प्रशांत किशोर ने उन वर्गों तक पहुंच बनाई है जो दोनों मुख्य गठबंधनों के वोटबैंक हैं. सवाल यह है कि क्या यह प्रतिद्वंद्वियों को प्रभावित करने में सफल होगी या बिहार के क्षेत्र में एक और नौसिखिया बनकर रह जाएगी.
प्रेम चंद बैरवा पर रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण के रजिस्ट्रार के लिए सेवानिवृत्त अधिकारी का नाम आगे बढ़ाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग करने का आरोप है. भाजपा का कहना है कि वे कुछ मामलों में सिफारिशें कर सकते हैं.
बागड़ी और देसवाली जाट, अहीरवाल में यादव और मेवात में मेव मुस्लिम जैसे प्रभावशाली समुदाय यह तय करेंगे कि 5 अक्टूबर को होने वाले विधानसभा चुनावों में राजनीतिक हवा किस तरफ बहेगी.
जानकारी मिली है कि डेरा सच्चा सौदा अपने भक्तों को वोट देने के लिए प्रेरित कर रहा है. कुछ लोग उसकी समय पर रिहाई को भाजपा द्वारा ‘बेकार की कोशिश’ बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे परिणाम बदलने की संभावना नहीं है.
कई घटनाओं ने पार्टी के भीतर दरारों को उजागर किया है, जिसमें पिछली सरकार द्वारा किए गए वादों को पूरा करने और सीएम द्वारा बोर्ड और निगमों में नियुक्तियों में देरी को लेकर मतभेद सामने आए हैं.
चंद्र मोहन अपने पिता और पूर्व सीएम भजन लाल की विरासत की बात करके लोगों से वोट मांग रहे हैं. इस बार उनका पूरा परिवार पंचकुला विधानसभा सीट जीतने के लिए उनके चुनाव अभियान में शामिल है.
शर्मा ने अपने बड़े बेटे कार्तिकेय, जो राज्यसभा सांसद हैं, के साथ डबल इंजन वाली सरकार की तरह काम करने का वादा किया है. उन्होंने लोगों से उनके लिए नहीं, बल्कि मोदी और हरियाणा के सीएम नायब सैनी के लिए वोट करने का आग्रह किया.
फरीदाबाद एनआईटी से भाजपा उम्मीदवार ने यूपी सीएम, केंद्रीय मंत्री की मौजूदगी में भाजपा के मंच से जनता को संबोधित करते हुए बजरंगी की तस्वीरें साझा कीं. बिट्टू बजरंगी ने निर्दलीय के तौर पर नामांकन दाखिल किया था.
आज़ाद — जो पिछले दो साल से असामान्य रूप से अनिर्णायक रहे हैं — ने पिछले महीने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए DPAP अभियान को लगभग छोड़ दिया, जिसके बाद कई उम्मीदवारों ने अपना नाम वापस ले लिया था.
सेंथिल बालाजी की बहाली पश्चिमी तमिलनाडु में उनके समर्थन आधार के मद्देनजर भी महत्वपूर्ण है, जो डीएमके की उस क्षेत्र में पैठ बनाने की महत्त्वाकांक्षाओं को दर्शाता है जहां पिछली बार एआईएडीएमके ने सबसे अधिक सीटें जीती थीं.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.