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Sunday, 26 April, 2026
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डिजाइनर बच्चे या जातिगत श्रेष्ठता का नाजीवादी अहंकार

क्या गर्भ-संस्कार के जरिए 'गोरा, लंबा और अनुकूलित बच्चा' पैदा करने की सोच के पीछे जर्मनी के हिटलर दौर की आर्य श्रेष्ठता का सिद्धांत काम नहीं कर रहा है?

क्यों विपक्षी अलाप रहे हैं ईवीएम का राग, जबकि वे भी जानते हैं कि सच कुछ और है

पार्टियों के शीर्ष नेताओं की कई तरह की मजबूरियां हैं, जिनमें से एक पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों का मनोबल बनाए रखना भी है.

अदालतों में न्यायाधीश और न्यायिक अधिकारी नहीं होना, न्यायालय और सरकार की चिंता का विषय

कई राज्यों में सरकार और उच्च न्यायालयों ने निचली अदालतों में न्यायाधीशों के रिक्त पदों पर नियुक्ति की कवायद तेज कर दी है.

भारत की खरबों डॉलर की संपदा झुग्गियों में बंद पड़ी है, उन्हें मुक्त करने का समय आ चुका है

झुग्गी, बस्तियां हमारी संपदा पर एक बहुत बड़े बोझ की तरह हैं, जबकि शहरी प्रॉपर्टी के बारे में समझदारी भरी नीति बनाने मात्र से इसका समाधान संभव है.

बदहाल शहरों की कीमत क्या अब मूंगे के पहाड़ों को चुकानी पड़ेगी?

भारत के बड़े शहर बदहाल हो रहे हैं, वे विशाल झोंपड़पट्टियों में तब्दील होते जा रहे हैं, और जब उन्हें सुधारने की कोशिश की जाती है तो ‘कोरल’ यानी मूँगे की चट्टानें आड़े आने लगती हैं जैसा कि मुंबई में हुआ.

झुग्गियों के धन के इस्तेमाल में रोड़ा भारतीय एलीट क्लास, मोदी सरकार को ये कदम उठाने चाहिए

अभिजात वर्ग अतिक्रमण करने वालों को संपत्ति अधिकार की व्यवस्था में अवरोधक मानता है, और अवैध बस्तियों को नियमित किए जाने का विरोध करता है. पर झुग्गियों में अंतर्निहित पूंजी को मुक्त करने के लिए नियमितीकरण ज़रूरी है.

एके राय : कोयले की कालिख में जस की तस धर दीनी चदरिया

तीन बार के सांसद राय ने झारखंड की राजनीति को निर्णायक रूप से प्रभावित किया. कौन हैं वो और उनके बारे में आपको क्यों जानना चाहिए.

बैंकों का हाल इस बात से तय नहीं किया जा सकता कि वे सरकारी हैं या निजी

बैंकिंग के क्षेत्र में जो तकनीकी बदलाव हो रहे हैं उनमें सरकारी बैंक पिछड़ गए हैं और बेहतर कामकाज वाले निजी बैंकों की तुलना में इनका ग्राहक पर ज़ोर कम रहता है.

वामपंथ को भाजपा की सांप्रदायिकता ने नहीं, कांग्रेस की अर्थनीति ने मारा

कम्युनिस्टों ने अपने शासन काल में आर्थिक मोर्चे पर चाहे जो किया हो, सांस्कृतिक मोर्चे पर कमोबेस हिंदुत्ववादी फ्रेम में ही बने रहे.

आर्टिकल 15 में हीरो की जाति है, सुपर 30 में क्यों नहीं?

शानदार काम करने वाले एक काल्पनिक पात्र, एक आईपीएस की जाति का जश्न जब बॉलीवुड मना सकता है तो एक वास्तविक किरदार की श्रेष्ठता पर उनकी जाति का जश्न बॉलीवुड क्यों नहीं मना पाया?

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राइटिंग्स ऑन दि वॉल—नक्सलबाड़ी की क्रांति से ‘विनर्स’ तक: बंगाल की नई इबारत

पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.

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गुवाहाटी से लापता महिला शिलांग में मिली: पुलिस

शिलांग/गुवाहाटी, 25 अप्रैल (भाषा) गुवाहाटी से लापता हुई 25 वर्षीय एक महिला शनिवार को मेघालय की राजधानी शिलांग में मिली। पुलिस ने यह जानकारी...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.