जातिवार जनगणना कोई राजनैतिक मुद्दा नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण की जरूरी पहल है
सामाजिक न्याय व बंधुता का प्रश्न मनुष्यता का प्रश्न है और जातिवार जनगणना के हासिल को उसी की एक कड़ी के रूप में देखा जाना चाहिए.
योगी आदित्यनाथ और हिमंत बिस्वा सरमा- दो बाहरी लोग RSS के प्रभुत्व वाली BJP में लीड कर रहे हैं
जैसे-जैसे भाजपा का विस्तार होता जा रहा है, ख़ासकर नए- नए क्षेत्रों में, पार्टी राष्टीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के द्वारा इसके नेताओं को राजनैतिक रूप से संवारने की सीमाओं के बारे में सजग हो रही है.
स्मारक बनाने के नाम पर सरकारी बंगले पर कब्जे की कोशिश ‘कंटेप्ट ऑफ कोर्ट’ हो सकती है
किसी बड़े नेता का निधन होने पर उनके परिजन और समर्थन अपने चहेते नेता के सरकारी रिहायशी आवासी को स्मारक बनाकर उसमे डटे रहना चाहते हैं. लेकिन न्यायपालिका के सख्त रुख के कारण अब ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है.
जन्नत जैसा है लुटियन जोन, पासवान कैसे छोड़ कर जाएंगे ये बंगला और चौबारा
रामबिलास पासवान लुटियन दिल्ली के 12 जनपथ के बंगले में करीब 30 सालों तक रहे. अब वहां उनकी धड़ प्रतिमा स्थापित कर दी गई है. इसलिए कहा जा रहा है कि वहां पर उनका स्मारक बनाने की कोशिश हो रही है.
ISI प्रमुख फैज हमीद की काबुल यात्रा का तालिबान की नई सरकार से क्या लेना-देना है
अफगानिस्तान में जंग और अमन के बीच अदलाबदली जारी रही है, वहां के खिलाड़ी दुश्मन से भी सौदे करते रहे हैं जिनका पता उनके दोस्तों को भी नहीं लगता था.
SC में क्यों नहीं हो सकी अकील कुरैशी की नियुक्ति, माई लॉर्ड से थोड़ी और पारदर्शिता की उम्मीद
कॉलेजियम की निष्पक्षता पर लोगों को भरोसा है लेकिन यही बात कार्यपालिका के लिए नहीं कही जा सकती जिसमें शक्तिशाली नेता भी शामिल हैं.
मैरिटल रेप को अपराध बनाने का समय आ गया है, SC और मोदी सरकार इसे ज्यादा दिन नहीं टाल...
सरकार को देर सबेर महिलाओं के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए पत्नी से बलपूर्वक यौनाचार को बलात्कार की श्रेणी में शामिल करने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने ही पड़ेंगे.
JNU के आतंकवाद विरोधी कोर्स को ‘सांप्रदायिक’ नज़र से न देखें, भारतीय इंजीनियरों को इसकी जरूरत
कोर्स में छात्रों को इस आवश्कता के बारे भी शिक्षित करने का प्रयास किया जाएगा कि विज्ञान और टेक्नॉलजी को किस तरह इस्तेमाल किया जाए कि किसी अनहोनी की सूरत में भारत के पास, उससे निपटने के लिए पर्याप्त जवाब हों.
तालिबान के उदय के बीच भारत अपने 20 करोड़ मुसलमानों की अनदेखी नहीं कर सकता है
भारतीय मुसलमानों को न केवल भाजपा बल्कि अन्य सभी दलों ने भी सत्ता संरचनाओं से पूरी तरह बाहर कर दिया है. यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट में भी 33 न्यायाधीशों में से मात्र एक मुस्लिम जज हैं.
जाति जनगणना पर चल रही बहस ने पसमांदा मुसलमानों को फिर से भुला दिया है
ऐसा लगता है कि राजनीतिक वर्ग ने आख़िरकार सामाजिक स्तरीकरण की हिंदू केंद्रित कल्पना को अपना लिया है.


















