Thursday, 7 July, 2022
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एक खामोश क्रांति: लाखों युवक अब नौकरी नहीं, कारोबार करने की जुगत में हैं

यह लगातार तीसरा वर्ष है जब सरकार ने मुद्रा योजना के तहत अपना कोई काम-धंधा शुरू करने वालों को जितना लोन देने का मन बनाया था, उसमें वह सफल रही है.

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देश में लोकसभा चुनावों के स्वाभाविक कोलाहल के बीच एक अहम खबर दब सी गई है. पर यह अपने आप में अत्यंत ही महत्वपूर्ण है. खबर यह है कि सरकार ने मुद्रा लोन योजना के तहत अपने 2018-19 के लक्ष्य को पूरा कर लिया है. ये राशि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 23 फीसद अधिक है. सरकार ने इस अवधि के दौरान 3 लाख करोड़ रुपये का लोन देने का लक्ष्य बनाया था. आपको पता ही है कि उपर्युक्त मुद्रा योजना के तहत देशभर के उन नवयुवकों / नवयुवतियों को आसान दरों पर लोन उपलब्ध करवाया जाता है, जो पहली बार अपना कोई कारोबार शुरू करना चाहते हैं.

आज से बीसेक साल पहले जिन कारोबारियों ने अपना कोई बिजनेस शुरू किया है, वे ही बता सकते हैं कि उन्हें पूंजी जुटाने के लिए दिन में ही रात के तारे नजर आ जाते थे. बैंकों के चक्कर लगाते-लगाते जूतियां घिस जाती थीं . इसी वजह से ज्यादातर भावी कारोबारियों के कुछ खास करने के ख्वाब बिखर जाया करते थे कि उन्हें कहीं से पूंजी ही नहीं मिल पाती थी.

बहरहाल अब वो गुजरे ज़माने की बातें हो चुकी हैं. अब तो यदि आप कोई छोटा-मोटा काम करने का इरादा रखते हैं तो भी आपको बिना गारंटी और सम्पत्ति गिरवी किये लोन मिलेगा. आपको मुद्रा योजना के जरिए तमाम बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाएं लोन दे रहे हैं. आपके पास सिर्फ होना चाहिए एक अदद आइडिया जिसको लेकर आप आगे बढ़ना चाह रहे हों. क्या आपके पास भी है कोई फड़कता हुआ आइडिया?


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मुद्रा बैंक योजना की सबसे अहम बात यह है कि इसके तहत 50 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक के सस्ते लोन बिना किसी गारंटी या बिना जमीन-मकान गिरवी रखे हुए उपलब्ध किये जा रहे हैं. अगर सरकारी आंकड़ों को मानें तो मुद्रा योजना के माध्यम से अभी तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दिया जा चुका है. यह कोई छोटी रकम नहीं है. ‘मुद्रा योजना’ का पूरा नाम माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रीफाइनेंसिंग एजेंसी है. यानी अब अगर आपके पास कोई आइडिया है तो अपना नया कारोबार शुरू कर सकते हैं, नौकरी के लिए भटकने की बजाय नौकरी देने वाले बन सकते है, क्योंकि, आपको पूंजी मिलने में अब कोई दिक्कत नहीं होगी. पर लोन के लिए आवेदन करने से पहले आपको ठोस ग्राउंड वर्क तो कर ही लेना चाहिए. आपको पता होना चाहिए कि जिस क्षेत्र में आप कदम रख रहे हैं, वहां पर आपके लिए पर्याप्त संभावनाएं मौजूद हैं. किसी के कहने पर तो कभी कोई कारोबार शुरू मत करिए. सुनिए सबकी, पर करिए अपने मन की ही, पूरी तैयारी के बाद.

बेशक, मुद्रा योजना को छोटे कारोबारियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा सकता है. ध्यान रखिए कि ये ही छोटे कारोबारी आगे चलकर शिव नाडार (एचसीएल), सुनील भारती मित्तल (भारती एयरटेल), एन. नारायणमूर्ति ( इंफोसिस) वगैरह बनते हैं. इस तरह के दर्जनों और भी उदाहरण दिए जा सकते हैं. कोई भी कारोबारी पहले दिन से 100 करोड़ का कारोबार चालू नहीं करता है. पहले बहुत ही जमीनी संघर्ष करना पड़ता है, उसके बाद ही कहीं जाकर सफलता मिलती है. सफल होने के बाद उस बुलंदी पर रहने के लिए निरंतर प्रयास करते रहने होते हैं. यानी सफलता प्राप्त करने के बाद भी मेहनत और मशक्कत का क्रम लगातार जारी ही रहता है. फिर कारोबारी अपने धंधे को विस्तार देने के लिए ही अपनी कंपनी का आईपीओ बाजार में लाते हैं. कुछ अन्य स्रोतों के जरिए भी धन जुटाते हैं.

