मत-विमत

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गरीबों को जब ‘न्याय’ नहीं मिल रहा, तो ये नेता उनके घर जाकर दावत उड़ाने में क्यों लगे हैं?

संबित पात्रा ऐसे पहले नेता नहीं हैं जो गरीब के घर खाना खा रहे हैं. उनसे पहले भी राष्ट्रीय पार्टियां ये चुनावी ट्रिक इस्तेमाल कर चुकी हैं.
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उत्तर प्रदेश के नाराज ब्राह्मण इस बार किस पार्टी के साथ?

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के पास तीन विकल्प हैं. या तो बीजेपी के साथ बनें रहें या कांग्रेस में विकल्प तलाशें. तीसरा विकल्प है कि जिस भी पार्टी का मजबूत ब्राह्मण कैंडिडेट हो, उसका समर्थन करें.
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इस लोकसभा चुनाव में, इन सात घातक मिथकों से बचें

यह लोकसभा चुनाव मात्र नरेंद्र मोदी या राहुल गांधी को लेकर नहीं है. मतदाता अन्य राजनीतिक दलों या निर्दलीयों का भी समर्थन कर सकते हैं.
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हार्दिक के चुनाव लड़ने पर रोक क्या जनांदोलनों की मौत की इबारत है?

अंग्रेजी राज के समय से ही जनांदोलनों में मुकदमा होना या निचली अदालतों में सजा हो जाना कोई दुर्लभ बात नहीं है. निचली अदालतों के आदेश के आधार पर चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिए जाने के कानून पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए.
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महाराष्ट्र की राजनीतिः बेगानी शादी में राज ठाकरे दीवाना

शरद पवार की कोशिश से सेकुलर गठबंधन ने राज ठाकरे को सीट भले ही न दी हो उन्हें भाषण के लिए मौका देने का फैसला किया है.
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आप हिंदू राष्ट्रवादी और आंबेडकरवादी दोनों ही हो सकते हैं

यदि साम्यवादियों की वर्तमान पीढ़ी को आंबेडकरवाद पर एकाधिकार की अनुमति दी जाती है, तो यह डॉ. बीआर आंबेडकर की विरासत के साथ अन्याय होगा.
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भाजपा के घोषणापत्र में परिणाम से ज़्यादा काम पर ज़ोर और नीति पर ध्यान नहीं

चुनाव घोषणापत्र मोदी के विकास पर नज़रिए को रेखांकित करता है: कितने जन धन खाते खुले, परिणाम - इन खातों में कितनी लेन-देन हुआ.
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प्योर हिन्दी बोल नहीं पाता, व्हाट शुड आई डू सर? युवाओं के बीच हिंदी की दुर्दशा

कहा जा रहा है हिन्दी एक कठिन भाषा है, चुनांचे वह सर्वग्राही नहीं. अगर यह सच है तो युवाओं में शुद्ध हिन्दी बोलने सुनने की उत्कंठा क्यों?
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भारत नहीं, कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जाती है डॉ. भीमराव आम्बेडकर की आत्मकथा

आम्बेडकर की आत्मकथा के बारे में जानिए जो उन्होंने 1935-36 में लिखी. यह कोलंबिया विश्विद्यालय में पढ़ाई जाती है और उसके बारे में भारत में काफी कम चर्चा हुई.
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मादरेवतन गमगीन न हो, दिन अच्छे आने वाले हैं, पाजियों और मक्कारों को हम सबक सिखाने वाले हैं!

देश और समाज के लिए सबके अपने-अपने सपने थे, जिन्हें जनता के बीच ले जाया जाता था और उन्हें पूरा करने के लिए वोट मांगे जाते थे.

मत-विमत

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चुनाव के समय फिर से ओबीसी क्यों बन गए नरेंद्र मोदी?

किसान और छोटे कारोबारियों में ज्यादातर पिछड़ी जातियों के हैं और उनको लुभाने के लिए मोदी ने पहले चरण के चुनाव के बाद जाति बताने की कवायद शुरू कर दी है कि वे भी पिछड़े वर्ग से हैं.

राजनीति

देश

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क्या जेट एयरवेज के 22 हजार कर्मियों को मिलेगी सैलरी या होगा किंगफिशर जैसा हाल

जेट एयरवेज ने बैंकों से 400 करोड़ की अंतरिम फंड की मांग की थी, लेकिन एसबीआई ने इसको पूरा करने से मना कर दिया. अब कंपनी के पास विमान सेवा को बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं.

लास्ट लाफ

आतंक मुक्त भारत का भाजपा का सपना और मतदाता सूची में अपना नाम खोजते वोटर्स

चयनित कार्टून पहले अन्य प्रकाशनों में प्रकाशित किए जा चुके हैं. जैसे- प्रिंट, ऑनलाइन या सोशल मीडिया पर और इन्हें उचित श्रेय भी मिला है.