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Saturday, 25 April, 2026
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कोरोनावायरस मोदी के लिए ठीक वक़्त पर कवच कैसे बन गया

नागरिकता कानून का विरोध करने वाले बिखर गए हैं. राज्य सरकारें बेहद जरूरी वित्तीय सहायता के लिए कतार में खड़ी नज़र आ रही हैं और तमाम आर्थिक समस्याओं का ठीकरा मजे से कोरोना के सिर पर फोड़ा जा सकता है.

मोदी के लॉकडाउन ने काम तो किया लेकिन अब भारत को हनुमान के पहाड़ की नहीं बल्कि संजीवनी बूटी की जरूरत है

लॉकडाउन कारगर रहा है मगर इसे ज्यादा खींचने के कई दूसरे दीर्घकालिक नतीजे हो सकते हैं जो इससे हुए फ़ायदों को खत्म कर दे सकते हैं. इसलिए बेहतर यही होगा कि इसे धीरे-धीरे, व्यवस्थित तरीके से वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाए.

भारतीय मतदाता को उदारवादी बचकाना मान रहे हैं पर ये मोदी पर उनकी खिसियाहट भर है

अपने देश में उदारवाद की कहानी में एक बड़ा इंटरवल आ गया है. कहानी में दम अभी भी है, कहानी चलनी चाहिए लेकिन उदारवादी नायक को अंग्रेजी वाली सौतेली मां छोड़ के हिंदी, बंगाली, मलयालम मां के पास आना पड़ेगा.

कोरोनावायरस के दौर में ज्योतिबा और सावित्रीबाई फुले की याद

उस दौर में महाराष्ट्र में पड़े अकाल और प्लेग जैसी महामारी में ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले दंपति की भूमिका को, आज याद करना अत्यन्त जरूरी है, जब पूरा विश्व कोरोना महामारी का सामना कर रहा है.

भारत में कोरोनावायरस के युग में दबंग पुलिस कैसे हर दिल अज़ीज़ बन गई

जब पुलिस गरीबों की मदद नहीं कर रही होती है या यूपी पुलिस की तरह मुस्लिमों के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए चलाई गई फेक खबरों का खंडन नहीं कर रही होती तो वो ग्राउंड पर गानें गाती हुई दिखाई देती है.

कोरोनावायरस संकट के समय पुलिस के सामने कई चुनौतियां, तय करने होंगे अलग मापदंड

भारत में पुलिस राष्ट्रीय कोरोनावायरस संकट के समय में कानून और व्यवस्था बनाए रखने का उल्लेखनीय काम कर रही है.

मोदी सरकार अकेले कोविड-19 से नहीं लड़ सकती, उसे आरएसएस जैसे ज़मीनी सिपाहियों का साथ चाहिए

आरएसएस अपने स्वयंसेवकों को राहत शिविर संचालित करने की ट्रेनिंग नहीं देता है. फिर भी स्वयंसेवक कोविड-19 संबंधी राहत कार्यों में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं.

कोविड-19 मुसलमानों को अनौपचारिक सेक्टर की नौकरियों से बाहर करने का एक बहाना, अगला चरण नस्लभेदी होगा

मुसलमानों को आज उन्हें आर्थिक हाशिए पर डालने के सुनियोजित प्रयासों का सामना करना पड़ रहा है और इसके लिए सरासर झूठ के सहारे समुदाय को वायरस से जोड़ा जा रहा है.

कोरोनावायरस संकट अगर मोदी नहीं बल्कि मनमोहन सिंह के राज में आता तब क्या होता

मनमोहन सिंह संस्थाओं और व्यवस्था का दामन पकड़कर बिना शोरशराबा किए शासन चलाने वाले नेता रहे हैं जबकि नरेंद्र मोदी अपनी शख्सियत के बल पर अपनी कथनी और करनी में मुखर रहने वाले नेता रहे हैं. कोरोना संकट से निपटने में दोनों को अपनी-अपनी खास ताकत से बल मिलता.

मोदी को लॉकडाउन नहीं बढ़ाना चाहिए क्योंकि अर्थव्यवस्था लंबे समय तक वेंटिलेटर के सहारे नहीं चल सकती

कोविड-19 लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की राजनीतिक सलाह मानने से पहले मोदी को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए. कई बार इलाज मर्ज़ से भी अधिक नुकसानदेह साबित होता है.

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राइटिंग्स ऑन दि वॉल—नक्सलबाड़ी की क्रांति से ‘विनर्स’ तक: बंगाल की नई इबारत

पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.

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छत्तीसगढ़ : बीजापुर जिले में शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में ठेकेदार गिरफ्तार

बीजापुर, 25 अप्रैल (भाषा) छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक को आत्महत्या के लिए कथित तौर पर उकसाने के...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.