नई दिल्ली: भारत का रक्षा तंत्र एक ऐसे थिएटराइजेशन मॉडल के करीब पहुंच रहा है, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के पद के लिए रोटेशन प्रणाली लागू की जाएगी. इसमें सर्विस चीफ को सीमित रूप से ऑपरेशनल भूमिका दी जाएगी और तीन-स्टार अधिकारियों को थिएटर कमांडर बनाया जाएगा, जिनका फोकस संस्थान निर्माण पर होगा.
रक्षा और सुरक्षा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि वाइस चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पद, जो मुख्य ऑपरेशनल प्राधिकरण होगा और जिसके तहत थिएटर कमांडर रिपोर्ट करेंगे, शुरुआती वर्षों में एक ही सर्विस के पास रह सकता है.
सेना इस पद को अपने पास रखने की कोशिश कर रही है. उसका तर्क है कि भारत की मुख्य सुरक्षा चुनौतियां पाकिस्तान और चीन हैं, जो जमीन से जुड़ी हैं, और सेना तीनों सेवाओं में सबसे बड़ी है.
प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, CDS का पद सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच घूमता रहेगा. अब तक दोनों CDS सेना से रहे हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार भविष्य में रोटेशन का सिद्धांत अपनाया जाएगा, भले ही यह सख्त क्रम में न हो.
एक बड़े बदलाव के तहत, पहले चरण में थिएटर कमांडर चार-स्टार की बजाय तीन-स्टार अधिकारी होंगे. उनका तुरंत काम ऑपरेशनल कंट्रोल लेना नहीं होगा, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था बनाना होगा जिसमें प्रोटोकॉल, कमांड चेन और संगठनात्मक ढांचा तैयार किया जाए ताकि तीनों सेनाएं मिलकर काम कर सकें.
इस दौरान मौजूदा सिंगल-सर्विस कमांड सीधे थिएटर कमांडरों को रिपोर्ट नहीं करेंगे. लेकिन वे अपने ऑपरेशनल और प्रशासनिक कामकाज की जानकारी उन्हें देते रहेंगे, ताकि धीरे-धीरे बदलाव हो सके और मौजूदा व्यवस्था पर असर न पड़े.
हर थिएटर मुख्यालय में तीनों सेवाओं का मिश्रण होगा. डिप्टी थिएटर कमांडर या चीफ ऑफ स्टाफ दूसरे सर्विस से होंगे, जो कमांडर से अलग होंगे. इनके पदनाम और जिम्मेदारियों पर अभी चर्चा चल रही है.
जैसा कि 8 अप्रैल को रिपोर्ट किया गया था, जयपुर में बनने वाला पश्चिमी थिएटर, जो पाकिस्तान पर केंद्रित होगा, उसे वायुसेना का अधिकारी संभालेगा. लखनऊ में बनने वाला उत्तरी थिएटर, जो चीन पर केंद्रित होगा, उसे सेना का अधिकारी संभालेगा. तिरुवनंतपुरम में बनने वाला समुद्री थिएटर कमांड नौसेना के अधिकारी के पास होगा.
नियुक्तियां एक साथ नहीं बल्कि धीरे-धीरे की जाएंगी और सामान्य पोस्टिंग के साथ ही होंगी, ताकि कोई बड़ा बदलाव एक साथ न करना पड़े.
एक सूत्र ने कहा, “थिएटर कमांड की घोषणा के बाद तुरंत कोई ऑपरेशनल बदलाव नहीं होगा. पहले चरण में ध्यान प्रशासनिक व्यवस्था पर होगा. हर थिएटर कमांडर के साथ दूसरे सर्विस का डिप्टी या चीफ ऑफ स्टाफ होगा. इसी तरह हर थिएटर की ऑपरेशनल संरचना में भी तीनों सेवाओं के लोग शामिल होंगे.”
सूत्रों ने कहा कि नियुक्तियां सामान्य परिस्थितियों में जैसे-जैसे अधिकारियों की पोस्टिंग बदलती है, वैसे-वैसे की जाएंगी.
थिएटराइजेशन का प्रस्ताव पहले इस बात पर अटका हुआ था कि सीमित एयर संसाधनों को कैसे बांटा जाए. लेकिन अब तीनों थिएटर के बीच एयर संसाधनों के बंटवारे पर सहमति बन गई है. एयर मुख्यालय रणनीतिक एयर संसाधनों जैसे रिफ्यूलर, ट्रांसपोर्ट विमान, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग और कंट्रोल विमान, भविष्य में खरीदे जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस विमान और स्पेस एसेट्स को नियंत्रित करेगा.
संकेत यह भी हैं कि पहले की योजना के विपरीत, सर्विस चीफ्स को कुछ हद तक ऑपरेशनल भूमिका भी दी जाएगी, भले ही वह सीमित हो. पहले योजना थी कि उनकी भूमिका केवल सेना तैयार करना, प्रशिक्षण देना और उसे बनाए रखना ही होगी.
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