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Saturday, 19 September, 2026
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चेन्नई एयरपोर्ट पर AAI की जगह नया ऑपरेटर चाहते हैं सीएम विजय, DMK और लेफ़्ट पार्टियों ने किया विरोध

यह अनुरोध तब आया है जब TVK सरकार ने परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की योजना छोड़ दी है और मौजूदा मीनांबक्कम सुविधा के विस्तार पर ध्यान केंद्रित किया है, साथ ही दूसरे एयरपोर्ट के लिए वैकल्पिक जगहों पर भी विचार किया जा रहा है.

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चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ़ विजय ने अगस्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट का ऑपरेटर बदलने की मांग की. इस एयरपोर्ट को अभी एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (AAI) चला रही है. यह बात दिप्रिंट को पता चली है.

इसे निजीकरण की तरफ़ एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है. शनिवार को इस बारे में खबरें सामने आने के बाद DMK, CPI, CPI(M) और AMMK ने इसका कड़ा विरोध किया है.

अपनी चिट्ठी में मुख्यमंत्री विजय ने एयरपोर्ट के प्रदर्शन के कुछ पहलुओं पर नाखुशी जताई, जैसे यात्रियों की संख्या, विमानों की आवाजाही और कार्गो. उन्होंने तर्क दिया कि तमिलनाडु जैसे कारोबार के अनुकूल राज्य को निवेश और उद्योग को सहारा देने के लिए एयरपोर्ट का बेहतर प्रबंधन चाहिए. इसलिए उन्होंने AAI के अलावा किसी और ऑपरेटर की मांग की.

इसलिए तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से एयरपोर्ट का निजीकरण करने का अनुरोध किया है. सूत्रों ने दिप्रिंट को इसकी पुष्टि की.

यह अनुरोध इसके बाद आया है कि TVK सरकार ने परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफ़ील्ड एयरपोर्ट का प्रस्ताव छोड़ दिया और अपना ध्यान मौजूदा मीनांबक्कम सुविधा को बढ़ाने पर लगा दिया. दूसरे एयरपोर्ट के लिए दूसरी जगहों पर विचार चल रहा है.

DMK लंबे वक़्त से तमिलनाडु के बड़े एयरपोर्टों के निजीकरण का विरोध करती रही है. पिछले सालों में जब केंद्र ने चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै और तिरुचिरापल्ली को मोनेटाइज़ेशन की योजनाओं में शामिल किया था, तब पिछली DMK सरकार ने उन्हें निजी ऑपरेटरों को सौंपने का विरोध किया था. उसने राजस्व में हिस्सेदारी या ऐसी हिस्सेदारी की व्यवस्था की मांग की थी, जो ज़मीन में राज्य के योगदान को दिखाए.

हालांकि सरकारी अधिकारी कहते हैं कि यात्री और उद्योग से जुड़े लोग समय-समय पर बेहतर सुविधाओं की मांग करते रहे हैं. वे नए टर्मिनल और कैब पिकअप के इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे प्रोजेक्टों में देरी का हवाला देते हैं.

CPI की तमिलनाडु इकाई ने 19 सितंबर को एक कड़ा बयान जारी करके इस कदम की निंदा की. उसने कहा कि मुख्यमंत्री विजय की प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी, जिसमें चेन्नई एयरपोर्ट के लिए दूसरा ऑपरेटर मांगा गया है, उसका निजीकरण करने की कोशिश के बराबर है, और CPI इसका कड़ा विरोध करती है. पार्टी ने कहा कि AAI मुनाफ़ा कमा रही है. उसने 2025-26 में 6,522 करोड़ रुपये के कथित शुद्ध मुनाफ़े का हवाला दिया और कहा कि निजीकरण इसका हल नहीं है.

लेफ़्ट पार्टियों ने ज़ोर देकर कहा कि चेन्नई एयरपोर्ट कोई आम कारोबारी सुविधा नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की एक सरकारी संपत्ति है. यह तमिलनाडु के उद्योग, व्यापार, पर्यटन और कार्गो की आवाजाही के लिए बहुत अहम है. उन्होंने कहा कि कामकाज की जो भी कमियां हैं, उन्हें यात्री सेवाओं, विमानों के संचालन, कार्गो संभालने और कनेक्टिविटी को बेहतर बनाकर ठीक किया जाना चाहिए, निजीकरण से नहीं.

CPI(M) के राज्य सचिव पी. शनमुगम ने भी मुख्यमंत्री विजय की लिखी चिट्ठी की निंदा की. उन्होंने कहा कि अगर चेन्नई एयरपोर्ट को किसी निजी संस्था को सौंपने की सरकार की कोशिशों की बात सच है, तो सरकार को ऐसा फ़ैसला फ़ौरन छोड़ देना चाहिए. उन्होंने इसे कड़ी निंदा के लायक बताया. AMMK नेता टी.टी.वी. दिनाकरन ने भी सरकार से ऐसा फ़ैसला फ़ौरन छोड़ने की मांग की.

DMK नेताओं ने इस चिट्ठी को पहले परंदूर प्रोजेक्ट को रद्द किए जाने से जोड़ा है.

पूर्व उद्योग मंत्री टी.आर.बी. राजा ने X पर लिखा कि राज्य सरकार के परंदूर एयरपोर्ट प्रोजेक्ट के रद्द होने के पीछे की सच्चाई अब सामने आ रही है. उन्होंने कहा कि खबरें आई हैं कि मुख्यमंत्री ने चेन्नई एयरपोर्ट का प्रबंधन किसी निजी ऑपरेटर को सौंपने के लिए चिट्ठी लिखी थी. उन्होंने सवाल किया कि अगस्त की यह चिट्ठी छुपाकर क्यों रखी गई.

राजा और दूसरे DMK नेताओं ने पहले परंदूर प्रोजेक्ट के छोड़े जाने की आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि यह तमिलनाडु के औद्योगिक विकास और विमानन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक झटका है. उन्होंने तर्क दिया था कि इससे दो रनवे वाले ग्रीनफ़ील्ड एयरपोर्ट की कई सालों की योजना कुर्बान हो गई. नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने भी 2025 की शुरुआत में सार्वजनिक तौर पर भरोसा दिया था कि चेन्नई एयरपोर्ट का निजीकरण नहीं होगा और वह AAI के प्रबंधन में ही रहेगा. उन्होंने कहा था कि कोशिशें अंदर से ही सेवाओं को बेहतर बनाने पर लगाई जाएंगी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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