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Friday, 4 September, 2026
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विजय ने आर्थिक नुकसान की परवाह किए बिना परंदूर परियोजना रद्द की, वादा निभाना ऐसा ही होता है

सीएम विजय के परंदूर परियोजना रद्द करने की आलोचना में तर्क है, लेकिन इससे एक ज़रूरी फर्क छिप सकता है—कुछ करने का वादा और किसी काम को रद्द करने का वादा एक जैसा नहीं होता.

भारत ने हेग के सिंधु नदी फैसले को खारिज किया, अब उसे नदियों को लेकर कदम उठाना होगा

जिस संधि को हम लागू नहीं कर रहे, उसे रद्द करना सिर्फ बयानबाजी है. असली परीक्षा यह है कि मालवा के खेत या कठुआ के नल तक पानी पहुंचता है या नहीं.

BJP-RSS को महिलाओं से परेशानी है. नारी शक्ति बस बेटी, दीदी और बहन तक ही सीमित

संघ परिवार महिलाओं को प्रतीक के रूप में सम्मान देता है, लेकिन एक व्यक्ति के रूप में उन पर भरोसा नहीं करता.

‘विजय को PM’ अभी बहुत दूर की बात, वह तमिलनाडु के CM के तौर पर भी असमंजस में दिखते हैं

BJP को अपना ‘वैचारिक दुश्मन’ बताने से विजय की विचारधारा के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं चलता. वह परिसीमन पर भी साफ रुख नहीं अपना रहे हैं.

जिस CNG बढ़ोतरी पर किसी ने सवाल नहीं उठाया, वह भारत के सबसे महंगे अनकहे राज को छिपा रही है

होर्मुज संकट के दौरान भारत ने बिना इसे साफ तौर पर ऐसा कहे, कीमतों में भेदभाव की एक तरह की नीति लागू की.

भारत को मध्य एशिया तक पहुंचने के लिए एक रास्ते की जरूरत है, उज्बेकिस्तान बन सकता है साझेदार

भारत और उज़्बेकिस्तान अपने साझा अतीत की मजबूती का सहारा लेकर कर सकते हैं साझा भविष्य का निर्माण.

मुस्लिम, सिख, ईसाई—मोहन भागवत के न्यूयॉर्क भाषण को अल्पसंख्यक किस तरह देख रहे हैं

मोहन भागवत के भाषण को लेकर मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदायों की राय में एक बात समान है—और वह है एक अहम बात का न कहा जाना. हर समुदाय से यह तो कहा गया कि उनकी सुरक्षा की जाएगी, लेकिन किसी से यह नहीं कहा गया कि हम सभी भारत का समान रूप से हिस्सा हैं.

जंक फूड पर चेतावनी लेबल से क्यों बच रहा FSSAI? इसका विरोध समझ से परे है

एक रेगुलेटर के तौर पर, FSSAI की ज़िम्मेदारी है कि वह आम लोगों के हितों की रक्षा करे और उन्हें नुकसानदायक खाने-पीने की चीज़ों से बचाए, लेकिन असल में उसके काम संतोषजनक नहीं रहे हैं.

भारत में युवाओं की आबादी का उभार 2030 तक खत्म हो जाएगा: उसके बाद क्या होगा, यह तकलीफदेह हो सकता है

1930 के दशक में जर्मनी का अनुभव दिखाता है कि जब आर्थिक तंगी के कारण बेहतर ज़िंदगी की उम्मीदें खत्म हो जाती हैं, तो बड़ी संख्या में निराश युवा आबादी राजनीतिक रूप से अस्थिर हो सकती है.

अग्निपथ 2.0 की जरूरत क्यों है? भारत को कम खर्च वाली सेना चाहिए, सस्ते सैनिक नहीं

सरकार को अग्निपथ 1.0 को एक लोकलुभावन चुनावी उपाय के तौर पर पवित्र पहल बताने, या उसे रद्द करने के राजनीतिक लालच से बचना होगा.

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नेपाल के लिए संकट से बाहर निकलने का रास्ता उसके लोगों और प्रवासियों से होकर जाता है

PM बालेंद्र शाह UNGA में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं. नेपाल को अपनी आपदा के लिए दुनिया से मदद और विदेशों में रहने वाले अपने लोगों के लिए मजबूत सुरक्षा की ज़रूरत है.

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राजनीति

देश

मणिपाल पेमेंट का आईपीओ नौ सितंबर को खुलेगा, मूल्य दायरा 322-339 रुपये प्रति शेयर

नयी दिल्ली, चार सितंबर (भाषा) मणिपाल पेमेंट एंड आइडेंटिटी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने शुक्रवार को अपने 805 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.