नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कथित शराब घोटाले से संबंधित मामले में उच्च न्यायालय में अपनी पैरवी नहीं करने की ‘आप’ प्रमुख अरविंद केजरीवाल की घोषणा को सोमवार को ‘घटिया मजाक’ बताया और कहा कि बेगुनाही शोर मचाने से नहीं बल्कि अदालत के फैसले से साबित होगी।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर कहा है कि आबकारी मामले में न तो वह व्यक्तिगत रूप से और न ही वकील के मार्फत से उनके समक्ष पेश होंगे।
‘आप’ नेता ने न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी।
इसके बाद केजरीवाल ने चार पन्नों के एक पत्र में ‘‘न्याय नहीं मिलने’’ की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर उनकी ‘‘गंभीर’’ चिंताएं हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गुप्ता ने यहां पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि हमेशा न्याय व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह लगाना और संवैधानिक संस्थाओं को “गाली” देना, यही केजरीवाल की कार्यशैली है और यही इनकी मानसिकता बन गई है।
गुप्ता ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री शराब घोटाले में लिप्त हैं और उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर है और वह न्यायपालिक पर सवाल उठाकर न्यायाधीश और अदालत बदलवाना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें आशंका है कि अदालत का फैसला उनके खिलाफ आ सकता है।
उन्होंने पूछा कि अदालत में अपनी पैरवी नहीं करने का केजरीवाल का व्यवहार और न्यायमूर्ति पर इल्जाम लगाना क्या उन्हें शोभा देता है?
गुप्ता ने कहा, “केजरीवाल साहब कहते हैं कि वकील भी हम है, गवाह भी हम है और न्यायाधीश भी हम है। सबकुछ वही हैं तो इस न्यायिक व्यवस्था की जरूरत क्या है।”
मुख्यमंत्री ने कहा, “एक चोर, ऊपर से मचाए शोर। शोर मचा मचा कर आप को यह दिखाना चाहते है कि वह (केजरीवाल) बेगुनाह है। बेगुनाही के तो सबूत और बेगुनाही की परीक्षा तो अदालतों में देनी पड़ेगी।”
गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल द्वारा अदालत में अपनी पैरवी नहीं करना और सत्याग्रह की बात करना ‘एक घटिया मजाक’ है जिसे मजाक न तो दिल्ली की जनता पसंद करती है और न ही न्यायिक व्यवस्था की इसकी इजाजत देती है।
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