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Wednesday, 22 April, 2026
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कौन रच रहा है चीफ जस्टिस के खिलाफ साजिश?

जस्टिस रंजन गोगोई चीफ जस्टिस के पद पर आसीन हैं और एक महिला जूनियर कोर्ट असिस्टेंट द्वारा लगाया गया यौन उत्पीड़न व प्रताड़ना का आरोप झेल रहे हैं, तो भी लगता है कि न्यायालय के अंदरूनी हालात सुधरने के बजाय और विकट हो गये हैं.

हरियाणवी पॉप कल्चर: हुक्का, ट्रैक्टर, अपणी बोली और सपना चौधरी

लिरिक्स में कुछ युवा अपनी बोली ना छोड़ने की घोषणा करते हैं तो कुछ अंग्रेजी ना सीखने का दंभ भी भरते हैं.

फिल्मी कलाकारों के जरिए राजनीति के दिग्गजों को घेरने की कोशिश

फिल्मी हस्तियों के प्रशंसकों की बड़ी संख्या होती है जो वोटों में भी परिवर्तित होती रहती हैं. इसीलिए राजनीतिक पार्टियां विरोधी नेताओं के खिलाफ उन्हें चुनावी मैदान में उतारती हैं.

आप चाहे कुछ भी समझें, प्रज्ञा ठाकुर का नामांकन हिंदुत्व का विज्ञापन नहीं हो सकता

जब भाजपा विपक्ष में थी तब कानून व्यवस्था के लिए आवाज़ उठती थी. उसके नेताओं को शालीन भाषा का इस्तेमाल करने के लिए जाना जाता था. साध्वी प्रज्ञा को टिकट देना इन सभी चीजों के खिलाफ है.

असमानता पर अध्ययन के लिए एलएसई में अमर्त्य सेन चेयर बनाए जाने का मतलब

एक भारतीय अर्थशास्त्री के नाम पर चेयर की स्थापना का ये भी मतलब है कि भारत इस समय असमानता पर चल रहे अध्ययन का महत्वपूर्ण सब्जेक्ट है. यहां की बढ़ती असमानता, गरीबी और मानव विकास सूचकांक पर बेहद नीचे होना, दुनिया भर के लिए चिंता का कारण है.

हमने इतना आंदोलन किया, अब हमें टिकट तो दो!

जन आंदोलन से जुड़े नेताओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षा में कोई बुराई नहीं हैं. लेकिन राजनीतिक दल अपना उम्मीदवार चुनते समय कई पहलुओं का ध्यान रखते है और अक्सर आंदोलनों से जुड़े नेताओं की महत्वाकांक्षा पूरी नहीं हो पाती.

साध्वी प्रज्ञा सिंह के चुनाव लड़ने के साथ ही भाजपा ने संपूर्ण भारत में आधी लड़ाई जीत ली है

वह 2008 के मालेगांव बम धमाका मामले में मुकदमे का सामना कर रही हैं. लोकसभा चुनाव के बिगड़ते माहौल के बीच अब सबकी नज़र भोपाल पर रहेगी.

राजनीति ईमानदार चेहरों की पहचान पुख्ता नहीं होने देती, न ही उनको मुकम्मल जहां मिलने देती है!

भगौती प्रसाद ने राजनीति को धनोपार्जन का साधन नहीं बनाया था, इसलिए जल्दी ही उन्हें इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी.

मोदी-शाह की जोड़ी ने इस देश को ‘जिंगोस्तान’ बना दिया है

अगर आप यह सोचते हैं कि भाजपा 'दुश्मनों और गद्दारों' के नाम पर जो मुहिम चला रही है उसे आप देशद्रोह से संबंधित कानून को खत्म करने के वादे से बेअसर कर देंगे, तो आप मुगालते में हैं और आपको पता नहीं है कि आपकी लड़ाई किस चीज़ से है.

जब नई दिल्ली सीट से एक मलयाली अटल जी को हराने वाला था

1980 में अटल बिहारी वाजपेयी जनता पार्टी के टिकट पर प्रतिष्ठित नई दिल्ली सीट से लड़े. उनके सामने कांग्रेस ने कमोबेश एक अंजान शख्स सी.एम. स्टीफन. को उतारा था.

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मायावती ने कार्यकर्ताओं को महिला आरक्षण मुद्दे पर धरना-प्रदर्शन से दूर रहने को कहा

लखनऊ, 22 अप्रैल (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर पार्टी के...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.