सोशल मीडिया के बारे में अगर किसी को ये भ्रम है कि यहां हर किसी को अपनी बात कहने का समान मौका है तो ये एक भ्रम है. सोशल मीडिया अपने यूजर्स के बीच ऊंच और नीच का भेद पैदा करता है.
रणनीति तय करने में मोदी सरकार ऐतिहासिक पूर्वाग्रहों और भाजपा की चुनावी राजनीति की गिरफ्त से मुक्त नहीं हो पाती, जबकि लद्दाख संकट साफ संकेत दे रहा है कि उसे आत्मविश्लेषण करने, जमीनी हकीकत को समझने और अपनी नीति में सुधार करने की जरूरत है.
वित्तीय हकीकत यह है कि ज्यादा सरकारी पैसा राज्यों के हाथों में होता है, केंद्र के नहीं. इसलिए 15-20 विधायकों को खरीदकर विधानसभा में अपना पलड़ा भारी करने के लिए 400 करोड़ तक खर्च करना बड़ी लड़ाई के लिए खजाना बनाने के लिहाज से कोई बड़ी कीमत नहीं है.
सचिन पायलट के भाजपा में शामिल होने से इनकार को शपथ लेकर की गई दृढ़ प्रतिज्ञा नहीं माना जा सकता. राजस्थान में बदलते घटनाक्रम के बीच बहुत कुछ चौंकाने वाला सामने आ सकता है.
पूंजीवादी देशों में सोशल सिक्योरिटी पर काफी ध्यान दिया जाता है और ये माना जाता है कि पूंजीवादी शासन का मतलब लोककल्याणकारी राज्य की विदाई नहीं है. लेकिन भारत में इस ओर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया जा रहा है
एक भ्रामक कहानी बनाई जा रही है कि भारत ने अपने राजनीतिक संकल्प और फौजी ताकत के बूते चीनियों को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है, इस तरह के दावे हमें नुकसान ही पहुंचाएंगे.
राजनीतिक महत्वकांक्षाएं रखने वाले नेता जिस दौर में छात्र संगठन और युवा संगठन में अपनी जगह बनाने के लिए दर-दर भटका करते हैं, झंडे उठाया करते हैं उस दौर में सचिन और ज्योतिरादित्य कांग्रेस में मंत्री बन गए थे.
अगर मज़हबी खयालात, नैतिकता और वक़्त की बर्बादी किसी एक खेल को बैन करने का पैमाना हैं, तो फिर इमरान खान सरकार को पूरा डिजिटल स्पेस ही बंद कर देना चाहिए.
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है