हम अभी जो देख रहे हैं, वह सिर्फ मतदाताओं की एक नई पीढ़ी का अपनी मौजूदगी दर्ज कराना नहीं है, बल्कि लोगों को अपनी बात मनाने के तरीके की पूरी व्यवस्था में बदलाव भी है.
नागरिकों का विरोध लोकतंत्र के कमजोर होने की प्रक्रिया को रोकने में मदद कर सकता है, लेकिन लोकतंत्र की ताकत पूरी तरह वापस आएगी या नहीं, यह इस बात पर ज्यादा निर्भर करेगा कि गैर-चुनावी स्तर पर मिली इन कामयाबियों को चुनावी राजनीति में कैसे इस्तेमाल किया जाता है.
युवाओं ने कुलीन तबकों की खुद की ओढ़ी उस चुप्पी को तोड़ दिया, जो उन्हें मोदी सरकार की आलोचना में एक भी शब्द खुलकर बोलने से रोकती थी, और कुछ कहना भी हो तो दाएं-बाएं, आगे-पीछे झांकने के बाद दबी आवाज में.
एन. चंद्रशेखरन के इस्तीफ़े की घोषणा से एयर इंडिया के कई कर्मचारी भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, और इस समय एयरलाइन को इसकी सबसे कम ज़रूरत है.