Sunday, 5 December, 2021
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मोदी ने UP के लिए चुनावी इंजीनियरिंग के दो आयोजनों में सेना का इस्तेमाल किया, यह एक बुरा संकेत है

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर वायु सेना का हवाई करतब और झांसी में सैन्य उपकरण ‘समर्पण’ के दौरान सैन्य प्रतिष्ठान जाने-अनजाने भाजपा के चुनाव प्रचार का हिस्सा बना

वीर दास का कहना बिल्कुल सही है, हम दो भारत में रहते हैं जिसके बीच की खाई कम नहीं हो रही

एक भारत वह है जिसका प्रतिनिधित्व तमिलनाडु करता है, तो दूसरे का प्रतिनिधित्व बिहार करता है. मानव विकास के संकेतकों के मामले में उन दोनों के बीच बड़ी खाई है जबकि बिजली-पानी के मामले में दोनों एक भारत के हैं.

अजीत डोभाल मेरे बैचमेट थे. हालांकि, संविधान और सिविल सोसाइटी के बारे में उनकी समझ सही नहीं है

डोभाल के बयान से ऐसा लगता है कि वे भारत को अभी भी औपनिवेशिक राजशाही मानते हैं, जहां लोगों को प्रजा माना जाता है; कि वह एक लोकतंत्र नहीं है, जहां लोगों को नागरिक माना जाता है.

चीनी नौसेना बना रही आगे की रणनीति, भारत समुद्र के ऊपर या अंदर तैयारी के मामले में उससे कोसों पीछे

चीन जहां विमान वाहक से लेकर युद्ध पोतों तक अपना नौसैनिक बेड़ा बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, वहीं भारतीय नौसेना का बजट लगातार घटता जा रहा है.

संविधान दिवस : 26 नवम्बर ‘अंतर्विरोधों के नये युग’ से कब बाहर निकलेंगे हम?

डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने संविधान सभा में अपने समापन भाषण में कहा था, ‘आखिरकार, एक मशीन की तरह संविधान भी निर्जीव है. इसमें प्राणों का संचार उन व्यक्तियों द्वारा होता है जो इस पर नियंत्रण करते हैं तथा इसे चलाते हैं.

कृषि कानूनों पर बहस में असली मुद्दे से मोदी सरकार भी कतरा गई और कानूनों के विरोधी भी

अब जबकि कृषि कानून वापस ले लिये गए हैं, कृषि उपज मंडी समिति (एपीएमसी) व्यवस्था कितनी कारगर रही है या नहीं रही इस पर विचार करके एक नयी शुरुआत की जा सकती है

MSP देने से देश दिवालिया नहीं होने वाला, बंद करें बहानेबाजी

बीजेपी के संगी-साथी, मुक्त बाजार के पैरोकार और पर्यावरण-प्रेम के नाम पर जेहादी तेवर अपना रखने वाले योद्धाओं की फैलायी एमएसपी की कहानी के छह झूठ का पर्दाफाश !

कृषि कानूनों के पूरे प्रकरण ने भारत की आंतरिक फूट को उजागर किया है, अब इसे पाटने का समय है

भारत अपनी आर्थिक वृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंडराती चुनौतियों का सामना सबसे पहले अपनी आंतरिक एकता को मजबूत करने की अधिकतम कोशिश किए बिना नहीं कर सकता.

कृषि कानूनों को वापस लेकर मोदी ने सावरकर के हिंदुत्व की रक्षा की है

बीजेपी ने कृषि कानूनों को वापस लेकर सिखों को ये संदेश दिया है कि बीजेपी को उनकी परवाह है और बीजेपी उनके साथ वह व्यवहार नहीं करती है जो वह मुसलमानों के साथ करती है.

कृषि कानूनों को रद्द करने की घोषणा दिखाती है कि खतरनाक दुश्मन का भी हृदय परिवर्तन किया जा सकता है

शक्तिशाली प्रधानमंत्री मोदी को जिस तरह माफी मांगने पर मजबूर किया गया है वह कुछ लोगों को जरूर अच्छा लगा होगा, लेकिन यह गांधी की भावना के विपरीत होगा.

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UPA का भले कोई वजूद न हो लेकिन कांग्रेस अब भी अहमियत रखती है, मोदी-शाह इसे अच्छे से समझते हैं

कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार भाजपा से मात भले खायी हो, उसने अपने पक्के 20% वोट बनाए रखे और यही वजह है कि भाजपा से मात खाए तमाम दल उसे चुनौती देने के लिए कांग्रेस का साथ चाहते हैं.

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राजनीति

देश

भारत, रूस के मोदी-पुतिन शिखर वार्ता में कई समझौतों पर हस्ताक्षर करने की संभावना

आखिरी भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता सितंबर 2019 में हुई थी जब मोदी व्लादिवोस्तोक गए थे. पिछले साल कोविड-19 महामारी के कारण शिखर वार्ता नहीं हो सकी.

लास्ट लाफ

‘फ्री स्पीच चैंपियन’ ममता का बीता हुआ कल और मोदी मुक्का मारने के बजाए चबाने का मज़ा लेते हैं

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए पूरे दिन के सबसे अच्छे कार्टून