नए बनाए गए ज़ोन प्रभारी पहले से ही अपने इलाकों में जाकर बूथ स्तर पर काम का जायजा ले रहे हैं. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि डीएमके 2026 के चुनाव को 2021 से ज़्यादा गंभीरता से ले रही है.
इस साल राज्य भर में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले, राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कोल्हापुर जिले में स्थित सहकारी संघ के नियंत्रण को लेकर राजनीतिक रस्साकशी चल रही है.
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व को लगता है कि विवाद जल्द ही शांत हो सकता है, लेकिन उन्हें हटाने से विपक्ष को फायदा होगा, जबकि देश ‘पाकिस्तान को मोदी सरकार द्वारा दिए गए करारे जवाब का जश्न मना रहा है’.
पूर्व राज्य मंत्री ने यह भी कहा कि मोदी बिहार के मुख्यमंत्री इसलिए नहीं बने क्योंकि ‘वे लव-कुश सामाजिक गठबंधन में फिट नहीं बैठते थे.’ भाजपा नेता का कहना है कि यह नेतृत्व पर दबाव बनाने का प्रयास है कि वे उन्हें और उनके बेटे को चुनाव में शामिल करें.
मध्य प्रदेश में पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण आदिवासी चेहरा, भाजपा नेता अब कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ टिप्पणी के लिए आलोचनाओं के घेरे में हैं. उनके खिलाफ कार्रवाई ‘निश्चित’ है.
हाईकोर्ट ने डीजीपी को एफआईआर दर्ज करने के लिए 4 घंटे की समयसीमा दी है, अन्यथा उन्हें अदालत की अवमानना की कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा. एमपी के मंत्री की आलोचना करते हुए कहा गया कि यह गटर की भाषा है.
पाकिस्तानी सत्ता-तंत्र की हावी होने की मानसिकता, जिसकी जड़ें दशकों के सियासी तेवर और सैन्य सिद्धांत में धंसी हैं, शांति के गंभीर प्रयासों को नाकाम करती रही है. भारत उसकी इस मानसिकता की कभी अनदेखी नहीं कर पाया है.
कांग्रेस के कई नेताओं ने प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा गांधी के नेतृत्व में 1971 के युद्ध की तुलना की, जिसमें भारत ने पाकिस्तान पर निर्णायक जीत हासिल की थी.
AIMIM प्रमुख ने कहा कि युद्ध विराम हो या न हो, हमें पहलगाम के आतंकवादियों का पीछा करना ही होगा. उन्होंने कहा कि उनकी इच्छा है कि 'किसी विदेशी देश के राष्ट्रपति के बजाय मोदी संघर्ष विराम की घोषणा करें.'
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है