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Monday, 27 April, 2026
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धर्मनिरपेक्षता की उद्घोषणा पहली बार भारत की सड़कों पर नारों के रूप में गूंज रही है

जब गांधी ने धर्मनिरपेक्षता की बात की, तो उन्हें काले झंडे दिखाए गए. जब इंदिरा गांधी ने धर्मनिरपेक्षता को जोड़ने के लिए संविधान में संशोधन किया, तो उन्हें स्पष्ट करने के लिए कहा गया कि उनका क्या मतलब है.

झाबुआ के हलमा को गहराई से देखने की कोशिश कीजिए, वर्ल्ड बैंक उथला नज़र आएगा

हलमा आदिवासियों की ऐसी परंपरा है जिसके द्वारा वह अपने समुदाय की मदद के लिए एकत्रित होते हैं, सालों, महीनों और दिनों तक चलने वाले काम को चंद घंटों में कर देते हैं.

मोदी सरकार की भयावह एनआरसी परियोजना को 2020 में रोकने की सर्वाधिक उम्मीद युवाओं के कंधों पर टिकी है

सीएए का विरोध ना सिर्फ स्वत:स्फूर्त और सहज रहा है, बल्कि इसके जरिए युवाओं ने स्पष्ट संदेश भी दिया है कि वे मोदी सरकार की विभाजनकारी राजनीति को चुपचाप सहन नहीं करेंगे.

2020 में रूटीन रैलियों और मार्च पर भरोसा ना करें, मोदी के भारत में विरोध के नए तरीकों की जरूरत

शासक वर्ग देश को बांटने के खुले खेल में लगा है. अब लोगों को ये जिम्मेदारी लेनी होगी कि वे वे देश को जोड़ने और जोड़े रखने के अभियान में जुटें.

भीमा कोरेगांव पेशवाओं के जातिवादी घमंड के खिलाफ महारों के आत्म सम्मान की लड़ाई थी

महारों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ लड़ने के लिए पेशवाओं की सेना में भर्ती होने का आग्रह किया, जिसे पेशवाओं द्वारा अपमानित ढंग से ठुकरा दिया गया था.

हिंदुत्व और वामपंथी दोनों तरह के इतिहासकारों के लिए अबूझ पहेली है भीमा कोरेगांव

भीमा कोरेगांव का महत्व लगातार बढ़ता जा रहा है, लेकिन ये संघर्ष इतिहासकारों के लिए एक चुनौती बना हुआ है कि आखिर इसे भारतीय इतिहास में कैसे फिट किया जाए.

नीतीश कुमार: बिहार में उदारवादियों के डार्लिंग से लेकर 2019 की राजनीतिक निराशा तक

सीएए-एनआरसी के बहाने एक बार फिर चर्चित हुई नीतीश कुमार की ‘इधर चला, मैं उधर चला, जाने कहां मैं किधर चला’ की राजनीति.

मोदी के महंगे चश्मे और सूट पर उंगली क्यों नहीं उठती मगर राहुल बरबेरी जैकेट के लिए बन जाते हैं निशाना

मुद्दा यह नहीं है कि मोदी ‘क्या’ पहनते हैं बल्कि यह है कि मोदी इस तरह वेशभूषा ‘क्यों’ अपनाते हैं जिसके पीछे राजनीतिक किस्म का इरादा छुपा होता है.

तिहाड़ जेल से चंद्रशेखर आज़ाद का संदेश- संविधान बहुजन समाज का रक्षा कवच है, इसे बचाना बहुत जरूरी

दिप्रिंट को लिखे एक्सक्ल्यूसिव चिट्ठी में चंद्रशेखर आज़ाद ने देशवासियों से आह्वान किया है, 'संविधान को बचाने की लड़ाई हमें मिलकर लड़नी है क्योंकि यही हमरा कवच है.'

पोल वॉल्ट चैंपियन सर्गेई बुबका को प्रेरणास्रोत मानने वाली भाजपा राज्यों में छलांग नहीं लगा पा रही है

भाजपा को इस बात का अहसास है कि वो अतीत का कांग्रेस बन चुकी है, पर वह अपने विरोधियों को और अधिक आत्मविश्वास नहीं पाने देना चाहती है.

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ईरान युद्ध ने भारत के लिए अगले युद्ध का खाका पेश कर दिया है

पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.

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ओडिशा के मयूरभंज में अलग-अलग दुर्घटनाओं में चार लोगों की मौत

बारिपदा (ओडिशा), 27 अप्रैल (भाषा) ओडिशा के मयूरभंज जिले में सोमवार को अलग-अलग सड़क हादसों में चार लोगों की मौत हो गई और एक...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.