Monday, 6 December, 2021
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नीतीश 7वीं बार बिहार के सीएम बने, तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी उपमुख्यमंत्री समेत 10 मंत्रियों ने ली शपथ

बिहार की कैबिनेट में जेडीयू के 5 और बीजेपी के 5 मंत्रियों ने शपथ ली है, एक हम पार्टी से और एक वीआईपी पार्टी समेत कुल 12 मंत्री बने हैं.

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नई दिल्ली: नीतीश कुमार ने बिहार में 7वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उनके बाद विधानमंडल दल के नेता, वैश्य समाज से आने वाले तारकिशोर प्रसाद और रेणु देवी ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. प्रसाद कटिहार से लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव जीते हैं. बिहार की कैबिनेट में जेडीयू के 5 और बीजेपी के 5 मंत्रियों ने शपथ ली है, एक हम पार्टी से और एक वीआईपी पार्टी समेत कुल 12 मंत्री बने हैं. शपथग्रहण समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित भाजपा के शीर्ष नेता मौजूद रहे.

रेणु देवी ने विधायक दल के उपनेता के रूप में शपथ ली. बेतिया से बीजेपी के टिकट पर जीता है चुनाव. 2005 से 2009 तक खेल संस्कृति मंत्री रहीं हैं. चौथी बर विधायक बनी है्. संघ से जुड़ी रही हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने पर नीतीश कुमार को बधाई दी और कहा कि राजग परिवार राज्य की प्रगति के लिए साथ मिलकर काम करेगा.

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प्रशांत किशोर ने नीतीश के सीएम बनने पर ट्वीट कर बधाई दी है.

बिहार के उपमुख्यमंत्री रह चुके और आरजेडी नेता तेजस्वी ने भी ट्वीट कर नीतीश सीएम बनने पर बधाई दी है है और बिहार के लिए काम करने व 19 लाख नौकरी देने का वादा निभाने की उम्मीद जताई है.

वहीं लोजपा नेता चिराग पासवान ने भी ट्वीट कर नीतीश और बीजेपी को बधाई दी है. साथ ही उन्होंने अपना बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट का विजन डॉक्युमेंट भेजने और उसके वादे पूरी करने की मांग की है.

जेडीयू के मंत्री

विजय चौधरी ने जेडीयू के मंत्री के रूप में शपथ ली है. 6 बार विधानसभा का चुनाव जीता है. इस बार सरायरंजन की सीट जीती है. नीतीश के करीबी नेताओं में हैं शामिल. विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं.

विजेन्द्र यादव ने मंत्री पद की शपथ ली है. 8 बार के विधायक हैं. सुपौल से चुनाव जीता है. पिछली सरकार में भी मंत्री रहे हैं. 1990 से लगातार चुनाव जीत रहे हैं.

मुजफ्फरपुर के सकार से चुनाव जीते अशोक चौधरी ने शपथ जेडीयू के मंत्री के रूप में शपथ ली. नीतीश के करीबी माने जाते हैं. वर्तमान में जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष हैं.

मेवालाल चौधरी ने जेडीयू से मंत्री पद की शपथ ली. तारापुर विधानसभा से चुनाव जीता है. बिहार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के वीसी रहे हैं. एकेडमिक बैकग्राउंड है.

जेडीयू के आखिरी मंत्री बनने वाली शीला मंडल हैं. मधुबनी के फुलपरास से चुनाव जीता है. जेडीयू के टिकट पर विधायक बनी हैं. जेडीयू के सभी पांच नाम जो कि शपथ ले चुके.

हम पार्टी से संतोष सुमन

हम के नेता, जीतनराम मांझी के बेटे संतोष सुमन जिन्होंने मंत्री पद की शपथ ली है. 2015 में कुटुंबा से चुनाव हारे थे. 2018 से बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र में एमए हैं.

वीआईपी पार्टी

मुकेश साहनी विकासशील इंसान पार्टी के प्रमुख हैं जिन्होंने मंत्री पद की शपथ ली. सिमरी बख्तियारपुर से चुनाव लड़े. वीआईपी को 11 में से 4 सीटों पर जीत मिली है. पेशे से बालीवुड में सेट डिजाइनर रहे.

बीजेपी के मंत्री

बीजेपी से मंगल पांडेय ने मंत्री पद की शपथ ली. आरएसएस से संबंध रहा है. नीतीश के करीबी बीजेपी नेताओं में जाने जाते हैं. 2013 से 2016 तक बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे. नीतीश सरकार में स्वास्थ्य मंत्री रहे. 1987 से राजनीतिक करियर शुरू किया.

अमरेंद्र प्रताप सिंह ने आरा से चुनाव जीता है. लगातार चुनाव जीतते रहे हैं. 2012 से 2015 तक नीतीश सरकार में डिप्टी स्पीकर रहे. पांचवीं बार आरा से विधायक बने हैं. मंत्री पद की शपथ ली.

