scorecardresearch
Wednesday, 22 April, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

मायावती और मुलायम का साथ आना क्यों महत्वपूर्ण है?

इस सभा को इस मायने में ऐतिहासिक करार दिया जा सकता है कि लंबे अरसे बाद यूपी की दो सामाजिक शक्तियों दलितों और पिछड़ों के प्रतिनिधित्व की दावा करने वाली दो पार्टियां फिर से करीब आई हैं.

प्रियंका गांधी को क्यों मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ना चाहिए

प्रियंका गांधी चुनाव नहीं जीतेंगी, लेकिन कम से कम ऐसा लगेगा कि देश में विपक्ष है.

लालू प्रसाद यादव की आत्मकथा की 5 बातें, कोई और नेता लिखता तो ‘महान’ बन जाता

दलितों ने लिटरेचर लिखा तो उसे ‘दलित साहित्य’ कहकर पुस्तक मेलों में ही किनारे स्टॉल पर खड़ा कर दिया गया. ठीक वैसे ही, जैसे जाति सिस्टम में होता है.

पश्चिम बंगाल को चाहिए असली बदलाव, ममता बनर्जी का ‘पोरिबर्तन’ नहीं

पश्चिम बंगाल को बदलाव की सख्त जरूरत है. वहां के लोग इतने सालों के कुशासन के बाद अब नरेंद्र मोदी सरकार पर भरोसा दिखा रहे हैं.

प्रधानमंत्री जी! आप फुले-आंबेडकर के पिछड़े हैं या सावरकर-गोलवरकर के?

प्रधानमंत्री जी, बताइए यह यदि वर्ण-व्यवस्था ही हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना का मूलाधार है, तो फिर किसी पिछड़े (शूद्र) का अपमानित होना स्वाभाविक बात है. यह तो मनुस्मृति कहती है.

चुनाव के समय फिर से ओबीसी क्यों बन गए नरेंद्र मोदी?

किसान और छोटे कारोबारियों में ज्यादातर पिछड़ी जातियों के हैं और उनको लुभाने के लिए मोदी ने पहले चरण के चुनाव के बाद जाति बताने की कवायद शुरू कर दी है कि वे भी पिछड़े वर्ग से हैं.

बेरोजगारों के लिए भाजपा का स्टार्टअप पर ज़ोर देना क्यों कांग्रेस के न्याय से बेहतर है

कांग्रेस की अगुआई वाला विपक्ष 2019 के चुनाव में एनएसएसओ की एक रिपोर्ट की सहायता से बेरोजगारी की समस्या को उजागर कर रहा है, जबकि पूरी दुनिया में रोजगार परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है.

साध्वी प्रज्ञा को टिकट देने पर मालेगांव के निवासियों ने कहा ‘हमारे जख्मों पर नमक छिड़का’

ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा इस बारे में नहीं सोचती है कि साध्वी प्रज्ञा को टिकट देने से दुनिया भर के नेताओं के बीच क्या संदेश जायेगा. हालंकि, मोदी अक्सर उन्हीं नेताओं के बीच आतंकवाद का मुद्दा उठाते हैं.

सेकुलरिज़्म का ढोंग नहीं, बहुजन राजनीति ही रोकगी फासीवाद को

भारत में लोकतंत्र के टिके रहने की एक बड़ी वजह यह कि वंचित समुदायों को इस शासन प्रणाली से अब भी उम्मीद है. आज जब संविधान पर हमले हो रहे हैं, तब वंचितों की एकता के जरिए ही लोकतंत्र की रक्षा हो सकती है.

‘चुनाव आयोग यह चुनाव निष्पक्ष कराने में पूरी तरह से विफल रहा है’

चुनाव आयोग अपने कामकाज में एक हद तक स्वायत्त रहा है, जो कि इस देश की ज़्यादातर संस्थाओं के मामले में शायद ही देखने को मिलता है.

मत-विमत

वीडियो

राजनीति

देश

उप्र : किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में मरीजों को ठगने का आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ, 22 अप्रैल (भाषा) राजधानी लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में मरीजों और उनके तीमारदारों को ठगने के आरोप में एक व्यक्ति...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.