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Friday, 18 September, 2026
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PM मोदी के स्कूल सहपाठी को जमीन विवाद में राहत, BJP विधायक से जुड़ी कंपनी ने डील रद्द की

सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन, जिसमें बीजेपी के मीरा-भायंदर विधायक नरेंद्र मेहता की हिस्सेदारी है, ने पीएम मोदी के स्कूल के एक साथी के उनसे मिलने और दखल की मांग करने के एक हफ़्ते बाद डील रद्द कर दी.

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मुंबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्कूल के सहपाठी के उनसे मिलने और एक रियल्टी कंपनी द्वारा कथित तौर पर कब्जा की गई जमीन वापस दिलाने में मदद मांगने के कुछ दिनों बाद, ठाणे स्थित उस कंपनी ने डील रद्द कर दी है और अपना कंस्ट्रक्शन परमिशन सरेंडर कर दिया है. यह कंपनी बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता से जुड़ी है.

हालांकि, 81 वर्षीय असगर अली वोहरा को अभी तक 2,810 वर्ग मीटर का प्लॉट वापस नहीं मिला है. इसकी मालिकाना हक को लेकर अभी भी विवाद है और मामला अदालत में विचाराधीन है.

सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन कंपनी में मीरा भयंदर से बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की हिस्सेदारी है. कंपनी ने मंगलवार को डील रद्द कर दी. यह वोहरा के मुंबई के मंत्रालय में PM मोदी से मिलने के एक हफ्ते बाद हुआ.

अब जब कंपनी का जमीन पर मालिकाना हक नहीं रहा, तो उसने मीरा भयंदर नगर निगम के टाउन प्लानिंग विभाग से मिली कंस्ट्रक्शन परमिशन भी सरेंडर कर दी है.

हालांकि, मेहता ने जमीन हड़पने के आरोपों से इनकार किया है और दावा किया कि उन्हें “गंदी राजनीति” के जरिए बदनाम किया जा रहा है.

मेहता ने शुक्रवार को दिप्रिंट से कहा, “हमने वोहरा से जमीन नहीं खरीदी थी और न ही उनके साथ धोखा किया. हो सकता है कि उनके साथ दूसरों ने धोखाधड़ी की हो और उन्हें उनके खिलाफ जाना चाहिए था. हमने इस जमीन पर अदालत के आदेश के बाद ही 2019 में मर्विन फर्नांडिस से जमीन का हिस्सा खरीदा था.”

मेहता ने कहा कि जमीन का 50 फीसदी हिस्सा कंपनी ने 2019 में सभी कानूनी दस्तावेजों की जांच करने के बाद ही खरीदा था. उन्होंने कहा कि अब वह वोहरा से मिल चुके हैं और उन्हें अपनी स्थिति समझा दी है. साथ ही उन्हें बताया गया है कि उनकी कंपनी जमीन पर अपने दावे को छोड़ देगी.

हालांकि, मेहता ने शिवसेना विधायक और अपने पुराने राजनीतिक विरोधी महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक पर भी निशाना साधा. सरनाईक के ओवला-माजीवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में मीरा-भयंदर के कुछ हिस्से आते हैं.

मेहता ने सरनाईक का नाम लिए बिना दिप्रिंट से कहा, “110 फीसदी यह स्थानीय राजनीति है. जमीन खरीदना और बेचना कंपनी का रोज का काम है, तो हर डील में मुझे क्यों घसीटना? मामले को उसके गुण-दोष के आधार पर देखा जाना चाहिए. संबंधित विधायक गंदी राजनीति कर रहे हैं और लगातार लोगों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. वह सिर्फ एक पक्ष की बात करते हैं और मुझे बदनाम करने की कोशिश करते हैं.”

उन्होंने इसे जनवरी में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी और शिवसेना के बीच गठबंधन नहीं होने से भी जोड़ा.

सरनाईक ने PM और वोहरा की मुलाकात की तस्वीरें शेयर की थीं और भरोसा जताया था कि PM अपने “स्कूल के सहपाठी” को न्याय दिलाएंगे. लगता है कि तब से X पर की गई यह पोस्ट डिलीट कर दी गई है.

विवादित जमीन पर BJP विधायक ने क्या कहा

मेहता के मुताबिक, जिस जमीन मालिक से वोहरा ने 1989 में जमीन खरीदी थी, उसने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करके 2011 में वह जमीन स्वयम् बिल्डर्स को बेच दी.

उनके मुताबिक, स्थानीय जमीन मालिकों के एक परिवार का भी इस संपत्ति में हिस्सा था. मर्विन फर्नांडिस 2014 में राजस्व विभाग के पास गए और पूरी जमीन में 50 फीसदी अधिकार का दावा किया.

मेहता ने कहा कि परिवार ने 2014 में ठाणे की अदालत का भी रुख किया था. अदालत ने मर्विन फर्नांडिस को उस संपत्ति के 50 फीसदी हिस्से का मालिकाना हक दे दिया.

मेहता ने कहा, “मर्विन ने यह संपत्ति वोहरा या स्वयम् (बिल्डर्स) को नहीं बेची थी, बल्कि इसे किसी मुकेश पारेख को बेच दिया था और बाद में 2019 में हमारी कंपनी सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन ने फर्नांडिस और पारेख से उसका 50 फीसदी हिस्सा खरीद लिया.”

लेकिन अब जब यह डील रद्द हो चुकी है, मेहता का कहना है कि जमीन से उनका कोई लेना-देना नहीं है, “और हमने मर्विन से अपना पैसा वापस करने को कहा है. वोहरा और मर्विन आपस में लड़ें.”

फिलहाल, जमीन के 50 फीसदी हिस्से पर मर्विन और बाकी 50 फीसदी पर स्वयम् बिल्डर्स का दावा है. वहीं, वोहरा पूरी जमीन के मालिकाना हक का दावा कर रहे हैं और उन्होंने ठाणे की अदालत का रुख किया है. मामला अभी भी अदालत में है.

दिप्रिंट ने वोहरा के वकील नितिन मोकाशी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका. अगर उनका जवाब मिलता है तो रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

वोहरा का आरोप

वोहरा ने कहा था कि मामला भयंदर ईस्ट के नवघर में 2,810 वर्ग मीटर के एक प्राइम प्लॉट से जुड़ा है, जिसे उन्होंने 1989 में खरीदा था. उन्होंने कहा कि उन्होंने इसे कभी बेचा या ट्रांसफर नहीं किया.

उन्होंने आरोप लगाया कि 2011 में स्वयम् और अन्य लोगों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और जमीन को दो हिस्सों में बांट दिया. उसी साल दो कंपनियों, स्वयम् बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन ने कथित तौर पर उस जमीन पर कब्जा कर लिया.

उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मामले में 2015 में FIR दर्ज कराई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ.

इस महीने की शुरुआत में जब उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की थी, तब उन्होंने CBI से जांच कराने की मांग की थी. उन्होंने कहा कि मामले में अब कार्रवाई शुरू हो गई है और नगर निगम के अधिकारियों ने दोनों कंपनियों के मैनेजमेंट को 16 सितंबर को सफाई देने के लिए बुलाया है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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