पीएम मोदी ने तिरुवनंतपुरम में बीजेपी-नेतृत्व वाली एनडीए की विधानसभा चुनावी मुहिम शुरू की, राज्य राजधानी में हालिया नगर निगम जीत को बीजेपी में बढ़ते जनविश्वास से जोड़ा.
मौनी अमावस्या पर ज्योतिर्मठ के ‘शंकराचार्य’ और उनके अनुयायियों को यूपी सरकार द्वारा संगम में पवित्र स्नान से रोके जाने के बाद शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.
कई कॉर्पोरेशनों में टूटे-फूटे जनादेश और सत्ता के लिए ज़बरदस्त खींचतान के बीच, खासकर महायुति सहयोगियों के बीच, शहरी स्थानीय निकायों पर दावा करने के लिए ज़ोरदार बातचीत चल रही है.
2023 में विधानसभा सीटें 104 से घटकर 66 रह जाने के बावजूद, बेंगलुरु में बीजेपी का वोट शेयर अच्छा रहा है. इसके अलावा, शहर की चारों लोकसभा सीटें बीजेपी के पास हैं.
माधव को दी गई नई जिम्मेदारी बीजेपी के भीतर उनकी बड़ी भूमिका की ओर इशारा करती है और यह दिखाती है कि पार्टी ग्रेटर बेंगलुरु नगर निगम चुनावों को कितनी अहमियत दे रही है.
चुनाव आयोग को दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, बीजेपी ने चुनाव और प्रचार पर 3,355 करोड़ रुपये खर्च किए, जो कांग्रेस के 896 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि संसाधन फायदा देते हैं, लेकिन वोट की गारंटी नहीं होते.
पीएम ने कहा कि भाजपा परंपरा और परिवार की तरह काम करती है, जहां रिश्ते सिर्फ सदस्यता से आगे होते हैं. इसी से उन्होंने पार्टी को सिर्फ एक राजनीतिक संगठन से कहीं ज्यादा बताया.
‘139 अनधिकृत’ गुरु ग्रंथ साहिब की ‘बरामदगी’ को लेकर मान के दावे और इसे लापता सरूप मामले में अपनी सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश करने से पंजाब में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है.
प्रवासी भारतीय सम्मेलन से लेकर कुंभ मेलों तक, भारत ने दिखाया है कि वह जटिल आयोजनों का प्रबंधन कर सकता है. इस क्षमता को बाद में उसके G20 शिखर सम्मेलन के दौरान वैश्विक मंच पर भी मजबूती मिली.