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Sunday, 19 April, 2026
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विपक्ष ने प्रधानमंत्री के संबोधन की आलोचना की

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नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) विपक्षी नेताओं ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के देश के लिए संबोधन की आलोचना करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित, सारहीन और लोकतांत्रिक मानदंडों का उल्लंघन बताया।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सदस्य जॉन ब्रिटास ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘किसी भी प्रधानमंत्री ने कभी भी विपक्ष की खुलकर आलोचना करने और उन्हें निशाना बनाने के लिए इस तरह राष्ट्र के नाम संबोधन का सहारा नहीं लिया।’’

ब्रिटास ने कहा, ‘‘इस भाषण में महिला आरक्षण विधेयक को लेकर विपक्ष पर सीधा हमला करके और उनके कार्यों की तुलना ‘भ्रूण हत्या’ तथा ‘महिला विरोधी’ होने से की गई जिससे यह स्पष्ट होता है कि भाजपा स्वस्थ संसदीय परंपराओं और संवैधानिक मर्यादाओं को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।’’

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राज्यसभा सदस्य संदोष कुमार ने लिखा, ‘‘प्रधानमंत्री ने कोई स्पष्टीकरण या जवाबदेही पेश नहीं की है, बल्कि केवल एक गढ़े हुए कथानक को दोहराया है जिसका उद्देश्य सरकार की अपनी विफलता को छिपाना है।’

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने भी प्रधानमंत्री के संबोधन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यह वास्तव में एक ‘‘चुनावी भाषण’’ प्रतीत होता है।

तृणमूल कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने शनिवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चुनौती दी कि यदि उनमें ‘‘हिम्मत’’ है, तो वह प्रधानमंत्री के आज रात के संबोधन के खर्च को भाजपा के चुनावी व्यय खाते में जोड़ें।

माकपा के महासचिव एम.ए. बेबी ने कहा कि यह संबोधन ‘‘लोकसभा के घटनाक्रम’’ के बाद आया है, जहां विपक्षी एकजुटता के कारण संविधान संशोधन विधेयक पारित नही हो पाया।

बेबी ने कहा, ‘‘संसद और विधानसभाओं में महिला आरक्षण को बिना किसी परिसीमन या जनगणना की शर्तों के तुरंत लागू किया जा सकता है और किया जाना चाहिए।’’

भाषा

प्रचेता खारी

खारी

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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