नीतीश कुमार ने चुनाव के मद्देनजर प्रचार जोर शोर से शुरू कर दिया है. बांका में चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने राजद पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोगों के लिए परिवार है, पति-पत्नी और बेटा-बेटी, जबकि हमारे लिए समस्त बिहार परिवार है.
दो मिनट का एक भोजपुरी गीत जिसका शीर्षक है, ‘बिहार में ई बा’ (ये है बिहार में), बीजेपी नीतीश कुमार की आगुवाई वाली, एनडीए सरकार की उपलब्धियों का बखान कर रहा है.
बिहार में चुनाव लड़ने के लिए बागियों को लोजपा से टिकट मिलने को लेकर भाजपा और उसके सहयोगी दल जदयू के बीच तनातनी की स्थिति बन रही थी. भाजपा ने यह कदम ओपिनियन पोल के बाद उठाया है जिसमें कुछ सीटों पर कांटे की टक्कर के आसार बताए गए हैं.
28 अक्टूबर को होने वाले पहले चरण के मतदान के लिए कम से कम 11 बाहुबली या उनकी पत्नियों को टिकट दिए गए हैं. इनमें से ज्यादातर को राजद या जदयू की तरफ से मैदान में उतारा गया है.
पाकिस्तान के रूप में एक मुस्लिम देश, ‘अकारण’ आक्रामकता और चिरकालीन दुश्मनी का मिश्रण भाजपा के लिए एकदम मुफीद है. चीन इस खांचे में बिलकुल फिट नहीं बैठता है.
बिहार के चुनावी मैदान में जहां थोड़ी-बहुत पहचान बना चुके कई वारिस अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, वहीं कुछ ऐसे लोग भी अपनी जमीन तैयार करने की कवायद में जुटे हैं जो पहली बार राजनीति में अपनी पारी शुरू कर रहे हैं.
2015 के बिहार विधान सभा चुनावों में राम विलास पासवान की एलजेपी 42 सीटों पर लड़ी, लेकिन केवल दो सीटें जीत पाई. उनके बेटे चिराग की अगुवाई में, इस बार पार्टी ने अकेले दम 143 सीटों पर लड़ने का पैसला किया है.
भाजपा नेताओं का दावा है कि लोजपा के पीछे ‘हाथ किसी और का है लेकिन दिमाग प्रशांत किशोर का है’ और वह इस बात पर भी जोर दे रहे हैं कि उनके इस कदम से बिहार में वास्तव में एनडीए को नुकसान होगा.
बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी ने पहली बार किसी हिंदू उम्मीदवार को टिकट दिया है और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने दो हिंदू उम्मीदवार उतारे हैं. कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सिर्फ दिखावा है.