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Monday, 27 April, 2026
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दिल्ली चुनाव में नागरिकता कानून को क्यों मुद्दा नहीं बनाएगी बीजेपी

नागरिकता कानून के विवाद के बीच हुए झारखंड चुनाव में बीजेपी हारी है. यही नहीं, कानून को लेकर हुए आंदोलन में गैर-मुसलमानों के शामिल होने से भी बीजेपी को झटका लगा है.

मैंने अपने आप को 37 वर्ष तक जेएनयू वाला क्यों नहीं कहा? लेकिन अब सब कुछ बदल गया है: योगेंद्र यादव

मैंने दाढ़ी रखी है और झोला लेकर भी चलता हूं लेकिन मुझे नहीं लगता कि सिर्फ इसी आधार पर मुझे मार्क्सवादी या फिर कम्युनिस्ट पार्टियों का समर्थक अथवा सार्वजनिक क्षेत्र की तमाम कंपनियों का हिमायती मान लिया जाय.

शेर की दहाड़ हुई कम, मिलिए आदित्य ठाकरे की नई शिवसेना से

शिव सेना को ये बात समझ में आ गई है कि हिंदुत्व की रेस में बीजेपी उससे काफी आगे निकल चुकी है और आक्रामकता में नरेंद्र मोदी का मुकाबला कर पाना उसके लिए मुमकिन नहीं है.

नागरिकता कानून का फायदा उठाकर भारत आने वाले दलितों की हालत बदतर ही होगी

कभी दलितों को ढाल बनाकर के मुसलमानों और मुसलमानो को ढाल बनाकर दलितों पर हमला अब बहुत दिनों तक नहीं चलने वाला.

पिछले 50 वर्षों के ‘एशिया के इतिहास’ से उभरे सवालों का जवाब भारत को जल्द देना जरूरी है

मिर्डाल की ‘एशियन ड्रामा’ लिखी जाने के बाद के 50 वर्षों में भारत कई बार मंज़िल से दूर रहा है. अगर हम एक-दो महारथियों के वर्चस्व से दबी दुनिया से बचना चाहते हैं तो भारत को तय करना होगा कि वह नियम पालन करने वाला बनना चाहता है या नियम बनाने वाला.

अरविंद केजरीवाल का स्टार्ट-अप ‘आप’ दशक का राजनीतिक ‘यूनिकॉर्न’ है

आप ने हमारी राजनीति में नए लोगों के लिए प्रवेश द्वार खोल दिया है- जाति, जातीयता, विचारधारा, वंशवाद - खुद को अखिल भारतीय मान्यता के साथ दिल्ली पार्टी के रूप में स्थापित किया है

महाराष्ट्र में बच्चों ने जाना ईमानदारी का महत्त्व बनाया आनेस्टी बॉक्स, शुरू किया अनोखा उपक्रम

यदि किसी बच्चे को स्कूल परिसर में कोई चीज पड़ी मिलती है तो वह उसे आनेस्टी बॉक्स में डालता है.

‘एनआइपी’ की 102 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को पूरा करना है तो दीर्घकालिक घरेलू बचत को बढ़ावा देना होगा

पांच खरब डॉलर वाली अर्थव्यवस्था बनने के लिए ‘नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन’ नामक एक कार्यक्रम पेश किया गया है लेकिन इसके लिए आवश्यक पैसे को लंबे समय तक ताले में बंद रख पाना एक चुनौती होगी.

सावित्री बाई फुले के योगदान को जिस तरह याद करना चाहिए, वैसे नहीं किया जाता

सावित्री बाई फुले ने उस दौर में कैसे स्त्रियों के अधिकारों, अशिक्षा, छुआछूत, सतीप्रथा, बाल या विधवा-विवाह जैसी कुरीतियों पर आवाज उठाई होगी?

क्या फर्जी दस्तावेजों के जरिए कोई गैर भारतीय लोकसभा या विधान सभाओं का चुनाव लड़ सकता है?

सीएए-एनआरसी के बाद भी जन्म स्थान और जन्म तिथि के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर भारतीय नागरिक होने का दावा किया जा सकता है ऐसा हुआ, और असम से कांग्रेस के टिकट पर एक व्यक्ति लगातार तीन बार लोकसभा भी पहुंचा.

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ईरान युद्ध ने भारत के लिए अगले युद्ध का खाका पेश कर दिया है

पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.

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राजनीति

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वकील, गवाह व न्यायाधीश सभी केजरीवाल तो न्यायिक व्यवस्था की जरूरत क्या है: रेखा गुप्ता

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कथित शराब घोटाले से संबंधित मामले में उच्च न्यायालय में अपनी पैरवी नहीं...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.