इस सब की शुरूआत मई में हुई जब इंदौर स्थित एक ट्रांसजेंडर कार्यकर्त्ता संध्या घार्वी को लगा, कि उस समय तक समुदाय के ज़्यादा सदस्यों को टीका नहीं लगा था.
‘दि लांसेट इन्फेक्शस डिजीज’ जर्नल में शोध छापा है जिसमें कहा गया है कि चीन निर्मित कोविड रोधी टीके ‘कोरोनावैक’ की दो खुराकें बच्चों और किशोरों के लिए सुरक्षित हैं और मजबूत एंटीबॉडी बनाने में सक्षम हैं.
दूसरी लहर के अपने अनुभव से सीख लेते हुए, महाराष्ट्र सरकार ने पूरे सूबे में लॉकडाउन उपायों में कड़ाई कर दी है, कोविड से जुड़े ख़र्चों को पूरा करने के लिए, बजटीय कटौतियां शुरू कर दी हैं.
टेपेस्ट्री एक सिंगल राउंड मात्रात्मक पूलिंग एल्गॉरिथम है, जिसे आरटी-पीसीआर टेस्ट के साथ इस्तेमाल किया जाता है. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने इस हफ्ते, इसके व्यवसायिक इस्तेमाल को मंज़ूरी दे दी.
बिहार, यूपी, झारखंड, तमिलनाडु और असम कोविड टीकाकरण के मामले में पांच सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शुमार हैं. लद्दाख और सिक्किम में 50% आबादी को पहली खुराक मिल चुकी है.
गर्भवती महिलाओं को वैक्सीन दी जा सकती है. हालांकि बच्चों के टीकाकरण को लेकर अंतरराष्ट्रीय जूरी में अभी भी बहस जारी है कि क्या बच्चों को टीकाकरण की जरूरत है. अमेरिका में कुछ कॉम्पलीकेशन देखी गई हैं.
हिमाचल प्रदेश में स्थित सीडीएस इस वक्त देश में स्थित एकमात्र टेस्टिंग लैब है. जबकि कोविड वैक्सीन के और ज्यादा निर्मित होने की उम्मीद है तो मोदी सरकार टेस्टिंग में देरी नहीं करना चाहती.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.