नई दिल्ली: शिक्षा, परीक्षा में गड़बड़ियों और नौजवानों की शिकायतों को लेकर Gen Z की अगुवाई में हुए प्रदर्शनों ने कैंपसों को अपनी गिरफ़्त में ले लिया और देश की राजनीतिक चर्चा में भी जगह बना ली. उसके करीब दो महीने बाद, दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (DUSU) चुनाव ने एक जाना-पहचाना फ़ैसला दिया है.
प्रदर्शनों की यह लहर यूनिवर्सिटी की पुरानी राजनीति को तोड़ नहीं पाई, और RSS की युवा शाखा ABVP ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पद जीत लिए.
यह नतीजा RSS प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान के कुछ हफ़्ते बाद आया है, जिसमें उन्होंने नई पीढ़ी तक पहुँचने की कोशिश की थी और कहा था कि उनकी शिकायतें सही हैं, और विरोध करना लोकतांत्रिक बातचीत का एक जायज़ तरीका है. उन्होंने इस सोच को भी खारिज किया कि प्रदर्शन करने वाले छात्रों को “देश-विरोधी” कहा जाए, और कहा कि वे “हमारे अपने लोग” हैं और भारत का भविष्य हैं.
ABVP और NSUI दोनों ने DUSU के अपने प्रचार को Gen Z को लुभाने के हिसाब से ढाला, और रील, मीम और AI से बने सोशल मीडिया कंटेंट का इस्तेमाल किया, लेकिन आखिरी फ़ैसला ABVP के पक्ष में गया, जिसने इस नतीजे को “Gen Z का फ़ैसला” बताया.

अध्यक्ष पद जीतने के बाद ABVP के यश डबास ने कहा कि वे खुद भी Gen Z के छात्र हैं, और इस नतीजे को यह संदेश बताया कि “Gen Z देश के साथ है, और Gen Z ABVP के साथ है”.
पहले से चले आ रहे ढर्रे से अलग एक बड़ा नतीजा उपाध्यक्ष पद के मुकाबले में आया, जहाँ निर्दलीय दीपांशु शोकीन, जो कांग्रेस से जुड़े नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के पूर्व सदस्य हैं, ने ABVP और NSUI दोनों के उम्मीदवारों को बड़े अंतर से हरा दिया.
शोकीन ने NSUI का टिकट मांगा था, लेकिन उन्हें आखिरी पैनल से बाहर रखा गया. NSUI ने उनकी जगह बौद्ध अध्ययन के छात्र और कांग्रेस नेता मनीष चतरथ के बेटे विर चतरथ को उतारा.
फिर वे निर्दलीय लड़े, और नतीजे से पता चला कि NSUI ने कितनी बड़ी जगह खाली छोड़ दी थी. शोकीन को 30,615 वोट मिले, जबकि ABVP के ईशु मौर्य को 16,910 और NSUI के चतरथ को 4,313 वोट मिले.
दिल से शुक्रिया DU 🙏🏻 pic.twitter.com/tKOYKKwXn7
— Deepanshu Shokeen (@DeepanshuS_001) September 19, 2026
शोकीन के इस मामले से कांग्रेस जैसे टिकट बंटवारे को लेकर भी एक बड़ी चर्चा शुरू हो गई, और सोशल मीडिया पर टिप्पणीकारों ने NSUI के टिकट के दावेदारों को संभालने के तरीके की तुलना कांग्रेस की उस बार-बार आने वाली चुनौती से की, जब टिकट तय करते वक़्त कई दावेदार सामने होते हैं.
इस बीच, कांग्रेस के संचार विभाग के सदस्य अमिताभ दुबे ने इस दावे पर सवाल उठाया कि NSUI ने दीपांशु शोकीन को DUSU का टिकट देने से इनकार किया था. X पर एक पोस्ट में दुबे ने कहा कि शोकीन को अध्यक्ष पद का टिकट दिया गया था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया, और बाद में निर्दलीय के तौर पर उपाध्यक्ष पद के लिए लड़ने का फ़ैसला किया.
बाकी तीनों केंद्रीय पद हालांकि ABVP को ही मिले. यश डबास ने अध्यक्ष पद 2,053 वोटों से जीता, रिया छवाड़ी ने सचिव पद 6,781 वोटों से जीता, जबकि लक्ष्य राज सिंह ने संयुक्त सचिव पद 837 वोटों से जीता.
ABVP का रिकॉर्ड
पिछले करीब एक दशक से DUSU में ABVP ज़्यादातर वक़्त दबदबे वाली ताकत रही है. उसने 2016, 2018, 2019 और 2023 में केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पद जीते, और फिर 2025 और 2026 में भी. दो अपवाद 2017 और 2024 थे, जब ABVP और NSUI ने चारों पद 2-2 से आपस में बाँट लिए. इससे पहले ABVP ने 2015 और 2014 में चारों पद जीत लिए थे.
उससे पहले DUSU कभी NSUI का गढ़ हुआ करता था, जिसने 2005 और 2007 में केंद्रीय पैनल के चारों पद जीत लिए थे. संतुलन 2010 के शुरुआती सालों में बदलना शुरू हुआ.
हालांकि पिछले दो चुनावों में NSUI हर साल सिर्फ़ एक पद जीत पाई, और इस साल केंद्रीय पैनल से पूरी तरह बाहर हो गई.
फ़ैसला आने के कुछ ही देर बाद बीजेपी नेताओं ने ABVP की जीत को “नौजवानों का फ़ैसला” बताने की कोशिश की. केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता किरेन रिजिजू ने X पर लिखा: “नौजवानों की आवाज़ ज़ोर से और साफ़ है!!!”
बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने DUSU चुनाव में जीत पर ABVP को बधाई दी, और इसे उसके शब्दों में नौजवानों के “सकारात्मक और रचनात्मक छात्र राजनीति पर लगातार बने भरोसे” की झलक बताया.
Congratulations to all my young friends at Delhi University on ABVP’s historic victory in the DUSU elections!
This victory reflects the youth’s continued faith in positive and constructive student politics, rooted in the spirit of Nation First, and their strong resolve to… pic.twitter.com/Q7DdxqahWZ
— Nitin Nabin (@NitinNabin) September 19, 2026
X पर एक पोस्ट में नबीन ने कहा कि नतीजा छात्रों की “देश सबसे पहले” की सोच के प्रति प्रतिबद्धता और “विकसित भारत” के सपने में योगदान देने के उनके इरादे को दिखाता है. उन्होंने जीतने वाले उम्मीदवारों और ABVP के प्रचार के लिए काम करने वालों को भी बधाई दी.
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने नतीजे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह जीत देश के नौजवानों के “देश सबसे पहले” की विचारधारा में उनके शब्दों में “अटूट भरोसे” को दिखाती है. उन्होंने यह भी कहा कि ABVP के कार्यकर्ता, स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा लेकर, नौजवानों के बीच “देशभक्ति, सेवा और राष्ट्र-निर्माण” को बढ़ावा देते रहेंगे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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