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Friday, 24 April, 2026
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कांशीराम क्यों कहते थे कि भारत को मज़बूत नहीं, मजूबर सरकार चाहिए!

जब-जब केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकारे रहीं, ज्यादातर फैसले पूंजीपतियों और सामंती शक्तियों के हक़ में किए गए. ऐसे शासन में क्षेत्रीय आकांक्षाओं, लोक-कल्याण और जनहित के कार्यों को नज़रंदाज़ किया गया.

मौजूदा चुनाव में समाजवाद और सामाजिक न्याय एक बार फिर सतह पर

भारत जैसे देश में जहां समाज जाति और वर्ग के नाम पर बुरी तरह बंटा हो, वहां समाजवाद की सफलता सामाजिक न्याय संबंधी नीतियों के कार्यान्वन पर निर्भर करती है.

भाजपा का इन चुनावों में जोश ठंडा, फिर भी सरकार बना लेने की उम्मीद

भाजपा के विरोध में कोई एक ऐसा मोर्चा नहीं बन सका है जो तमाम गैर भाजपाई दलों की एकता के लिए धुरी का काम करे. ऐसे में चुनाव के बाद कई दल पाला बदल सकते हैं.

गरीबों और वंचितों के लिए फ़ायदेमंद है गठबंधन सरकार

इवर्सेन और सोस्की ने अपने रिसर्च में पाया है कि जिन देशों में गठबंधन सरकारें बन रही हैं, उनमें असमानता कम बढ़ी है, जबकि जिन देशों में पूर्ण बहुमत की स्थाई सरकारें बनी है, उनमें असमानता तेज़ी से बढ़ रही है.

सर्जिकल स्ट्राइक पर भाजपा- कांग्रेस की लड़ाई से, राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमारा रवैया जगजाहिर हो गया है

भारत पड़ोसी पाकिस्तान को बाध्य करने की स्थिति में बिल्कुल नहीं है, और पाकिस्तान सुनियोजित छद्म युद्ध की अपनी रणनीति पर कायम रहेगा.

यह अंग्रेजों का दौर नहीं जब अनशन सफल हुआ करते थे

अंग्रेजों की क्रूरता से इतिहास भरा पड़ा है लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि 1916 का मदन मोहन मालवीय का आंदोलन अंग्रेजों से बातचीत के बाद ही सफल हो पाया था.

आंध्रप्रदेश में कैसे तोड़ी थी राजशेखर रेड्डी ने माओवादियों की कमर

पूर्व मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी उर्फ वायएसआर के नेतृत्व में राज्य सरकार माओवादी हिंसा के फन कुचलने में कामयाब रही. बाद की सरकारों ने भी रेड्डी की रणनीति पर कठोरतापूर्वक अमल किया जिसके नतीजे अब सामने आ रहे हैं.

क्यों मीडिया की ग्राउंड रिपोर्ट, ओपिनियन और एग्ज़िट पोल चुनाव को लेकर एक मत नहीं हैं

समाचार रिपोर्ट राजनीतिक रणनीति और स्थानीय मुद्दों को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ये सीटों की टैली को बड़े पैमाने पर प्रभावित नहीं करते हैं.

यूपी में ‘आएगा तो मोदी ही’ की गूंज के बीच अब…’आएगा तो गठबंधन ही’!

लोकसभा चुनाव अभी समाप्त नहीं हुए हैं, लेकिन उनके बाद की राजनीतिक संभावनाओं की तलाश शुरू हो गई है. इस क्रम में देश के...

एक खामोश क्रांति: लाखों युवक अब नौकरी नहीं, कारोबार करने की जुगत में हैं

यह लगातार तीसरा वर्ष है जब सरकार ने मुद्रा योजना के तहत अपना कोई काम-धंधा शुरू करने वालों को जितना लोन देने का मन बनाया था, उसमें वह सफल रही है.

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दंतेवाड़ा के कलेक्टर ओपी चौधरी ने नक्सल-प्रभावित ज़िले में शिक्षा को कैसे बढ़ावा दिया?

तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.

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दिल्ली के कुछ हिस्सों में ‘लू’ का प्रकोप, शनिवार के लिए ‘येलो अलर्ट’

(तस्वीरों के साथ) नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी के कुछ हिस्सों में शुक्रवार को इस मौसम की पहली ‘लू’ दर्ज की गई...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.