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Wednesday, 22 April, 2026
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बीजेपी को उदित राज, सावित्रीबाई फुले, उपेंद्र कुशवाहा, लक्ष्मीनारायण यादव जैसे नेता क्यों नहीं चाहिए?

बीजेपी का पूरा ध्यान इस समय सवर्ण वोटरों को इकट्ठा करने पर है, उनके लिए सवर्ण आरक्षण लाया गया है. उदित राज और उन जैसे लोग उसके इस प्रोजेक्ट में समस्या पैदा कर रहे थे.

उत्तर भारत में बन रही सामाजिक एकता से पूरा होगा कांशीराम का सपना

राजनीति आम तौर पर तोड़ती है. विभाजन पैदा करती है. लेकिन इस बार उत्तर भारत में खासकर बिहार और यूपी में समाज के वंचित समूहों ने जो एकता बनाई है, उसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं.

जी.डी बख्शी प्रकरण उदारवादियों के पाखंड और चुनिंदा आक्रोश को दर्शाता है

जब उदारवादियों के पाखंड को उजागर किया जाता है, तो वे उत्पीड़ित होने के उबाऊ रुदन में लग जाते हैं.

एक चुनाव से दूसरे चुनाव के बीच इतने अमीर कैसे हो जाते हैं नेता?

सांसद और विधायक अपना वेतन खुद तय करते हैं और बिना किसी बहस के अपना वेतन बढ़ा लेते हैं. इस मायने में राजनीति एक अच्छा व्यवसाय या कमाऊ खेती भी है. अब वह सिर्फ सेवा भाव के लिए नहीं की जा रही है

चुनाव में कौन हजम कर गया नोटबंदी, रोजगार, विकास, उत्पीड़न जैसे मुद्दे

चुनाव के दौरान उन मुद्दों पर बात क्यों नहीं हो रही है, जिनके कारण करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ? उन वादों की चर्चा क्यों नहीं है, जो 2014 में किए गए थे? उन्माद के सवाल सतह पर क्यों हैं?

चुनावी चक्कर में परमाणु हथियारों को उलझाना, पीएम मोदी की भारी भूल है

परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों से कथनी और करनी में जिम्मेदार होने की उम्मीद की जाती है. भारत को परमाणु अस्त्रों को लेकर पाकिस्तान की तरह गैरजिम्मेदाराना बातें करने से परहेज करना चाहिए

क्या सपा को लगता है कि शालिनी यादव मोदी को बराबरी की टक्कर दे पाएंगी?

नरेंद्र मोदी के खिलाफ सपा-बसपा गठबंधन कोई मजबूत कैंडिडेट दे सकता था. लेकिन जाने किस मजबूरी में गठबंधन ने एक कमजोर प्रत्याशी यहां उतार दिया.

मोदी का एक गठबंधन सरकार का नेतृत्व करना, वास्तविक बदलावों का कारण बन सकता है

गठबंधन सरकारें समावेशी होती हैं, भारत की विविधता को परिलक्षित करती हैं और सर्वाधिक अस्थिर गठबंधन सरकार भी आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ा चुकी है.

यादववाद के आरोप पर अखिलेश यादव को गुस्सा क्यों आया?

अखिलेश यादव के शासन पर लगातार इस बात के आरोप लगे कि उसमें यादव जाति को तरजीह दी गई. पहली बार उन्होंने इसका जवाब दिया है. क्या है इसका मतलब?

चुनाव प्रक्रिया में सुधार कीजिए, ईवीएम का हौवा दिखाना बंद कीजिए

अब समय आ गया है कि हम ईवीएम को कमज़ोर बनाने के प्रयास को त्याग कर यह सोचे कि पूरी मतदान प्रक्रिया को कैसे सदृढ़ बनाया जाए.

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भारत का वस्त्र निर्यात 2025-26 में 2.1 प्रतिशत बढ़कर 3.16 लाख करोड़ रुपये

नयी दिल्ली, 22 अप्रैल (भाषा) हस्तशिल्प सहित देश का वस्त्र निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 में 2.1 प्रतिशत बढ़कर 3.16 लाख करोड़ रुपये हो...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.