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बहरहाल, यह लगातार तीसरा वर्ष है जब सरकार ने मुद्रा योजना के तहत अपना कोई काम-धंधा शुरू करने वालों को जितना लोन देने का मन बनाया था, उसमें वह सफल रही है. आप कह सकते हैं कि मोदी सरकार की तरफ से नव उधमियों को दिल खोलकर लोन दिया जा रहा है. यह भी साफ है कि अब देश के युवाओं को लग रहा है कि उनके सामने सिर्फ नौकरी करने का ही विकल्प नहीं बचा है. अब वे सिर्फ नौकरी की तलाश में ही अपने जूते नहीं घिस रहे हैं. वे अपना कोई बिजनेस चालू करने का भी मन बना रहे हैं. उन्हें समझ आ गया है कि नौकरियां तो सिकुड़ ही रही हैं. हरेक सरकारी या निजी क्षेत्र की नौकरी के लिए हजारों दावेदार हैं. सरकारी नौकरियां अब बची नहीं . लगातार सिकुड़ रही हैं . फिर मौजूदा युवा पीढ़ी के सामने पहली पीढ़ी के बहुत से उदयमियों के उदाहरण हैं, जिन्होंने सफलता की नई इबारत लिखी है और लगातार लिख रहे हैं. वे अब न केवल सफल कारोबारी के रूप में स्थापित हो चुके हैं,बल्कि सैकड़ों-हजारों नौजवानों को रोजगार दे भी रहे हैं. यह स्थिति देश की समृधि और विकास के लिए सुखद है.

वित्त मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, बैंकों ने 22 मार्च, 2019 तक ही तीन लाख करोड़ रुपये के लोन दे दिए थे. मार्च का महत्वपूर्ण आखिरी सप्ताह बाकी ही था . मोटा-मोटी आप मान कर चलिए कि इतना लोन लगभग लाखों उद्यमियों ने हासिल किया होगा अपने बिजनेस का श्रीगणेश करने के लिए. मुद्रा योजना का पहला लोन तो पचास हजार का ही मिलता है . यानि एक करोड़ में दो सौ लोगों को तो तीन लाख करोड़ में तीन लाख गुणे 200 यानि कम से कम छह करोड़ नव-उधमियों का निर्माण हुआ . सबने दो-चार लोगों को रोजगार भी दिया होगा . तो इस प्रकार नए रोजगारों का निर्माण हुआ . जहां सरकार लोन देने के लिए तैयार है, वहीं भावी उद्यमी भी तेजी से देशभर में सामने आ रहे हैं. वे इस सुनहरे अवसर का लाभ उठाने का पूरा मन बना चुके हैं. नोट कर लीजिए कि इन्हीं में से बहुत से उद्यमी भविष्य के नंदन नीलकेणी (इंफोसिस), सचिन बंसल (फ्लिपकार्ट), भाविश अग्रवाल (ओला कैबस) जैसे बड़े सफल उद्यमी बनेंगे.

सरकार ने अप्रैल, 2015 में मुद्रा योजना का श्रीगणेश किया था. सरकार ने साल 2016-17 के दौरान मुद्रा योजना के तहत 1.80 लाख करोड़ रुपये के लोन ही बांटे थे. पहला वर्ष था . इतनी राशि भी कम नहीं थी . अगले वित्त वर्ष में सरकार ने लोन देने की राशि के कुल बजट को 2.44 लाख करोड़ रुपये का बनाया . एक बात गौर कीजिए कि सरकार की छोटे व्यापारियों को वित्तीय मदद उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं पहले से भी टुकदुम-टुकदुम रफ़्तार से चल रही थीं . लेकिन, मुद्रा योजना को ‘गेम चेंजर’ माना जा सकता है. इसकी वजह यह है कि इसके तहत लोन के लिए बैंकों के बहुत चक्कर काटने की आवशयकता नहीं है. लोन प्राप्त करने की सारी प्रक्रिया सीधी, सरल और पारदर्शी है.


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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत वे सभी स्त्री-पुरुष नव-उद्यमी लोन ले सकते हैं जिसके नाम कोई छोटा सा कुटीर उद्योग भी है या जिसके पास पार्टनरशिप के दस्‍तावेज हैं. लोन लेने वाले महानगरों से लेकर छोटे-शहरों और कस्बों से हैं. पहले तो कुछ बड़े या खास शहरों से ही कारोबारी निकलते थे. हालांकि अभी तक ये आंकड़े मिलने बाकी हैं कि मुद्रा योजना के तहत कितनी महिलाओं ने लोन लिया है.

हालांकि, एक आंकड़ा मेरे पास है . पटना में कार्यरत आदि चित्रगुप्त फाइनेंस लिमिटेड जो सिर्फ महिलाओं को ही ऋण देती है उसने वित्तीय वर्ष 2018-2019 में 32000 महिलाओं को ऋण दिया . ऐसी हजारों एनबीएफसी देश भर में बैंकों के अतिरिक्त काम कर रही हैं . अगर हमारी आधी दुनिया भी कारोबार करने की दिशा में उत्साह दिखाए तो देश तो बदल जाएगा.

(लेखक राज्यसभा सदस्य हैं,यह उनके निजी विचार हैं)

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