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Saturday, 18 April, 2026
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डिप्टी सीएम होकर भी दुष्यंत चौटाला ने राजनीति में खुद को स्थापित किया है, क्या ये सब सचिन पायलट देख रहे हैं

दुष्यंत चौटाला ने राज्य में कुछ ही समय में जाटों के गुस्से को शांत किया और जनता के सामने एक सक्षम प्रशासक के रूप में तेजी से अपनी पहचान बनाई है.

डिजिटल मीडिया ने बेजुबानों को आवाज दी, लेकिन यहां भी पुराने मठाधीशों का ही कब्जा है

सोशल मीडिया के बारे में अगर किसी को ये भ्रम है कि यहां हर किसी को अपनी बात कहने का समान मौका है तो ये एक भ्रम है. सोशल मीडिया अपने यूजर्स के बीच ऊंच और नीच का भेद पैदा करता है.

विदेश नीति में पूर्वाग्रह और चुनावी सियासत–क्या मोदी सरकार को ‘स्ट्रैटिजिकली’ भारी पड़ रही है

रणनीति तय करने में मोदी सरकार ऐतिहासिक पूर्वाग्रहों और भाजपा की चुनावी राजनीति की गिरफ्त से मुक्त नहीं हो पाती, जबकि लद्दाख संकट साफ संकेत दे रहा है कि उसे आत्मविश्लेषण करने, जमीनी हकीकत को समझने और अपनी नीति में सुधार करने की जरूरत है.

भाजपा के लिए कांग्रेस शासित राज्यों में सत्ता छीनना इतना महत्वपूर्ण क्यों है

वित्तीय हकीकत यह है कि ज्यादा सरकारी पैसा राज्यों के हाथों में होता है, केंद्र के नहीं. इसलिए 15-20 विधायकों को खरीदकर विधानसभा में अपना पलड़ा भारी करने के लिए 400 करोड़ तक खर्च करना बड़ी लड़ाई के लिए खजाना बनाने के लिहाज से कोई बड़ी कीमत नहीं है.

विश्व बाजार में प्राकृतिक उपचार की मांग पूरा करने के लिए भारत को आयुर्वेद को रेगुलेट करना पड़ेगा

अगर भारत में निगरानी और नियमन की कारगर व्यवस्था बनाई जा सके तो भारत जड़ी-बूटी से बनने वाली पारंपरिक दवाइयों का बड़ा उत्पादक और निर्यातक बन सकता है.

सचिन पायलट हेमंत बिस्व सरमा नहीं हैं, कांग्रेस का हर बागी भाजपा के लिए चुनाव नहीं जीत सकता

सचिन पायलट के भाजपा में शामिल होने से इनकार को शपथ लेकर की गई दृढ़ प्रतिज्ञा नहीं माना जा सकता. राजस्थान में बदलते घटनाक्रम के बीच बहुत कुछ चौंकाने वाला सामने आ सकता है.

भारत में पूंजीवाद की सफलता के लिए जरूरी है सबके लिए सोशल सिक्योरिटी स्कीम

पूंजीवादी देशों में सोशल सिक्योरिटी पर काफी ध्यान दिया जाता है और ये माना जाता है कि पूंजीवादी शासन का मतलब लोककल्याणकारी राज्य की विदाई नहीं है. लेकिन भारत में इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है

एलएसी पर सेनाओं को पीछे हटाने की अपारदर्शी प्रक्रिया और अपनी जीत के दावे भारत को महंगे पड़ सकते हैं

एक भ्रामक कहानी बनाई जा रही है कि भारत ने अपने राजनीतिक संकल्प और फौजी ताकत के बूते चीनियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है, इस तरह के दावे हमें नुकसान ही पहुंचाएंगे.

पायलट और सिंधिया बागी होते हैं तो कांग्रेस की हार होती है, लेकिन ‘विरासत के दमपर’ चमकने वालों का भी नुकसान होता है

राजनीतिक महत्वकांक्षाएं रखने वाले नेता जिस दौर में छात्र संगठन और युवा संगठन में अपनी जगह बनाने के लिए दर-दर भटका करते हैं, झंडे उठाया करते हैं उस दौर में सचिन और ज्योतिरादित्य कांग्रेस में मंत्री बन गए थे.

पाकिस्तान ने पबजी को ‘इस्लाम विरोधी’ बताकर बैन किया, इमरान खान के इस कदम ने उन्हें युवाओं से दूर कर दिया है

अगर मज़हबी खयालात, नैतिकता और वक़्त की बर्बादी किसी एक खेल को बैन करने का पैमाना हैं, तो फिर इमरान खान सरकार को पूरा डिजिटल स्पेस ही बंद कर देना चाहिए.

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ईरान पर ट्रंप-नेतन्याहू का दांव: क्या फिर लौट रही है ‘रिजीम चेंज’ की नीति?

अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है

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महिला आरक्षण से संबंधित विधेयक पारित नहीं होने पर ममता ने कहा: भाजपा का पतन शुरू हो गया

हावड़ा (पश्चिम बंगाल), 18 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.