यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारी पीएम मोदी की भाषा से प्रभावित थे. ज्यादा संभावना है कि वे बीजेपी समर्थक सोशल मीडिया हैंडल्स की ओर से सरकार के आलोचकों के खिलाफ लगातार की जाने वाली गाली-गलौज से प्रभावित थे.
यह कहानी है भारत की सबसे मशहूर एयरलाइन की, जो प्राइवेट कंपनी से सरकारी कंट्रोल में आई, दशकों तक सरकारी कामकाज की पेचीदगियों से गुज़री और अब घर वापसी के बाद भी स्थिरता की तलाश में है.