प्रधानमंत्री पद के विपक्षी उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार कांग्रेस के लिए सर्वश्रेष्ठ दांव हो सकते हैं, बशर्ते
वह अभी भी यह न माने बैठी हो कि राहुल गांधी ही मोदी को कड़ी चुनौती दे सकते हैं.
भारत में यह माना जाता रहा कि ऊपर के लोगों का विकास होगा तो रिसकर नीचे तक पहुंचता है. लेकिन ऐसा हुआ नहीं. आज असमान विकास के नाम पर भारत के सामने जस की तस चुनौती बनी हुई है.
कितना अच्छा होता कि आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष में हम अपने प्यारे भारत को उनकी कल्पनाओं का देश बनाने की दिशा में बढ़ते लेकिन जो हालात हैं, उनमें कोई इसका सपना भी भला कैसे देखें?
पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.