दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के 3,235 स्वास्थ्य कर्मियों के बीच किए गये इस अध्ययन की अवधि 16 जनवरी से 24 अप्रैल 2021 के बीच की थी. इसके अनुसार टीकाकरण के बाद केवल 85 स्वास्थ्य कर्मियों ने स्पष्ट लक्षणों वाले (सिंप्टमॅटिक) कोरोना संक्रमण की सूचना दी.
चिंता से जुड़ी प्रतिक्रियाओं में वैसोवेगल रिएक्शंस जैसे लक्षण होते हैं, जब किसी अचानक तनाव से- जैसे खून और सीरिंज आदि देखकर- किसी को चक्कर या बेहोशी हो सकती है.
एन्विजा को भारत बायोटेक से ई-मेल के जरिए शुक्रवार को एक बयान मिला जिसमें यह सूचना दी गयी कि प्रेसिसा कंपनी ब्राजील में ‘भारत’ का प्रतिनिधित्व करने के लिए अधिकृत नहीं रही है.
ऑक्सफैम रिपोर्ट रेखांकित करती है कि ये असमानताएं कोविड महामारी के दौरान कैसे उभर कर सामने आईं, जब ग़रीब लोग स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं का लाभ नहीं उठा सके.
एक स्वास्थ्य बुलेटिन में बुधवार को कहा गया कि पिछले 24 घंटे में 61 मरीज इस संक्रमण से मुक्त हुए हैं. मृतकों की संख्या 25,039 पर पहुंच गयी है जबकि संक्रमण के मामलों की कुल संख्या 14,35,671 पर पहुंच गयी है.
देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या भी बढ़कर 4,07,170 हो गई, जो कुल मामलों का 1.30 प्रतिशत है. मरीजों के ठीक होने की राष्ट्रीय दर 97.36% हो गई है.
दुनियाभर में 11,34,000 बच्चों ने अपने माता-पिता या संरक्षक दादा-दादी/नाना-नानी को कोविड-19 के कारण खो दिया. इनमें से 10,42,000 बच्चों ने अपनी मां, पिता या दोनों को खो दिया.
सरकार के मुताबिक सर्वेक्षण में शामिल किये गये स्वास्थ्य कर्मियों में 85 प्रतिशत में सार्स-सीओवी-2 के खिलाफ एंटीबॉडी है और स्वास्थ्य कर्मियों में 10 प्रतिशत का अब तक टीकाकरण नहीं हुआ है.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.