शनिवार को एक दुर्लभ घटना हुई— सरकार ने शुक्रवार की सर्वदलीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयानों पर स्पष्टीकरण जारी किया. यह उनकी इस टिप्पणी की ‘शरारात भरी व्याख्या’ का खंडन था कि 'हमारी जमीन पर कोई घुसपैठ नहीं हुई है'.
भारत में एक राष्ट्रव्यापी शांतिपूर्ण आंदोलन वक्त की ज़रूरत है, जातीय संबंधों में बदलाव लाने और मनु को मुख्य खलनायक का दर्जा दिलाने के लिए इस आंदोलन को 'कलर रिवॉल्यूशन' से प्रेरणा लेनी होगी.
चीन की सीमा संबंधी हरकतों को लेकर कोई कह सकता है कि चीन ने हमें धोखा दिया. लेकिन सरकार और मीडिया ने संसद में इस बारे में बीसियों बार उठे सवालों को अगर गंभीरता से लिए होता, तो देश इस स्थिति के लिए तैयार होता.
भारत के पास मौका है की कोरोना जैसे महासंकट में अपने प्राचीन ज्ञान योग को जाने, समझे और धारण करे, साथ ही साथ विश्व को भी इस विशेष ज्ञान योग के द्वारा मार्गदर्शन दे.
योग न केवल शारीरिक स्वास्थ्य का उपचार करने में मदद करता है बल्कि भावनात्मक और मानसिक सेहत भी सुधारता है. यह आपके जीवन में वर्षों को ही नहीं, आपके वर्षों में जीवन को भी जोड़ता है.
हिमालयी क्षेत्र के जो हिस्से भारत के इलाके में पड़ते हैं उनके बारे में लोहिया का ख्याल था कि यहां मुक्त लोकतांत्रिक राजनीति होनी चाहिए, स्थानीय लोगों की आर्थिक खुशहाली के काम होने चाहिए और सांस्कृतिक एकता को बढ़ावा देने के कदम उठाये जाने चाहिए.
अपने पूर्ववर्तियों की तरह मोदी ने भी भारत-पाकिस्तान-चीन के त्रिशूल से मुक्त होने की कोशिश की मगर नाकाम रहे. अब आगे वे जो भी करना चाहेंगे उसका अर्थ होगा नए समझौते करना.
चीन सालाना करीब 2.5 खरब डॉलर मूल्य का निर्यात करता है जिसमें भारत का हिस्सा महज 3 प्रतिशत है. चीन के पास 3 खरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है. अब आप ही अंदाजा लगा लीजिए कि उसके सामान के बहिष्कार के नारे लगाकर हम उसे कितनी चोट पहुंचा पाएंगे.
मूडीज ने कहा है कि भारत के बारे में उसकी मौजूदा रेटिंग का कोविड-19 से कोई लेनादेना नहीं है. भारत को लेकर उसका आकलन इसके पहले का है. आर्थिक सुधारों को आगे न बढ़ा पाने से भारत की रेटिंग खराब हुई है.
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है