मुख्यमंत्री बनर्जी निर्वाचन आयोग पर पश्चिम बंगाल में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया जल्दबाजी में कराने का आरोप लगा रही हैं.
नगर निकाय चुनावों में भाई-भतीजावाद, नेतृत्व की अनुपस्थिति और कैडर के कमजोर होने से शिंदे की शिवसेना सिमटकर एमएमआर तक रह गई, जबकि मजबूत संगठन और संसाधनों के दम पर बीजेपी ने शहरी महाराष्ट्र में बढ़त बनाई.
पीएम मोदी ने तिरुवनंतपुरम में बीजेपी-नेतृत्व वाली एनडीए की विधानसभा चुनावी मुहिम शुरू की, राज्य राजधानी में हालिया नगर निगम जीत को बीजेपी में बढ़ते जनविश्वास से जोड़ा.
मौनी अमावस्या पर ज्योतिर्मठ के ‘शंकराचार्य’ और उनके अनुयायियों को यूपी सरकार द्वारा संगम में पवित्र स्नान से रोके जाने के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.
कई कॉर्पोरेशनों में टूटे-फूटे जनादेश और सत्ता के लिए ज़बरदस्त खींचतान के बीच, खासकर महायुति सहयोगियों के बीच, शहरी स्थानीय निकायों पर दावा करने के लिए ज़ोरदार बातचीत चल रही है.
2023 में विधानसभा सीटें 104 से घटकर 66 रह जाने के बावजूद, बेंगलुरु में बीजेपी का वोट शेयर अच्छा रहा है. इसके अलावा, शहर की चारों लोकसभा सीटें बीजेपी के पास हैं.
माधव को दी गई नई जिम्मेदारी बीजेपी के भीतर उनकी बड़ी भूमिका की ओर इशारा करती है और यह दिखाती है कि पार्टी ग्रेटर बेंगलुरु नगर निगम चुनावों को कितनी अहमियत दे रही है.
चुनाव आयोग को दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी ने चुनाव और प्रचार पर 3,355 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कांग्रेस के 896 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि संसाधन फायदा देते हैं, लेकिन वोट की गारंटी नहीं होते.
जब वामपंथी दल आक्रामक तरीके से हिंदू वोटों में सेंध लगा रहे हैं, तो बीजेपी के लिए तुरंत फायदा अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने में हो सकता है, उससे पहले कि वह अपना दायरा और फैलाए.