अगर भारत चीन का मैन्युफैक्चरिंग विकल्प बनने के लिए कमिटेड है, तो उसे पहले यह पक्का करना होगा कि जिस कॉम्पिटिशन में वह हिस्सा ले रहा है वह ट्रांसपेरेंट, मेज़रेबल हो और यूनिवर्सली लागू होने वाले नियमों से चलता हो.
हाल के हफ्तों में शुभेंदु अधिकारी सरकार ने संवेदनशील ‘चिकन नेक’ क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सड़क, रेल और भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने की परियोजनाओं को तेज़ किया है.
गरीब धर्मांतरित लोगों को न छोड़ें, लेकिन आदिवासी आस्था, संस्कृति, परंपराओं और सामुदायिक जीवन को बचाए रखने वाले आदिवासियों के लिए बने आरक्षण में से हिस्सा भी न दें.
अगर किसी देश को सिर्फ प्राचीन संस्कृति का भंडार माना जाए, आधुनिक इनोवेशन का स्रोत नहीं, तो वह तकनीक के भविष्य को तय करने वाली चर्चाओं से बाहर हो सकता है.
एक वक्त था जब क्षेत्रीय दलों को कांग्रेस के खिलाफ लड़ाई में बीजेपी एक सुविधाजनक सहयोगी लगती थी, लेकिन उन्हें बहुत देर से समझ आया कि मोदी-शाह की बीजेपी पहले वाली भाजपा से अलग है.
लिबरल इंटरनेशनलिज़्म की ज़बरदस्त नाकामी को अक्सर नेशनलिज़्म की कड़वी सच्चाई को समझने में नाकामी के तौर पर देखा जाता है. लेकिन यह आलोचना पूरी बात नहीं कहती.
पारंपरिक इंडस्ट्रीज़ के कम होने से बंगाल की तरक्की में रुकावट आ रही थी. BJP के सत्ता में आने के बाद हालात बदले हैं. उम्मीद है कि नई सरकार इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करेगी.
भारत के लिए उन्होंने जो काम किए उसके सम्मोहन से खुद मोदी और उनके समर्थक अगर मुक्त हो सकें तो उन्हें भविष्य पर नजर डालनी चाहिए कि आगे उनके लिए चुनौतियां क्या-क्या हैं.
इस मानवीय दृष्टिकोण को समझते हुए हमारी प्रतिक्रिया सहानुभूतिपूर्ण होनी चाहिए और संस्थानों की कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए जो यह सुनिश्चित करे कि प्रणाली में उनका विश्वास संरक्षित रहे.
इम्तियाज़ अली की 'मैं वापस आऊंगा' बंटवारे पर बनी आम फ़िल्मों जैसी नहीं है. यह फ़िल्म पीड़ितों के दुख-दर्द, अपनी ज़मीन पर लौटने की तड़प या नफ़रत के भयानक चक्र में फंसे लोगों के बारे में नहीं है. यह उससे कहीं ज़्यादा जटिल है.