़रूरत है.