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Saturday, 18 April, 2026
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असहमति की आवाज़ बेहद जरूरी लेकिन इसकी सीमा भी निर्धारित की जानी चाहिए

राजस्थान में सत्तारूढ़ कांग्रेस में चल रहे राजनीतिक घमासान और पार्टी के बागी विधायकों के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय ने जोर देकर कहा है, ‘लोकतंत्र में असहमति के स्वर दबाए नहीं जा सकते.’

बर्तन धोने से पहले जो दिल बैठ जाता है, भूलिए उसे अब डिशवॉशर इससे आपको निजात दिलाने आ गया है

महामारी हमें जीवन में एक बेहतर संतुलन पर पहुंचने के मौक़े दे रही है. डिशवॉशर्स और दूसरे बहुत से घरेलू उपकरण लोगों को ज़्यादा प्रोडक्टिव बना रहे हैं.

ऊंची मुद्रास्फीति का मतलब ये नहीं है, कि आरबीआई की मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी ब्याज दरें बढ़ा दे

सप्लाई चेन्स के धीरे धीरे फिर से शुरू होने के साथ ही, मुद्रास्फीति घट सकती है. लॉकडाउन से भी आंकड़े सीमित हो गए हैं, इसलिए दरें बदलने से पहले, एमपीसी को इंतज़ार करना चाहिए.

अड़ियल चीन के लिए भारत के पास मौजूद दो विकल्पों में से बेहतर है लड़ाई को उसके खेमे में ले जाना

भारत-पाकिस्तान संघर्ष की तरह चीन-भारत संघर्ष का भी एक परमाण्विक आयाम होगा और विडंबना ये है कि भारत परमाणु टकराव के खतरे का भय दिखा रहा होगा.

इमरान खान के ‘नया पाकिस्तान’ में हुकूमत को सच बताया तो आप घर नहीं लौट पाएंगे

पिछले करीब 28 साल में पाकिस्तान में 61 पत्रकारों को अपना फर्ज़ निभाने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है, जिनमें ‘द वाल स्ट्रीट जर्नल’ के पत्रकार डेनियल पर्ल के हत्याकांड को तो आप नहीं ही भूले होंगे.

बाल गंगाधर तिलक की महानता के दीवाने क्यों नहीं थे डॉ. आंबेडकर

बाबा साहेब का मानना था कि तिलक की वजह से कांग्रेस ने समाज सुधार के काम बंद कर दिए. इससे भारत में सामाजिक परिवर्तन का रास्ता बंद हो गया और राजनीतिक सुधार भी रुक गए.

भारत को जीतने में राहुल गांधी लगातार नाकाम, कोविड के साथ कांग्रेस संकट का भी अब तक नहीं है कोई इलाज़

कांग्रेस पार्टी को बीजेपी से सीखने की ज़रूरत है कि पार्टी के भीतर गुटों और महत्वाकांक्षाओं को कैसे संभाला जाए.

मूल्य अपना मूल्य खो बैठें हैं, ‘लोकतांत्रिक’ तरीके से चुनी हुई सरकार से ख़तरे में डाला जा रहा लोकतंत्र

वर्तमान में हमारा देश एक ऐसे दौर से गुज़र रहा है जिसमें वरिष्ठ अनुभवी लोगों का अपना नज़रिया है जो कि लंबे अनुभव पे टिका है, वहीं दूसरी ओर युवा पीढ़ी है जो कि अपना लक्ष्य प्राप्त करने की जल्दी में है. इस परिदृश्य में स्वाभाविक है कि टकराव होने की संभावना होती है.

असम और बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ पर ठोस कदम उठाना ही भारत के लिए सच्चा राष्ट्रवाद होगा

असम और बिहार में ढुलमुल राजनीति, लचर नीति , नीति-निर्माताओं का बाढ़ को लेकर उपाय सोचते वक्त हमेशा दिमागी पंगुता का शिकार हो जाना, लोगों का अपने मजबूरियों के घेरे से बाहर निकलकर बाढ़ की विपदा को संघर्ष के एक मुद्दे के रुप में ना देख पाना ही है.

बीजेपी के वर्चस्व वाली राजनीति के लंबे दौर में प्रवेश कर चुका है भारत

आने वाले कई वर्षों तक भारतीय राजनीति बीजेपी के आसपास और उसके पक्ष और विपक्ष में घूमती रहेगी. हो सकता है कि इस बीच में बीजेपी कोई चुनाव हार भी जाए लेकिन विमर्श के केंद्र में बीजेपी ही रहेगी.

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नक्सलवाद से पश्चिम बंगाल की लड़ाई पुलिस एक्शन तक ही सीमित नहीं थी

मुझे लिखित संदेश मिला कि कानू सान्याल अपना ‘प्रतिनिधिमंडल’ मेरे पास भेजना चाहते हैं. उम्मीद की जा रही थी कि अपने उग्र समर्थकों के साथ आ रहे दुबले-पतले गुस्सैल बूढ़े आदमी के साथ बेहद तीखी मुठभेड़ होगी.

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अल्पसंख्यक वोटबैंक में फिर से पैठ मजबूत करती दिख रही है तृणमूल कांग्रेस

(प्रदीप्त तापदार) कोलकाता/बहरामपुर, 18 अप्रैल (भाषा) करीब एक महीने पहले तृणमूल कांग्रेस के अल्पसंख्यक वोट बैंक में 15 साल में पहली बार गिरावट...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.