चीन के खिलाफ हरेक कदम की जानकारी सार्वजनिक करने के लिए मोदी सरकार पर दबाव डालने को भारत के सुरक्षा और रणनीति मानकों के अनुरूप सही नहीं ठहराया जा सकता है.
यह हमेशा ही एक बड़ा सवाल रहा है कि भारत में सहकारी बैंकों को कौन नियंत्रित करता है, राज्य या केंद्र. अध्यादेश ने आरबीआई को विफल बैंकों के मामले में दखल का अधिकार दे दिया है.
टिकटॉक पर थिरकते हुए हम हाल के वर्षों में चीनी तकनीक के गुलाम हो गए, हमें यहां से अपना रास्ता बदलना होगा और अपनी बुनियादी संरचना खड़ी करनी होगी. वरना चीन की जगह हम किसी और पर निर्भर हो जाएंगे.
इस्लामाबाद में कृष्ण का मंदिर बनाने की इजाजत न देना हिंदुओं के खिलाफ पाकिस्तान का एक और ‘गुनाह’ ही है क्योंकि हिंदुओं को भी संविधान के तहत समान अधिकार हासिल हैं.
ओबीसी कोटा अब तक आधा ही भर पाया है, वैसी स्थिति में अगर सरकार नौकरीपेशा लोगों के बच्चों को ओबीसी से बाहर करके ओबीसी कैंडिडेट की संख्या को और कम कर देती है तो इसका फायदा सिर्फ और सिर्फ सवर्णों को होगा.
कोई और देश होता तो ऐसी किताब के आने के बाद उसमें उठाये गये सवालों के इर्द-गिर्द राजनीतिक बहस का तूफान उठ खड़ा हो जाता. प्रश्न-प्रतिप्रश्न और वाद-विवाद में लिखत-पढ़त का एक सिलसिला निकल पड़ता.
विश्व इतिहास के तमाम युद्ध, महामारी, सुनामी और ज्वालामुखी विस्फोट के बाद का अनुभव यही बताता है कि ईश्वर किसी बीमारी से या आपदा की वजह से नहीं मर सकता है.
चीन एलएसी से पीछे हट रहा है और उसे यह संदेश भी मिल चुका है कि भारत के पास आज दुनिया में और भी ज्यादा मित्र हैं. निश्चित तौर पर पिछले 24 घंटे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रहे हैं.
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है