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Saturday, 25 April, 2026
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क्यों जाति-व्यवस्था से मुक्ति पाने के लिए आंबेडकर ने पंथ-परिवर्तन का रास्ता अपनाया

संघ का मानना है कि हिन्दू एकता को बढ़ावा देकर ही जाति-व्यवस्था से मुक्ति पाई जा सकती है जबकि आंबेडकर ने इस कार्य के लिए पंथ-परिवर्तन का रास्ता अख्तियार किया.

डॉ. भीमराव आंबेडकर को क्यों मिलना चाहिए था नोबल प्राइज

डॉ. आंबेडकर ने साउथबोरो कमेटी से लेकर साइमन कमीशन, गोलमेज सम्मेलन और फिर संविधान सभा में दलितों के प्रतिनिधित्व का मामला रखा था.

ऐसा लगता है कि भारत का मीडिया लकड़बग्घे की तरह मुसलमानों के पीछे पड़ गया है

भारत का मीडिया पत्रकारिता नहीं कर रहा; ज़ी न्यूज से लेकर आजतक और नेटवर्क-18 तक हरेक टीवी चैनल को हर चीज़ में जिहाद ही नज़र आता है, वे सोशल मीडिया की अंधभक्ति में मुसलमानों को निशाना बनाते रहते हैं.

डॉ. भीमराव आंबेडकर को पत्रकार और संपादक क्यों बनना पड़ा

डॉ. आंबेडकर ने अपने सामाजिक/राजनीतिक आंदोलन को मीडिया के माध्यम से भी चलाया और अछूतों के अधिकारों की आवाज़ उठाई.

पाकिस्तान पर आर्टिलरी हमले केवल अच्छे पीआर लाएंगे, अधिक प्रभाव के लिए भारत को बालाकोट की जरूरत है

सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट यह बताने के लिए पहला कदम था कि भारत प्रभाव के लिए प्रतिशोध की ओर बढ़ रहा था.

लॉकडाउन: सूरत शहर में मजदूरों के आक्रोश से उभरे संदेशों की गहराई समझे मोदी सरकार

अब भी वक़्त है कि प्रधानमंत्री लॉकडाउन की मियाद बढ़ाने के ऐलान के साथ ही देश और ख़ासकर मेहनतकश तबके को समझाएं कि मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए सरकारें उनके लिए क्या-क्या करने वाली हैं.

कोरोनावायरस संकट के बीच जीवन ही नहीं अब जीविका बचाना भी हो गया है जरूरी

जीवन और जीविका को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता है. ख़ासतौर पर तब, जब इस देश में सोशल सिक्योरिटी नाम की कोई चीज़ नहीं है और सवा अरब लोगों में से 90% से ज़्यादा लोग असंगठित क्षेत्र के भरोसे जीते हैं.

कोरोना महामारी में बाजार का पीछे हटना और राज्यसत्ता की वापसी

जिस बाजार को दुनिया की हर समस्या का समाधान माना जा रहा था, उसने कोरोना महामारी के समय अपने हाथ खींच लिए. वहीं, सरकार, सरकारी अस्पताल, पीडीएस जैसी संस्थाओं की उपयोगिता फिर से साबित हुई है.

सरकार चुनावी मोड से बाहर आकर धीरे-धीरे लॉकडाउन खोले, चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त करे

इंटरनेशनल लेबर ऑर्गनाइज़ेशन ने कहा था कि कोरोना वायरस सिर्फ़ एक वैश्विक स्वास्थ्य संकट नहीं रहा, बल्कि ये एक बड़ा लेबर मार्केट और आर्थिक संकट भी बन गया है जो लोगों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करेगा.

महान नेता देश को कुछ बड़ा देने से बनता है- पीएम मोदी अब कह सकते हैं, ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें सरप्राइज दूंगा’

गहरे चिंतन के बाद मेरा यूरेका मोमेंट आया और हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि मोदी जी ने देश को जो दिया है वह है झटका, सरप्राइज.

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राइटिंग्स ऑन दि वॉल—नक्सलबाड़ी की क्रांति से ‘विनर्स’ तक: बंगाल की नई इबारत

पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.

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उच्च शिक्षा में स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के समावेश की जरूरत : डॉ. अतुल कोठारी

प्रयागराज, 25 अप्रैल (भाषा) शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने शनिवार को कहा कि तेजी से बदलते शैक्षिक परिदृश्य...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.