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Saturday, 18 April, 2026
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‘लोकतंत्र की जीत’: प्रियंका ने 131वां (संशोधन) बिल को बताया ‘BJP की सत्ता बचाने की चाल’

संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के शुक्रवार को लोकसभा में 230 के मुकाबले 298 वोटों से खारिज हो जाने के बाद, कांग्रेस सांसद ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया.

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नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि वे “संघीय ढांचे को बदलने की साजिश” कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने लोकसभा में परिसीमन पर हुए वोट को लोकतंत्र और संविधान की बड़ी जीत बताया.

शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा, “कल जो हुआ वह लोकतंत्र की बड़ी जीत थी. संघीय ढांचे को बदलने की साजिश हार गई. यह संविधान, विपक्ष की एकता और देश की जीत है.”

सरकार के लिए झटका साबित हुआ जब संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 शुक्रवार को लोकसभा में गिर गया. इस बिल में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण को परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने से जोड़ा गया था. इसके पक्ष में 298 वोट और विरोध में 230 वोट पड़े, जो जरूरी दो-तिहाई बहुमत से कम थे.

संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को लेकर प्रियंका गांधी वाड्रा ने मांग की कि सरकार 2023 के महिला आरक्षण कानून को लोकसभा की मौजूदा सीटों के आधार पर लागू करे.

“अगर आप सच में महिलाओं के आरक्षण को लेकर गंभीर हैं, तो 2023 के कानून को मौजूदा लोकसभा की सीटों पर लागू कीजिए, हम पूरा समर्थन देंगे,” उन्होंने कहा.

कांग्रेस सांसद ने दावा किया कि इस बिल के लिए जल्दबाजी में सत्र बुलाना बीजेपी की सत्ता में बने रहने की कोशिश थी.

“पूरी साजिश सत्ता में बने रहने की थी. उन्हें लगा कि अगर अभी परिसीमन नहीं हुआ तो 2029 से पहले नहीं हो पाएगा और सत्ता में बने रहने के लिए यह जरूरी था. यह वास्तव में महिलाओं के आरक्षण के बारे में नहीं था, यह साफ है. 2023 का बिल पहले से ही मौजूदा सीटों में महिलाओं को आरक्षण देता है,” उन्होंने कहा.

साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार “काफी दबाव” में दिख रही है और इशारा किया कि उसकी राजनीतिक स्थिति कमजोर हो रही है.

“सरकार की स्थिति साफ तौर पर बदल गई है. ऐसा लगता है कि उस पर काफी अंतरराष्ट्रीय दबाव है, जो ऐसे फैसलों में दिखता है जिन्हें कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री सामान्य तौर पर बिना दबाव के स्वीकार नहीं करेगा,” उन्होंने कहा.

बिल के इरादों पर प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि सरकार दोनों तरह से फायदा चाहती थी. अगर बिल पास होता तो उन्हें फायदा होता और अगर गिर जाता तो वे विपक्ष को दोष देते.

“महिलाओं का मसीहा बनना आसान नहीं है. हमने हाथरस में क्या हुआ और हमारे ओलंपिक पदक विजेताओं के साथ क्या हुआ, यह देखा है. वे जितना चाहे नाटक कर लें, लेकिन अब लोग समझ गए हैं कि वे अपनी बात पर कायम नहीं रहते. उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता,” प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा.

विपक्ष की एकता

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कांग्रेस कई सालों तक सत्ता पक्ष में नहीं बैठ पाएगी.

“जब अमित शाह लोकसभा में बोल रहे थे, उन्होंने कहा कि कांग्रेस कई सालों तक सत्ता पक्ष में नहीं बैठ पाएगी, जो उनकी सोच को दिखाता है.”

दूसरी तरफ कांग्रेस सांसद ने “विपक्ष की एकता” को इस बिल की हार का कारण बताया.

उन्होंने कहा, “मैं बहुत खुश हूं. आपने देखा कि जब विपक्ष एकजुट होता है तो क्या होता है. हम और मजबूती से लड़ेंगे और साथ मिलकर अपने मतभेदों को अलग रखेंगे.”

सत्तारूढ़ बीजेपी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस बिल के खिलाफ वोट देकर “देश की महिलाओं के साथ धोखा किया”.

गृह मंत्री अमित शाह ने महिलाओं के आरक्षण को लेकर विपक्ष की प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया और कहा कि वे समर्थन देने के बजाय शर्तें लगा रहे हैं.

उन्होंने परिसीमन का बचाव करते हुए कहा कि यह “एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य” के सिद्धांत को लागू करने के लिए जरूरी है और आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे का राजनीतिकरण कर रहा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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