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Sunday, 19 April, 2026
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नागालैंड में हुई हत्याओं ने दिखाया है कि AFSPA की कैसे लत लग चुकी है, क्या मोदी सरकार इसे हटाने की हिम्मत करेगी

उत्तर-पूर्व के अधिकांश भाग को ‘आफस्पा’ जैसे सख्त कानून की जरूरत नहीं है. कोई भी सरकार इसे रद्द करने की हिम्मत नहीं करेगी, तो इसे जहां जरूरी है वहीं लागू किया जाए.

‘योगी जीतेंगे’: UP में इस बात को कैसे फैला रहे हैं ‘माहौली’, चुनावों में क्या है इनकी भूमिका

माहौली साफ बोलने वाले, बातूनी और विश्वसनीय होते हैं. वो आपको चाय की दुकानों पर ये बताते हुए मिल सकते हैं कि योगी या अखिलेश कितने अच्छे हैं.

नाज़ी युद्ध अपराधियों पर अब भी मुकदमा चल सकता है तो 1971 के नरसंहार के लिए पाकिस्तानियों पर क्यों नहीं

बांग्लादेश 1971 के नरसंहार और युद्ध अपराधों के लिए पाकिस्तानी फ़ौजियों पर मुकदमा चलाना चाहता रहा है मगर राजनीतिक हकीकतें उसे रोकती रही हैं, फिर भी इंसाफ तो किया ही जाना चाहिए.

जनरल बिपिन रावत के बाद एक सही सीडीएस का चयन करना मोदी के लिए बेहद महत्वपूर्ण क्यों है

अगले सीडीएस के लिए एक कठित चुनौती ये भी है कि बिडिंग प्रक्रिया में उसे सरकार की तरफ से काम करना होगा और उसके साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि दोनों के बीच एक सीमा रेखा बनी रही.

वसीम रिज़वी का हिंदू बनना मुसलमान और ईसाई धर्मगुरुओं के लिए क्यों नहीं है चिंता का कारण

अगर आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद चाहता है कि भारत एक शुद्ध हिंदू राष्ट्र बने और दूसरे धर्म के लोग शुद्धिकरण करके हिंदू बन जाएं, तो उसे जाति की समस्या से जूझना होगा और जाति का विनाश करना होगा.

क्यों दुर्घटनाग्रस्त होते हैं विमान- कुन्नूर हादसे की जांच का भारतीय वायुसेना के VVIP ऑपरेशन पर पड़ेगा असर

स्विस चीज़ मॉडल कुन्नूर हेलीकॉप्टर हादसे को बेहतर ढंग से समझा सकता है जिसमें जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी और 11 अन्य सैन्य कर्मियों ने जान गंवा दी है.

MSP की मांग पर हड़बड़ी में फैसला अराजकता और लंबे समय तक होने वाले नुकसान का कारण बन सकता है

एमएसपी की गारंटी देने का अर्थ होगा उगाही की एक योजना बनाना, कीमत में अंतर की भरपाई का विकल्प देना या इन दोनों को एक साथ लागू करना. इसका सरकार और बाजार पर क्या असर पड़ेगा?

नागालैंड में उग्रवाद जब चरम पर था तब मैं वहां तैनात था, और तब ‘AFSPA’ भी लागू नहीं था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में नागा शांति समझौते पर दस्तखत तो हो गए मगर ‘आफ़स्पा’ अब भी वहां लागू है, और हम खुद को सबसे बड़ा लोकतंत्र कहते हैं!

भारत में सारी राजनीतिक चर्चा 2024 के इर्द-गिर्द घूम रही है लेकिन साल 2025 है उससे भी ज्यादा खास

मीडिया के साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की हाल की मुलाक़ात के तो कई मायने निकाले जा रहे हैं. मगर कुछ महीने पहले पुस्तक प्रकाशकों के साथ उनकी बातचीत पर कई लोगों ने ध्यान भी नहीं दिया.

अपनी जाति के ‘राजा-रानी’ की उभरती भावना के शक्ल में खड़ी हो रहीं है छोटी-छोटी पार्टियां

अपना दल, निषाद पार्टी और जन अधिकार पार्टी, उन आधा दर्जन छोटे सियासी खिलाड़ियों में हैं, जिन्होंने SP के साथ गठबंधन किया है.

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ईरान पर ट्रंप-नेतन्याहू का दांव: क्या फिर लौट रही है ‘रिजीम चेंज’ की नीति?

अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है

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होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर गोलीबारी; भारत ने ईरान के राजदूत को तलब किया

नयी दिल्ली, 18 अप्रैल (भाषा) होर्मुज जलडमरूमध्य में कच्चा तेल ले जा रहे भारतीय ध्वज वाले दो जहाजों पर शनिवार को ईरानी सैन्य बलों...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.