नई दिल्ली: अयोध्या के विवादित पुजारी राजू दास के साथ टीवी पर हुई एक तीखी बहस के बाद मथुरा के कांग्रेस नेता कुंवर सिंह निषाद के राजनीतिक करियर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. इस घटना के कुछ हफ्तों बाद निषाद को उत्तर प्रदेश कांग्रेस के मीडिया और कम्युनिकेशन विभाग का प्रमुख बना दिया गया.
कांग्रेस की प्रदेश इकाई में इस नियुक्ति से कई लोग हैरान हैं. लेकिन पार्टी के सूत्रों का कहना है कि यह फैसला सीधे केंद्रीय नेतृत्व ने लिया. टीवी डिबेट के बाद निषाद ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि वह न्याय चाहते हैं. उन्होंने यह भी बताया था कि वह पिछड़े वर्ग से आते हैं और एक ऐसे साधु ने उनके साथ गाली-गलौज की थी, जिसे बीजेपी के करीब माना जाता है.
इसके तुरंत बाद निषाद को दिल्ली बुलाया गया, जहां उनकी राहुल गांधी से मुलाकात हुई. निषाद के मुताबिक, राहुल गांधी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि पार्टी उनके साथ खड़ी रहेगी और संगठन में उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा.
निषाद ने दिप्रिंट से कहा कि टीवी पर हुई घटना के बाद वह निराश थे, लेकिन राहुल गांधी से मुलाकात के बाद उनका हौसला बढ़ा. उनके मुताबिक, राहुल ने उन्हें पार्टी में “पूरा सम्मान” देने का भरोसा दिया. इसके बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कम्युनिकेशन विभाग की जिम्मेदारी दिए जाने की खबर आई.
Hon'ble Congress President has approved the proposal for the appointment of Shri Kunwar Singh Nishad as the Chairperson of the Media and Publicity Department, Uttar Pradesh Congress Committee, with immediate effect. pic.twitter.com/bnHgYDMGDO
— INC Sandesh (@INCSandesh) September 17, 2026
फिलहाल निषाद समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC में रखा गया है. निषाद समुदाय लंबे समय से अनुसूचित जाति यानी SC का दर्जा देने की मांग कर रहा है. उनकी आबादी करीब 3 से 4 प्रतिशत मानी जाती है. यह समुदाय 12 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर खास तौर पर पूर्वी उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में मौजूद है. इसलिए सभी राजनीतिक पार्टियां इस समुदाय को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती हैं. माना जाता है कि निषाद समुदाय काफी हद तक एकजुट होकर वोट करता है. चुनाव वाले उत्तर प्रदेश में निषाद समुदाय SC आरक्षण की अपनी मांग उठा रहा है.
मथुरा के रहने वाले निषाद बीजेपी की युवा शाखा भारतीय जनता युवा मोर्चा यानी BJYM के महासचिव रह चुके हैं.
निषाद ने दिप्रिंट से कहा, “मैंने राजनीति की शुरुआत ABVP यानी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी. उस समय मैं आगरा यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रहा था. मैं RSS की पृष्ठभूमि से आता हूं और मैंने RSS का तीसरे साल का OTC यानी ऑफिसर्स ट्रेनिंग कैंप भी किया है, जिसे तृतीय वर्ष संघ शिक्षा वर्ग कहा जाता है. यह ट्रेनिंग हर किसी को नहीं मिलती.”
उन्होंने कहा, “इसके बाद मैंने बजरंग दल के जिला संयोजक के तौर पर काम किया. 2016 में मुझे BJYM की प्रदेश टीम में शामिल किया गया.”
निषाद के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद उनके और पार्टी के बीच रिश्ते खराब होने लगे.
उन्होंने कहा, “2017 में सरकार बदलने के बाद बीजेपी के अंदर भी स्थिति बदल गई. मुझे लगा कि सिर्फ इसलिए मुझे नजरअंदाज किया जा रहा है क्योंकि मैं निषाद समुदाय से हूं. 2021 में मेरी उस समय बीजेपी के प्रदेश महामंत्री संगठन रहे सुनील बंसल से बहस हुई थी.”
उन्होंने कहा, “मेरा सवाल था कि अगर सरकार का हिस्सा रहे बड़े नेताओं के खिलाफ केस वापस लिए जा रहे हैं, तो निषाद समुदाय के लोगों के खिलाफ दर्ज केस वापस क्यों नहीं लिए जा रहे हैं? मैंने यह मांग भी की थी कि निषाद समुदाय को OBC से हटाकर SC कैटेगरी में रखा जाए. लेकिन मेरी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया. उसी दिन मैंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया.”
उसी साल प्रियंका गांधी की टीम के कुछ लोगों ने उनसे संपर्क किया. निषाद ने बताया कि 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने प्रियंका गांधी से मुलाकात की थी. इसके बाद वह कांग्रेस में शामिल हो गए.
कांग्रेस में शामिल होने के बाद निषाद को पहले जिला प्रवक्ता बनाया गया. बाद में उन्हें प्रदेश प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई. अब प्रदेश के सभी प्रवक्ता उनकी देखरेख में काम करेंगे.
निषाद का राजनीतिक कद अयोध्या में हुई एक घटना के बाद बढ़ा. अयोध्या में एक निषाद सम्मेलन आयोजित किया गया था. इसमें उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय शामिल हुए थे. इस बात को लेकर चर्चा हुई कि सावन के पवित्र महीने में सम्मेलन में मछली परोसी गई थी.
इसके बाद एक टीवी डिबेट में इस मुद्दे पर काफी गरमागरम बहस हुई. इस बहस के दौरान राजू दास ने निषाद के खिलाफ गाली-गलौज और आपत्तिजनक बातें कहीं. कांग्रेस ने अपने प्रदेश मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर निषाद का समर्थन किया. निषाद समुदाय के लोगों ने भी कई जगहों पर प्रदर्शन किए और राजू दास के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
निषाद ने कहा कि वह भविष्य में मथुरा से चुनाव लड़ना चाहते हैं. उनका कहना है कि राहुल गांधी जिस “सामाजिक न्याय” की बात कर रहे हैं, उसका असर चुनाव में टिकट बांटने के दौरान भी दिखाई देगा.
उन्होंने कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी बनाए गए दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति को सकारात्मक कदम बताया. उन्होंने कहा कि गौतम पार्टी के सामाजिक न्याय के संदेश को आगे बढ़ा रहे हैं.
निषाद ने कहा कि वह इस एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए गौतम के साथ मिलकर काम करेंगे.
हालांकि, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के कुछ नेता हाल की नियुक्तियों को लेकर आलोचना कर रहे हैं. कांग्रेस के एक वरिष्ठ प्रदेश नेता ने कहा कि पार्टी में यह चिंता बढ़ रही है कि “बाहर से आए लोगों” को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है और पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं को पीछे किया जा रहा है.
उस नेता ने कहा, “राजेंद्र पाल गौतम आम आदमी पार्टी से कांग्रेस में आए हैं. अजय राय की भी बीजेपी की पृष्ठभूमि रही है. अब कम्युनिकेशन के प्रभारी भी बाहर से आए हैं. पार्टी अपने पुराने कार्यकर्ताओं को भूल रही है और नए चेहरों के साथ प्रयोग कर रही है.”
उन्होंने कहा, “पहले हमने टीम प्रियंका के प्रयोग देखे थे. अब हमें टीम RG का तरीका देखने को मिल रहा है.”
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