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Friday, 17 April, 2026
होमराजनीति‘हमें जनसंख्या बहुमत की तानाशाही का खतरा है’—थरूर ने परिसीमन को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा

‘हमें जनसंख्या बहुमत की तानाशाही का खतरा है’—थरूर ने परिसीमन को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा

कांग्रेस सांसद का कहना है कि सैद्धांतिक रूप से, मुट्ठी भर बड़े और गरीब राज्य पूरे देश का भविष्य तय कर सकते हैं, जिससे बाकी लोगों को 'अपने ही देश में दर्शक जैसा' महसूस होता है.

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नई दिल्ली: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शुक्रवार को सरकार पर तीखा हमला किया और आरोप लगाया कि वह महिलाओं के आरक्षण बिल के नाम पर परिसीमन को आगे बढ़ा रही है ताकि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक फायदा मिल सके.

सांसद ने कहा कि महिलाओं का आरक्षण परिसीमन की कांटेदार तारों में लपेट दिया गया है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया सिर्फ नक्शा बदलने की नहीं है, बल्कि बिना सही चर्चा के राजनीतिक ताकत में बदलाव है.

थरूर ने लोकसभा में कहा, “परिसीमन सिर्फ नक्शे का प्रशासनिक बदलाव नहीं है. यह राजनीतिक ताकत में बड़ा बदलाव है जो जानबूझकर किया जा रहा है. इसे महिलाओं के आरक्षण से जोड़ना भारतीय महिलाओं की उम्मीदों को देश की सबसे विवादित राजनीतिक प्रक्रियाओं में से एक के साथ बंधक बना देता है.”

कांग्रेस सांसद ने परिसीमन को “राजनीतिक नोटबंदी” बताया और चेतावनी दी कि यह प्रक्रिया उत्तर और दक्षिण राज्यों के बीच संतुलन बदल सकती है. उन्होंने इसे देश के इतिहास की सबसे जटिल प्रशासनिक प्रक्रियाओं में से एक बताया और इस पर जरूरी चर्चा की मांग की.

उन्होंने कहा, “परिसीमन इतनी जल्दबाजी में लाया गया है, जैसी जल्दबाजी नोटबंदी के समय दिखाई गई थी, जिसने देश को नुकसान पहुंचाया. ऐसा मत कीजिए.”

थरूर ने सवाल उठाया कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण नहीं किया, उन्हें ज्यादा राजनीतिक महत्व क्यों मिल रहा है, जबकि केरल और तमिलनाडु जैसे राज्य, जिन्होंने जनसंख्या के नियमों का पालन किया, उन्हें नहीं.

दक्षिण की चिंता

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी पूछा कि दक्षिणी राज्यों की अच्छी शासन व्यवस्था को उनकी राजनीतिक कमजोरी से क्यों जोड़ा जा रहा है.

उन्होंने लोकसभा में कहा, “परिसीमन पर गहराई से विचार जरूरी है. इसमें तीन बड़े मुद्दे हैं. पहला, छोटे और बड़े राज्यों के बीच संतुलन. दूसरा, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्य जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के राष्ट्रीय लक्ष्य पूरे किए, और तीसरा, उत्तर के वे राज्य जिन्होंने ऐसा नहीं किया. परिसीमन में जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण में असफल रहे हैं, उन्हें ज्यादा राजनीतिक ताकत मिल जाएगी.”

थरूर ने कहा कि परिसीमन राज्यों के बीच संतुलन बिगाड़ सकता है. उन्होंने कहा कि दक्षिणी राज्य देश के खजाने में उत्तर की तुलना में ज्यादा योगदान देते हैं, जबकि उत्तर के राज्य केंद्र की योजनाओं के ज्यादा लाभार्थी हैं.

उन्होंने सवाल उठाया कि सिर्फ जनसंख्या के आधार पर परिसीमन क्यों हो, क्योंकि इससे उन राज्यों को और नुकसान होगा जो देश को चलाने में सबसे ज्यादा योगदान देते हैं.

उन्होंने कहा, “हम एक ऐसी स्थिति बना सकते हैं जहां जनसंख्या बहुमत का दबदबा हो जाएगा, और कुछ बड़े और गरीब राज्य पूरे देश का भविष्य तय करेंगे, जबकि छोटे राज्य और अलग भाषा, संस्कृति और आर्थिक योगदान वाले राज्य अपने ही देश में किनारे पर खड़े रह जाएंगे.”

उन्होंने यह भी कहा कि गृह मंत्री अमित शाह का “50 प्रतिशत फॉर्मूला”—जिसमें कहा गया है कि कोई राज्य अपनी सीटें नहीं खोएगा—सिर्फ एक राजनीतिक आश्वासन है, कानूनी गारंटी नहीं. उन्होंने लोकसभा को 850 सदस्यों तक बढ़ाने के प्रस्ताव को भी “अव्यवहारिक” बताया.

लोकसभा में अभी संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पर चर्चा हो रही है, जिसमें संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान है, और परिसीमन बिल पर भी चर्चा हो रही है, जिसका उद्देश्य लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाना और उन्हें फिर से तय करना है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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