आज भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में समलैंगिक जीवन को तेजी से मान्यता मिलती जा रही है. विश्व के अनेक देशों में समलैंगिकता को हेय नज़रिये से नहीं देखा जाता है.
सीबीएसई की 10वीं की परीक्षा के प्रश्नपत्र में बेहद प्रतिगामी और महिला विरोधी टिप्पणी को संसद में एक अहम एजेंडा बनाकर सोनिया गांधी ने इस उम्मीद को मजबूत किया है कि राजनीति सिर्फ चुनाव जीतने के जुनून से आगे भी सोच सकती है.
नेहरू ने इतिहास के प्रति जो नजरिया अपनाया उसे एक वामपंथी नजरिए के रूप में पढ़ना जटिल बातों का सरलीकरण करना है. देश को और उसकी विविधता को समझने के लिए, इन मामलों में नेहरू का जो नजरिया है उसकी आज बहुत जरूरत है.
क्या कांग्रेस को पिछड़े वर्ग से आने वाली एक भी महिला में कोई काबिलियत नहीं दिखी. आज़ादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी अब तक ‘महिला मोर्चा’ अध्यक्ष पद के लिए कोई पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाली महिला नहीं मिली ?
कांग्रेस में गांधी परिवार के वर्चस्व के साथ इतने लंबे समय तक सत्ता का लाभ उठाने वाले किसी व्यक्ति के लिए कांग्रेस छोड़ने की संभावना पर कुछ भी कहना अभी अटकलबाजी ही होगा.
‘विश्व असमानता रिपोर्ट-2022‘ के अनुसार वर्ष 2021 में उसकी एक फीसदी आबादी के पास राष्ट्रीय आय का 22 फीसदी हिस्सा संकेन्द्रित हो गया है, जबकि निचले तबके के 50 फीसदी लोगों के पास महज 13 फीसदी हिस्सा बचा है.
एकाधिकारवादी प्रवृत्तियां, टैक्स चोरी, दूसरों का बेजा फायदा उठाना, पैंतरेबाज़ नेताओं की चापलूसी—कॉर्पोरेट एनआरआइ के चैंपियनों को ऐसी कुछ बातों को लेकर सवालों के घेरे में माने जा सकते हैं .
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है