रामप्रीत पासवान ने राजनगर से चुनाव जीता है. दूसरी बार चुनाव में जीत मिली है. उन्होंने बीजेपी की तरफ से मंत्री पद की शपथ ली. 2015 में चुनाव जीत चुके हैं. मिथिलांचल से आते हैं.

कांग्रेस के मशकूर अहमद को चुनाव हराने वाले जीवेश मिश्रा ने बीजेपी से मंत्री पद की शपथ ली. दूसरी बार चुनाव जीता है. 2015 में जाले से ही चुनाव जीता था.

रामसूरत राय ने मुजफ्फुपर की औराई सीट से चुनाव जीता है. बीजेपी से मंत्री पद की शपथ ली है. उन्होंने दूसरी बार चुनाव जीता है. सीपीआई (एमएल) उम्मीदवार आफताब आलाम को चुनाव हराया है.

वहीं इससे पहले केंद्रीय मंत्री अमित शाह आज होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए भाजपा कार्यालय से जाते हुए.

इससे पहले रविवार को बिहार की राजधानी पटना में हुई राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बैठक में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में नीतीश कुमार को राज्य के अगले मुख्यमंत्री के तौर पर चुना गया था. हालांकि इस बार उपमुख्यमंत्री रहते आए सुशील मोदी को केंद्र में बुलाए जाने के कयास हैं और विधानमंडल दल के नेता चुने गए तारकिशोर प्रसाद और उपनेता रेणु देवी को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने के कयास लग रहे हैं.

बिहार विधानसभा चुनाव में राजग में शामिल दलों में भाजपा द्वारा सबसे अधिक 74 सीटें जीतने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने कुमार को ही मुख्यमंत्री बनाए जाने पर जोर दिया था.

एनडीए के विधायकों ने उन्हें अपना नेता चुना. बिहार में एनडीए में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू, भाजपा, जीतनराम मांझी की पार्टी हम और मुकेश साहनी की पार्टी वीआईपी शामिल है.

नीतीश ने पहली बार 2005 में सीएम पद की शपथ ली थी लेकिन ज्यादा दिनों तक सरकार नहीं चल पाई थी. उसी साल वो फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बने जिसके बाद उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर अगले पांच साल तक सरकार चलाई थी.

हाल में सम्पन्न हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राजग को 125 सीट हासिल हुई थीं जबकि विपक्षी महागठबंधन को 110 सीट मिली थीं. विपक्षी राजद को 75 सीट पर जीत मिली थी. वहीं, भाजपा को 74 सीट और जदयू को 43 सीट हासिल हुई है.

नीतीश के शपथग्रहण समारोह का बहिष्कार करेगा राजद, कांग्रेस भी नहीं होगी शामिल

बिहार में विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नीतीश कुमार के नेतृत्व में बनने वाली नयी सरकार के सोमवार शाम को आयोजित शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार करेगा.

राजद ने ट्वीट कर यह जानकारी दी. इस बीच, राज्य में विपक्षी महागठबंधन के घटक दल कांग्रेस ने भी कहा कि वह शपथग्रहण में शामिल नहीं होगी.

राजद के ट्वीट किया, ‘राजद शपथ ग्रहण का बहिष्कार करता है. बदलाव का जनादेश राजग के विरुद्ध है. जनादेश को ‘शासनादेश’ से बदल दिया गया.’

विपक्षी पार्टी ने राजग पर निशाना साधते हुए कहा, ‘बिहार के बेरोजगारों, किसानों, संविदाकर्मियों और नियोजित शिक्षकों से पूछिए कि उन पर क्या गुजर रही है.’

राजद ने कहा, ‘राजग के फर्जीवाड़े से जनता आक्रोशित है. हम जनप्रतिनिधि हैं और जनता के साथ खड़े हैं.’

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मदन मोहन झा ने कहा कि अभी तक उन्हें आमंत्रण भी नहीं मिला है और यदि आमंत्रण आयेगा, वह तब भी शामिल नहीं होंगे.

उन्होंने कहा कि वह तेजस्वी यादव की राय से सहमत है कि जनादेश का गला घोंटा गया है .

झा ने कहा, ‘हम इस सरकार के गठन का विरोध करते हैं.’

राजद ने एक अन्य ट्वीट किया, ‘‘बिहार में दो मजबूरों की मजबूर सरकार बन रही है . एक शक्तिविहीन, शिथिल और भ्रष्ट प्रमाणित हो चुके मजबूर मुख्यमंत्री और दूसरा चेहराविहीन और तन्त्र प्रपंच को मजबूर वरिष्ठ घटक दल.’’

लालू प्रसाद की पार्टी ने कहा कि इनकी मजबूरी का कारण राजद का जनाधार और बिहार के लोगों द्वारा तेजस्वी यादव को अपना सर्वाधिक प्रिय नेता स्वीकार कर लेना है . राजद ने अपने ट्वीट में नीतीश कुमार पर भी तंज किया.

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