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Sunday, 19 April, 2026
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भारत के समाजवादी नेताओं ने चेताया था कि चीन सबसे बड़ा दुश्मन है लेकिन कांग्रेस और भाजपा ने नज़रअंदाज किया

राम मनोहर लोहिया से लेकर जॉर्ज फर्नांडीस और मुलायम सिंह यादव जैसे समाजवादी विचारक और नेता हमेशा ये कहते रहे हैं कि भारत की विदेश नीति के केंद्र में चीन को होना चाहिए.

गलवान में भारतीय सैनिकों पर हमले के बाद चीन खुद को पीड़ित बता रहा है, दिल्ली को इस झांसे में नहीं आना चाहिए

चीन ने 1962 के युद्ध के मात्र चार महीने बाद ही विवादित लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पीओके के इलाकों में नियंत्रण बढ़ाने के लिए पाकिस्तान के साथ एक करार पर हस्ताक्षर किया थे.

मोदी सरकार ने कृषि सुधारों पर जो कहा वो कर दिखाया, अब बारी खामियों को दूर करने की है

मोदी सरकार ने कृषि सुधारों पर अपने नीतिगत बयानों को कार्यरूप देने के लिए वास्तविक कानूनी बदलाव किए हैं. उनकी पूर्ण क्षमता को हासिल करने के लिए उसे अब खामियों को दूर करना चाहिए.

कोरोना महामारी ने नागरिकों को एकदम बेबस बना दिया है, इसमें सरकारी मशीनरी की उदासीनता का योगदान है

सरकारों को हर कीमत पर संविधान के अनुच्छेद 21 में नागरिकों को प्रदत्त दैहिक स्वतंत्रता और गरिमा के अधिकारों की रक्षा करनी होगी और उसे तर्क कुतर्को के आधार पर इलाज के अभाव में मरीजों को इधर उधर भटकने की इजाजत नहीं दी जा सकती.

अंदाज़ा लगाइए कि कोविड में उछाल के लिए इमरान ख़ान सरकार किसे दोष दे रही है? पाकिस्तान के ‘जाहिल’ आवाम को

कोविड से निपटने में पाकिस्तान की नाकामी स्वीकार करने की बजाय, पीएम इमरान ख़ान और उनके पीटीआई मंत्री, अपने ही लोगों को क़सूरवार ठहरा रहे हैं.

मोदी सरकार और सेना के हाथ सैनिकों के खून से रंगे हैं, प्रधानमंत्री के सामने भी नेहरू जैसी ही दुविधा है

मोदी भी उसी दुविधा के शिकार हैं जिसके शिकार नेहरू हुए थे. सेना की क्षमता में टेक्नोलॉजी के कारण जिस तरह भारी विकास हुआ है, उसके मद्देनज़र चीन का पलड़ा हमसे भारी दिखता है. नेहरू की तरह मोदी ने भी सेना की जगह अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता दी है.

स्वास्थ्य सेवाएं राज्य का विषय लेकिन कोविड ने साबित किया कि भारत के राज्य केंद्र पर कितने निर्भर हैं

मंकी फीवर और जापानी एनसिफिलाइटिस की तरह, कोविड-19 ने भी सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों से निपटने में, राज्य सरकारों की तकनीकी कमज़ोरी को उजागर कर दिया है.

चीन की घेराबंदी का भारत को नेतृत्व करना चाहिए, किसी और पर यह काम नहीं छोड़ा जा सकता

नई दिल्ली को पीओके के माध्यम से सीपीईसी पर अपनी आपत्ति दोहरानी चाहिए और भले ही भारत के दो विरोधियों को जोड़ने वाले इस गलियारे को रोकने के लिए ही सही, पीओके को सैन्य बलबूते पर फिर हासिल करने की योजना बनानी चाहिए.

आम आदमी की जेब हो रही खाली, अगर मोदी सरकार सीधे पॉकेट नहीं भरती तो क्या सड़क पर विद्रोह शुरू हो जायेगा

अगर बढ़ती बेरोजगारी के बीच लोगों की जेब में सीधा पैसा नहीं पहुंचता है तो बहुत चांस है कि लोग सड़कों पर उतर सकते हैं. ये हाल तब और विकट हो जाता है जब सरकारें फ्रंट लाइन में काम कर रहे डॉक्टरों, नर्स और सफाई कर्मचारी तक को सैलरी नहीं दे पा रही है.

कोविड ने महिलाओं को दशकों पीछे धकेला, उनको मदद दिए बिना भारत ‘आत्मनिर्भर’ नहीं बन सकता

भारत में ज्यादातर महिलाओं पर घरेलू जिम्मेदारियों को बोझ अब बढ़ गया है. जिनके पास रोजगार बचा है वो तो 'डबल-डबल शिफ्ट' कर रही हैं.

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ईरान पर ट्रंप-नेतन्याहू का दांव: क्या फिर लौट रही है ‘रिजीम चेंज’ की नीति?

अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है

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राजनीति

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विपक्ष ने प्रधानमंत्री के संबोधन की आलोचना की

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) विपक्षी नेताओं ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश के लिए संबोधन की आलोचना करते हुए इसे राजनीति...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.