सैनिक कार्रवाई करके चीन ने भारत के लिए चारा डाला है. इसका तुरंत और भावुक जवाब देना भारत की रणनीतिक मूर्खता होगी. अनिश्चित काल तक यथास्थिति बनाए रखकर, भारत चीन को अपना जवाबी चारा डाल सकता है.
इमरान खान की सरकार का सारा ध्यान गड़बड़ियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार बताने और प्रधानमंत्री को बेदाग साबित करने पर रहा है; फर्जी पाइलटों वाले घोटाले को लेकर भी उसका यही रवैया जारी है.
आपातकाल के विपरीत, मोदी सरकार ने एक लोकतंत्र की औपचारिक प्रक्रियाओं को बरकरार रखा है, ऐसे में विपक्षी नेताओं के लिए उदासीन भाव अपनाए बैठी जनता को स्थिति की गंभीरता समझाना आसान नहीं है.
ऐसे ही निर्णायक मौके पर नेतृत्व की परीक्षा होती है. आज, देश सचमुच जानना चाहता है कि हमारी सरहदों पर क्या हो रहा है, कोरोनावायरस के फैलाव के रोकथाम के मद्देनजर क्या कुछ किया जा रहा है.
भारत को लोग आईटी सुपरपावर कहते हैं. इस नाते क्या हमें इस बात को लेकर चिंतित होना चाहिए कि भारत के सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाले 10 में से एक भी मोबाइल ऐप भारतीय नहीं है?
जयराज और बेनिक्स आज हमारे बीच मौजूद होते अगर मजिस्ट्रेट ने रिमांड के लिए तमिलनाडु पुलिस की याचिका स्वीकार करते समय कठपुतली की तरह काम करने के बजाये अपने विवेक से कोई फैसला लिया होता.
फ़ैकल्टी की नियुक्ति के समय विश्वविद्यालय लगभग हर मामले में अपने ही पुराने छात्रों को तरजीह देते हैं, भले ही योग्यता के लिहाज से वे कई तरह से उपयुक्त न होते हों. यह हमारे विश्वविद्यालयों के लिए धीमा जहर साबित हो रहा है.
भारत में कोयले का विश्व का पांचवा सबसे बड़ा भंडार है, फिर भी हम दुनिया के दूसरे सबसे बड़े आयातक हैं. केवल चीन ही हमसे अधिक, प्रति वर्ष लगभग 300 मिलियन टन, कोयला आयात करता है.
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है