BJP के भीतर कई लोग अपनी ही सरकारों पर सवाल उठा रहे हैं. इन राज्यों में पार्टी के लिए अंदरूनी कलह एक बड़ी समस्या बन गई है. कुछ नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्रियों के पास पर्याप्त स्वायत्तता नहीं है.
SIR प्रक्रिया में यह सामान्य है कि अगर फॉर्म अधूरा या गलत भरा हो तो पंजीकृत मतदाताओं को सत्यापन के लिए बुलाया जाता है. बंगाल में SIR के तहत 58.2 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.
जहां अमित मालवीय ने इस फैसले को 'न्यायिक स्वतंत्रता' की पुष्टि बताया, वहीं प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने 'उमर खालिद और शरजील इमाम का महिमामंडन किया'.
यह तब हुआ जब बंगाल की मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर चल रही वोटर लिस्ट में 'गंभीर अनियमितताओं, प्रक्रियात्मक उल्लंघनों और प्रशासनिक कमियों' की ओर ध्यान दिलाया था.
टिकट कटने के बाद एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूजा ने कहा कि वह बीड के एक किसान परिवार से हैं और पिछले 10-12 सालों से राजनीति में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रही थीं.
स्वास्थ्य संकट से निपटने के तरीके को लेकर एमपी सरकार आलोचनाओं में है, खासकर तब जब एक वीडियो में मंत्री विजयवर्गीय पत्रकार के सवाल पर चिड़चिड़ा जवाब देते दिखे.
दिप्रिंट द्वारा देखे गए अस्थायी आंकड़ों से पता चलता है कि कुल मतदाताओं में से 18.7% नाम सूची से हटाए जा सकते हैं. लखनऊ में सबसे ज्यादा वोटर हटाए गए, इसके बाद गाजियाबाद, कानपुर, मेरठ और प्रयागराज का नंबर है.
पूर्व कैबिनेट मंत्री ने कहा, ‘महादेव की पवित्र भूमि पर अपराध हुआ, जहां हमारी बेटियों की सुरक्षा सबसे अहम होनी चाहिए.’ बीजेपी के अन्य नेता भी होटल रिसेप्शनिस्ट की हत्या की जांच की मांग कर रहे हैं.
बीवाई विजयेंद्र के नेतृत्व में, बीजेपी ने इस साल की शुरुआत में हुए चुनावों में सभी 4 टाउन पंचायतों पर कब्ज़ा कर लिया है. सत्ताधारी कांग्रेस के पास पहले इन चार में से दो सीटें थीं.