कर्नाटक के कोलार में अप्रैल 2019 में एक रैली में प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि ‘आखिर सारे चोरों का सरनेम मोदी ही क्यों होता है?’
पार्टी ने आरोप लगाया, ‘‘यह लोकतंत्र पर स्पस्ष्ट रूप से हमला है और प्रदर्शित करता है कि भाजपा कर्नाटक के लोगों के साथ कैसा व्यवहार करने की योजना बना रही है.’’
कर्नाटक के लिए भाजपा के स्टार प्रचारकों की सूची में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित आठ कैबिनेट मंत्री और भाजपा राज्यों के तीन मुख्यमंत्री शामिल हैं.
कर्नाटक में कांग्रेस भी सत्ता में लौटने के प्रयासों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है वहीं जनता दल (सेक्युलर) भी तीसरी ताकत के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने में लगी है.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने चुनावी राज्य कर्नाटक में इस सप्ताह संबोधित की गई अपनी सभी तीन रैलियों में जातिगत जनगणना का वह मुद्दा उठाया जिस पर पार्टी के उदयपुर 'नव संकल्प शिविर' और रायपुर प्लेनरी में भी चर्चा की गई थी.
आरोप असम यूथ कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष अंगकिता दत्ता ने लगाया था. IYC ने कहा कि दत्ता ने कर्तव्यों का निर्वहन करना बंद कर दिया है और उनके दावों की जांच करने वाली 'जांच समिति के साथ सहयोग' नहीं कर रही हैं.
मध्यप्रदेश में आसन्न चुनावों से पहले भाजपा के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने पुराने नेताओं को सलाह दी है कि पार्टी की जीत के लिए अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को ‘त्याग’ दें. हालांकि, ऐसा नहीं लगता कि सभी नेता इससे सहमत हैं.
मुंबई में एक इफ्तार पार्टी में बोलते हुए शरद पवार ने कहा, 'देश संविधान और कानून के मुताबिक चलता है. अगर सत्ताधारी ताकतें संविधान और कानून की अनदेखी करने की आदत बना ली है तो यह हमें गलत रास्ते पर ले जाएगा.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.